मैं अपने फाइलेरिया को कैसे कम कर सकता हूं?HealthPlanet

Posted on Thu 22nd Dec 2022 : 16:03

फाइलेरिया या एलिफेंटाइसिस के उपचार निम्नलिखित तरीके से किया जा सकता है :-

एंटीपैरासिटिक दवाएं, जैसे – डायथाइलकार्बामाज़िन (डीईसी) Diethylcarbamazine (DEC), मेक्टिज़न Mectizan, और एल्बेंडाज़ोल (अल्बेन्ज़ा) Albendazole (Albenza)

प्रभावित क्षेत्रों को साफ करने के लिए अच्छी स्वच्छता का उपयोग करें।

प्रभावित क्षेत्रों को ऊपर उठा कर रखना चाहिए।

प्रभावित क्षेत्रों में घावों की देखभाल करते रहें।

डॉक्टर के निर्देशों के आधार पर व्यायाम करें, जितना हो सके सक्रिय रहें।

अगर फाइलेरिया के मामला काफी गंभीर हो जाता है तो ऐसे में सर्जरी भी की जा सकती है। जिसमें प्रभावित क्षेत्रों के लिए पुनर्निर्माण सर्जरी या प्रभावित लसीका ऊतक को हटाने के लिए सर्जरी की जा सकती है।

फाइलेरिया होने पर भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक उपचार भी दिया जाना जरूरी है, ताकि रोगी खुद को कलां के रूप में न देखें। इसके लिए परिवार और रोगी दोनों की काउंसलिंग की जा सकती है।

ध्यान दें, “पैर को रगड़ कर साफ करने से परहेज करना चाहिए। पैरों को बराबर रख कर आरामदेह मुद्रा में बैठना चाहिए। पट्टे वाला ढीला चप्पल पहनने के साथ सूजन वाली जगह को हमेशा चोट से बचाना चाहिए।“

फाइलेरिया से बचाव कैसे करें-

अगर आप फाइलेरिया एक ऐसा रोग है जिसका कोई उपचार नहीं है। इस लिए सबसे उत्तम है कि इससे बचाव किया जाए, जिसके लिए आप निम्नलिखित तरीके अपना सकते हैं :-

शाम के वक्त बाहर या घर में पूरे कपड़े पहनें।

सोने से पहले मच्छरदानी लगाएं।

घर में मच्छर भगाने वाली लिक्विड दवाओं का उपयोग करें।

बीच-बीच में बॉडी चेकअप के लिए भी डॉक्टर के पास जरूर जाएं।

अगर आपको स्तनों में बदलाव या दर्द महसूस हो रहा है तो इस बारे में डॉक्टर से बात करें।

अगर आप ऐसी इलाके में रहते हैं जहाँ फाइलेरिया होने की आशंका ज्यादा है तो ऐसे में मच्छरों और अन्य कीटों से जितना हो सके उतना बचाव करें।

मच्छरों से बचाव करने के लिए हमेशा पुरे कपड़े पहने और मच्छरों से बचाव करने वाली दवाओं या क्रीम का इस्तेमाल करें।

फाइलेरिया होने पर क्या खाना चाहिए-

फाइलेरिया होने पर पूछे जाना वाला यह सबसे बड़ा सवाल है। अगर आप इस गंभरी रोग से जूझ रहे हैं तो सबसे बेहतर होगा कि आप इस बारे में अपने डॉक्टर से बात करें। डॉक्टर आपकी तमाम जांच के आधार पर इस बारे में सटीक और पुरी जानकारी दे सकते हैं। क्योंकि आहार से जुड़ी कोई भी जानकारी देने के लिए रोगी की सभी जांच रिपोर्ट्स को देखा जाना सबसे जरूरी होता है।

वैसे सामान्य तौर पर फाइलेरिया रोगी को उन सभी चीजों से दूर रहने की सलाह दी जाती है जिसकी वजह से शरीर में सूजन बढ़े। अगर फाइलेरिया के कारण रोगी के शरीर में जख्म होने लग गये हैं तो ऐसी स्थिति में रोगी को उन सभी चीजों से भी दूर रहने की सलाह दी जाती है जिसकी वजह से उनके शरीर में हुए जख्मों में जलन होना शुरू हो जाए या पस पड़ जाए। उदाहरण के लिए दूध, अचार और तेज मसालेदार खाना।

सामान्य रूप से फाइलेरिया होने पर रोगी को मौसमी और लोकल आहार लेने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह आहार उनके शरीर के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी होता है। फाइलेरिया के इलाज के लिए अपने रोज के खाने में कुछ आहार जैसे लहसुन, अनानास, मीठे आलू, शकरकंदी, गाजर और खुबानी आदि शामिल करें। इनमें विटामिन ए होता है और बैक्टरीरिया को मारने के लिए विशेष गुण भी होते हैं।

आयुर्वेद में फाइलेरिया के लिए क्या उपाय है-

आयुर्वेद में भी फाइलेरिया के लिए कोई सटीक उपचार मौजूद नहीं है। लेकिन हाँ, इसके लिए कुछ खास उपाय मौजदू है जिनकी मदद से इस रोग से थोड़ा आराम मिल सकता है। निम्नलिखित कुछ आयुर्वेदिक उपायों की मदद से फाइलेरिया से बचाव किया जा सकता हैं :-

लौंग Cloves – अगर आप फाइलेरिया से जूझ रहे हैं या ऐसे इलाके में रहते हैं जहा फाइलेरिया होने का खतरा रहता है तो आप अपने खाने में लौंग का इस्तेमाल करें। लौंग में मौजूद एंजाइम परजीवी के पनपते ही उसे खत्म कर देते हैं और बहुत ही प्रभावी तरीके से परजीवी को रक्त से नष्ट कर देते हैं।

काले अखरोट का तेल black walnut oil – अखरोट के अंदर खून साफ़ करने और खून में मौजूद परजीवियों को खत्म करने की ताक़त होती है। ऐसे में आप फाइलेरिया से अपना बचाव करने के लिए काले अखरोट के तेल को एक कप गर्म पानी में तीन से चार बूंदे डालकर ले सकते हैं। अखरोट के अंदर मौजूद गुणों से खून में मौजूद कीड़ों की संख्या कम होने लगती है और धीरे धीरे एकदम खत्म हो जाती है। जल्द परिणाम के लिए कम से कम छह हफ्ते प्रतिदिन इस उपाय को करें। इसे दिन भर में कितनी बार इस्तेमाल करना है आप इस बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।

आंवला Gooseberry – फाइलेरिया होने पर आंवला भी लिया जा सकता है, इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन सी होता है। इसके अलावा इसके अंदर एन्थेलमिंथिंक (Anthelmintic) भी होता है जो कि घाव को जल्दी भरने में मदद करता है।

अश्वगंधा Ashwagandha – आयुर्वेद में अश्वगंधा सबसे ताक़तवर औषधियों में शामिल की जाती है। यह इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में काफी मददगार होती है। फाइलेरिया होने पर कमजोर हो चुके इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए अश्वगंधा का इस्तेमाल किया जा सकता है।

बेल पत्र के पत्तों का लेप bael leaf paste – धार्मिक रूप से बेल पत्र का पेड़ भारत में काफी महत्व रखता है। वहीं यह औषधि के रूप में भी काफी खास हैं। बेल पत्र के पत्तों से बने लेप की मदद से शरीर में आई किसी भी सूजन से छुटकारा पाया जा सकता है। इसके लिए आप बेल पत्र के पत्तों को साफ़ कर के उन्हें हल्का कूट लें फिर उन्हें हल्का गर्म कर लें फिर तैयार लेप को सूजन वाली जगह पर लगा लें।

अदरक Ginger – फाइलेरिया से निजात के लिए सूखे अदरक का पाउडर या सोंठ का रोज गरम पानी से सेवन करें। इसके सेवन से शरीर में मौजूद परजीवी नष्ट होते हैं और मरीज को जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है।

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