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फाइलेरिया या à¤à¤²à¤¿à¤«à¥‡à¤‚टाइसिस के उपचार निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित तरीके से किया जा सकता है :-
à¤à¤‚टीपैरासिटिक दवाà¤à¤‚, जैसे – डायथाइलकारà¥à¤¬à¤¾à¤®à¤¾à¤œà¤¼à¤¿à¤¨ (डीईसी) Diethylcarbamazine (DEC), मेकà¥à¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¤¨ Mectizan, और à¤à¤²à¥à¤¬à¥‡à¤‚डाज़ोल (अलà¥à¤¬à¥‡à¤¨à¥à¤œà¤¼à¤¾) Albendazole (Albenza)
पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ को साफ करने के लिठअचà¥à¤›à¥€ सà¥à¤µà¤šà¥à¤›à¤¤à¤¾ का उपयोग करें।
पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ को ऊपर उठा कर रखना चाहिà¤à¥¤
पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में घावों की देखà¤à¤¾à¤² करते रहें।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° के निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥‹à¤‚ के आधार पर वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® करें, जितना हो सके सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ रहें।
अगर फाइलेरिया के मामला काफी गंà¤à¥€à¤° हो जाता है तो à¤à¤¸à¥‡ में सरà¥à¤œà¤°à¥€ à¤à¥€ की जा सकती है। जिसमें पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ के लिठपà¥à¤¨à¤°à¥à¤¨à¤¿à¤°à¥à¤®à¤¾à¤£ सरà¥à¤œà¤°à¥€ या पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ लसीका ऊतक को हटाने के लिठसरà¥à¤œà¤°à¥€ की जा सकती है।
फाइलेरिया होने पर à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• और मनोवैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• उपचार à¤à¥€ दिया जाना जरूरी है, ताकि रोगी खà¥à¤¦ को कलां के रूप में न देखें। इसके लिठपरिवार और रोगी दोनों की काउंसलिंग की जा सकती है।
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें, “पैर को रगड़ कर साफ करने से परहेज करना चाहिà¤à¥¤ पैरों को बराबर रख कर आरामदेह मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ में बैठना चाहिà¤à¥¤ पटà¥à¤Ÿà¥‡ वाला ढीला चपà¥à¤ªà¤² पहनने के साथ सूजन वाली जगह को हमेशा चोट से बचाना चाहिà¤à¥¤â€œ
फाइलेरिया से बचाव कैसे करें-
अगर आप फाइलेरिया à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ रोग है जिसका कोई उपचार नहीं है। इस लिठसबसे उतà¥à¤¤à¤® है कि इससे बचाव किया जाà¤, जिसके लिठआप निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित तरीके अपना सकते हैं :-
शाम के वकà¥à¤¤ बाहर या घर में पूरे कपड़े पहनें।
सोने से पहले मचà¥à¤›à¤°à¤¦à¤¾à¤¨à¥€ लगाà¤à¤‚।
घर में मचà¥à¤›à¤° à¤à¤—ाने वाली लिकà¥à¤µà¤¿à¤¡ दवाओं का उपयोग करें।
बीच-बीच में बॉडी चेकअप के लिठà¤à¥€ डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास जरूर जाà¤à¤‚।
अगर आपको सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में बदलाव या दरà¥à¤¦ महसूस हो रहा है तो इस बारे में डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करें।
अगर आप à¤à¤¸à¥€ इलाके में रहते हैं जहाठफाइलेरिया होने की आशंका जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ है तो à¤à¤¸à¥‡ में मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ और अनà¥à¤¯ कीटों से जितना हो सके उतना बचाव करें।
मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ से बचाव करने के लिठहमेशा पà¥à¤°à¥‡ कपड़े पहने और मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ से बचाव करने वाली दवाओं या कà¥à¤°à¥€à¤® का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें।
फाइलेरिया होने पर कà¥à¤¯à¤¾ खाना चाहिà¤-
फाइलेरिया होने पर पूछे जाना वाला यह सबसे बड़ा सवाल है। अगर आप इस गंà¤à¤°à¥€ रोग से जूठरहे हैं तो सबसे बेहतर होगा कि आप इस बारे में अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करें। डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपकी तमाम जांच के आधार पर इस बारे में सटीक और पà¥à¤°à¥€ जानकारी दे सकते हैं। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि आहार से जà¥à¥œà¥€ कोई à¤à¥€ जानकारी देने के लिठरोगी की सà¤à¥€ जांच रिपोरà¥à¤Ÿà¥à¤¸ को देखा जाना सबसे जरूरी होता है।
वैसे सामानà¥à¤¯ तौर पर फाइलेरिया रोगी को उन सà¤à¥€ चीजों से दूर रहने की सलाह दी जाती है जिसकी वजह से शरीर में सूजन बà¥à¥‡à¥¤ अगर फाइलेरिया के कारण रोगी के शरीर में जखà¥à¤® होने लग गये हैं तो à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में रोगी को उन सà¤à¥€ चीजों से à¤à¥€ दूर रहने की सलाह दी जाती है जिसकी वजह से उनके शरीर में हà¥à¤ जखà¥à¤®à¥‹à¤‚ में जलन होना शà¥à¤°à¥‚ हो जाठया पस पड़ जाà¤à¥¤ उदाहरण के लिठदूध, अचार और तेज मसालेदार खाना।
सामानà¥à¤¯ रूप से फाइलेरिया होने पर रोगी को मौसमी और लोकल आहार लेने की सलाह दी जाती है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह आहार उनके शरीर के लिठसबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ उपयोगी होता है। फाइलेरिया के इलाज के लिठअपने रोज के खाने में कà¥à¤› आहार जैसे लहसà¥à¤¨, अनानास, मीठे आलू, शकरकंदी, गाजर और खà¥à¤¬à¤¾à¤¨à¥€ आदि शामिल करें। इनमें विटामिन ठहोता है और बैकà¥à¤Ÿà¤°à¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को मारने के लिठविशेष गà¥à¤£ à¤à¥€ होते हैं।
आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में फाइलेरिया के लिठकà¥à¤¯à¤¾ उपाय है-
आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में à¤à¥€ फाइलेरिया के लिठकोई सटीक उपचार मौजूद नहीं है। लेकिन हाà¤, इसके लिठकà¥à¤› खास उपाय मौजदू है जिनकी मदद से इस रोग से थोड़ा आराम मिल सकता है। निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित कà¥à¤› आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• उपायों की मदद से फाइलेरिया से बचाव किया जा सकता हैं :-
लौंग Cloves – अगर आप फाइलेरिया से जूठरहे हैं या à¤à¤¸à¥‡ इलाके में रहते हैं जहा फाइलेरिया होने का खतरा रहता है तो आप अपने खाने में लौंग का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें। लौंग में मौजूद à¤à¤‚जाइम परजीवी के पनपते ही उसे खतà¥à¤® कर देते हैं और बहà¥à¤¤ ही पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ तरीके से परजीवी को रकà¥à¤¤ से नषà¥à¤Ÿ कर देते हैं।
काले अखरोट का तेल black walnut oil – अखरोट के अंदर खून साफ़ करने और खून में मौजूद परजीवियों को खतà¥à¤® करने की ताक़त होती है। à¤à¤¸à¥‡ में आप फाइलेरिया से अपना बचाव करने के लिठकाले अखरोट के तेल को à¤à¤• कप गरà¥à¤® पानी में तीन से चार बूंदे डालकर ले सकते हैं। अखरोट के अंदर मौजूद गà¥à¤£à¥‹à¤‚ से खून में मौजूद कीड़ों की संखà¥à¤¯à¤¾ कम होने लगती है और धीरे धीरे à¤à¤•दम खतà¥à¤® हो जाती है। जलà¥à¤¦ परिणाम के लिठकम से कम छह हफà¥à¤¤à¥‡ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ इस उपाय को करें। इसे दिन à¤à¤° में कितनी बार इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करना है आप इस बारे में अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करें।
आंवला Gooseberry – फाइलेरिया होने पर आंवला à¤à¥€ लिया जा सकता है, इसमें पà¥à¤°à¤šà¥à¤° मातà¥à¤°à¤¾ में विटामिन सी होता है। इसके अलावा इसके अंदर à¤à¤¨à¥à¤¥à¥‡à¤²à¤®à¤¿à¤‚थिंक (Anthelmintic) à¤à¥€ होता है जो कि घाव को जलà¥à¤¦à¥€ à¤à¤°à¤¨à¥‡ में मदद करता है।
अशà¥à¤µà¤—ंधा Ashwagandha – आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में अशà¥à¤µà¤—ंधा सबसे ताक़तवर औषधियों में शामिल की जाती है। यह इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® को मजबूत करने में काफी मददगार होती है। फाइलेरिया होने पर कमजोर हो चà¥à¤•े इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® को मजबूत करने के लिठअशà¥à¤µà¤—ंधा का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जा सकता है।
बेल पतà¥à¤° के पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ का लेप bael leaf paste – धारà¥à¤®à¤¿à¤• रूप से बेल पतà¥à¤° का पेड़ à¤à¤¾à¤°à¤¤ में काफी महतà¥à¤µ रखता है। वहीं यह औषधि के रूप में à¤à¥€ काफी खास हैं। बेल पतà¥à¤° के पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ से बने लेप की मदद से शरीर में आई किसी à¤à¥€ सूजन से छà¥à¤Ÿà¤•ारा पाया जा सकता है। इसके लिठआप बेल पतà¥à¤° के पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ को साफ़ कर के उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हलà¥à¤•ा कूट लें फिर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हलà¥à¤•ा गरà¥à¤® कर लें फिर तैयार लेप को सूजन वाली जगह पर लगा लें।
अदरक Ginger – फाइलेरिया से निजात के लिठसूखे अदरक का पाउडर या सोंठका रोज गरम पानी से सेवन करें। इसके सेवन से शरीर में मौजूद परजीवी नषà¥à¤Ÿ होते हैं और मरीज को जलà¥à¤¦à¥€ ठीक होने में मदद मिलती है।
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