मुझे लेबर के लिए हॉस्पिटल कब जाना चाहिए?HealthPlanet

Posted on Wed 12th Oct 2022 : 09:21

Labour pain (in hindi) : लक्षण और संभालने के तरीके


प्रत्येक महिला के लिए माँ बनना उनकी ज़िन्दगी का एक अद्भुत पहलु होता है और हर महिला चाहती है की उनका बच्चा स्वस्थ रहे| अधिकतर महिलाएं, जो नॉर्मल डिलिवरी की इच्छुक होती है, अक्सर प्रसव पीड़ा (labour pain in hindi) के विषय में भयभीत होती है| और कुछ ऐसे ही भयभीत थी तृप्ति, 28, जो पहली बार माँ बनने की तैयारी में थी| तृप्ति नॉर्मल डिलिवरी ही चाहती थी मगर उन्हें प्रसव पीड़ा का डर था| उन्हें संदेह था की शायद वह यह पीड़ा सहन नहीं कर पाएंगीं|

परंतु तृप्ति को कहीं न कहीं लगा कि यदि वह सही हॉस्पिटल और डॉक्टर की निगरानी में प्रसव के लिए तैयारी करें , तो शायद वह यह दर्द सहन कर लेंगीं।


क्या होती है प्रसव पीड़ा? (labour pain in hindi)

माँ को बच्चे के जन्म (नार्मल डिलीवरी) के दौरान बार बार होने वाला दर्द या पीड़ा ही ‘प्रसव पीड़ा’ या ‘लेबर पेन‘(labour meaning in hindi) कहलाता है| कई महिलाओं के लिए यह दर्द सामान्य माहवारी दर्द या उस से थोड़ा ज़्यादा पीड़ा युक्त होता है तो कई महिलाओं के लिए यह दर्द असहनीय होता है|

यह सुनकर तृप्ति के मन में बहुत सारे सवाल उठें | उन्होंने डॉक्टर से पूछे लेबर पेन के लक्षण|

प्रसव पीड़ा के लक्षण (Signs of Labour Pain)

लेबर पेन शुरू होने से पूर्व माँ कुछ लक्षण अनुभव करती है जैसे:

समय समय पर आने वाले दर्दनाक संकुचन (contraction meaning in hindi) और पेट का खींचाव
‘शो’ : म्यूकस प्लग का निकलना
पेट और पीठ में दर्द
बार बार शौचालय जाने की तीव्र इच्छा
तरल पदार्थ का लगातार निर्वाह यानी पानी की थैली फटना

लेबर पेन किस महीने में आरंभ हो सकता है ?

लेबर पेन (labour pain in hindi) का आभास नौवें महीने या 37वें से 40वें सप्ताह के बीच कभी भी हो सकता है|

“कई बार आपको लेबर से पहले अनियमित, अल्पावधि संकुचन (short- term contractions) महसूस हो सकते है, जो लेबर पेन नहीं बल्कि नकली संकुचन (false labour pain in hindi) होता है| और इसमें घबराने की कोई बात नहीं होती| यह आपके शरीर का लेबर की तैयारी करने का संकेत होता है,” डॉ अनीता समझाती है।

सारी जानकारी लेने के बाद तृप्ति के मन में सवाल आता है की “क्या ऐसा संभव है की सही समय आने पर लेबर पेन हो ही ना? क्या इसका कोई उपाय नहीं?”
लेबर पेन कैसे लाए ? (Labour pain kaise laye)

अक्सर महिलाएं ‘labour pain badhane ke upay’ पूछती है|

लेबर पेन का प्राकृतिक रूप से आरंभ होना ही बेहतर है | क्यूंकि यह कुदरती प्रक्रिया है, जितनी कम छेड़खानी करें उतना अच्छा है। लेबर पेन बढ़ाने के सबसे आसान उपाय है

नियमित रूप से व्यायाम करना और रोज़ 45 मिनट से 60 मिनट चलना
उचित मात्रा में पानी पीना और अपने खान पान पर गौर करना

अगर आप अपने स्वस्थ्य का ध्यान रखकर इन नियमो का पालन करते है तो आपकी प्रसव पीड़ा बिना किसी चिकित्सीय दखल के शुरू हो सकती है |
How to start labour pain at home (in hindi)

अक्सर माना जाता है की घी खाने से या castor oil पीने से लेबर पेन शुरू हो जाते है और संकुचन के दौरान कम दर्द होता है |

“इन घरेलु नुश्खे में कोई सच्चाई नहीं है। Castor oil से बल्कि दर्द और डायरिया हो सकता है। घी खाने से वज़न बढ़ जाता है जिससे प्रसव के समय पर दिक्कत हो सकती है इसीलिए नियमित रूप से व्यायाम और तेज़ चलना ही बेहतर माना जाता है|”

यदि उचित व्यायाम के बाद भी आपकी डिलिवरी की तारीख तक प्रसव पीड़ा शुरू न हो तो कुछ मामलों में लेबर प्रवृत (induce meaning in hindi) किया जा सकता है | इसमें चिकित्सीय रूप से लेबर पेन लाया जा सकता है| आपकी डॉक्टर तय करेंगीं की आपकी स्तिथि में induction of labour कराना ठीक है या नहीं।

तृप्ति यह जानकार संतुष्ट हुई कि डॉ अनीता कोई अनावश्यक प्रक्रिया को बढ़ावा नहीं देती|

उनका अगला सवाल पीड़ा को सहन करने से संभंधित था |
प्रसव पीड़ा का सामना कैसे किया जा सकता है ?


उन्होंने फ़िर बताए कुछ आसान तरकीब:

Antenatal class में भाग लेना: ” Antenatal class आपको और आपके पति को आने वाले शिशु के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करती है| इन classes में आपको कई ऐसी व्यायाम बताई जायेंगीं जो प्रसव पीड़ा कम करने में मदद करेंगी|”

यहाँ पढ़े क्यों ज़रूरी है यह class: Reasons to join a Labour and Delivery Antenatal Class

अपना Birthing partner का चयन करना: ज़रूरी है कि आप एक ऐसे birthing partner को चुने जो प्रसव पीड़ा के दौरान न केवल आपको प्रोत्साहित करें बल्कि आपको व्यायाम करने में भी मदद करें। आपको अपने birthing partner के साथ antenatal class में हिस्सा लेना चाहिए। इस class में आपके partner को यह भी सिखाया जाएगा कि आपको प्रसव के समय कैसे मालिश करना चाहिए ताकि आपको आराम मिलें।


मुझे हॉस्पिटल के लिए कब निकलना चाहिए?

“संकुचन शुरू होने के पश्चात ज़रूरी है की आप थोड़ी देर अपने contractions पर निगरानी रखें| जब आप हर 10 मिनट पर संकुचन महसूस करें या दर्द असहनीय हो जाए, तब आपको हॉस्पिटल के लिए निकलना चाहिए|”

“घर पर संकुचन की शुरुआत होने के कारण आपको घबराने की ज़रूरत नहीं है| संकुचन शुरू होने के बाद भी हॉस्पीटल तक आने के लिए आपके पास बहुत वक़्त होता है| इस बीच आप घर पर ही इन आसान तरकीब द्वारा अपना दर्द संभाल सकती है:

गर्म पानी से नहाना : गर्म पानी आपको हलके दर्द से राहत दिला सकता है इसीलिए यह तरीका ज़रूर अपनाना चाहिए|
सास लेने के व्यायाम: Antenatal classes में दी गई जानकारी इस दौरान सबसे ज़्यादा मददगार रहेगी| इन classes में बताए गए व्यायाम आपको दर्द सहन करने की शक्ति प्रदान करेंगी और सास लेने के व्यायाम से आप अपने दर्द पर नियंत्रण ला सकेंगीं|
शारीरिक गतिविधि: प्रसव पीड़ा के दौरान शारीरिक गतिविधियााँ जैसे तीव्र सैर और नियमित व्यायाम आपको काफी मदद कर सकते है|

हॉस्पिटल आने के बाद आपको कई अन्य दर्द सहने के विकल्प मिलेंगे|

ऐसे ही कुछ विकल्पों के बारे में बताती है डॉ अनीता:

“ऑप्शनस जैसे: Labouring in water, Entonox, आदि उपलबध है जो पीड़ा खत्म नहीं कर सकता है मगर यह पीड़ा सहने की शक्ति ज़रूर प्रदान करता है|”

यह विकल्प आपके लिए सेफ है मगर आप अपने हिसाब से अपने डॉकटर से सलाह लेकर सही ऑप्शन चुने|

इन ऑप्शंस के बारे में जानने के लिए तृप्ति बहुत उत्सुक थी|


“एपीड्यूरल के द्वारा ही आप एक painless delivery का अनुभव कर सकते है मगर epidural को अंतिम उपाय माना जाना चाहिए” ऐसा कहती है डॉ अनीता|

“इसमें anthesiologist आपके पीठ के निचले हिस्से में एक इंजेक्शन देता है और एक प्लास्टिक ट्यूब के माध्यम से दवा पहुँचाई जाती है जो आपकी पीड़ा के एहसास को खत्म कर देती है| यह इंजेक्शन आपको सक्रिय प्रसव (active labour) के दौरान ही दी जाता है|”



“वॉटर बर्थ भारत में ज़्यादा प्रचलित नहीं है मगर सीताराम भारतीय में आपके लिए यह भी एक ऑप्शन मौजूद है| शरीर और मन को शांत रखने के लिए गर्म पानी उच्च माना जाता है और यही कारण है की महिलाओं को वॉटर बर्थ में लेबर पेन सहन करने में आसानी होती है|” कहती है डॉ अनीता|

इस तकनीक के बारे में अच्छे से जान ने के लिए आप आज ही अपने गयनेकोलॉजिस्ट से मिले|

सब ऑप्शंस और अपने सारे सवालों के जवाब लेकर तृप्ति का मन शांत हुआ|


तृप्ति अपने परामर्श से बहुत ही खुश थी| डॉ अनीता की सलाह के हिसाब से तृप्ति ने अंटेनेटल क्लास में हिस्सा लिया|

वह 38th सप्ताह में लेबर में गई और एक स्वस्थ शिशु को normal delivery द्वारा जन्म दिया|

जन्म देने के बाद वह शेयर करती है अपना अनुभव और कहती है “अंटेनेटल क्लासेस द्वारा मिला ज्ञान मेरे लिए लेबर के दौरान बहुत मददगार रहा| हर गर्भवती महिला को यह क्लास एक बार तो ज़रूर अटेंड करनी चाहिए| उसके बाद वह खुद ही इसकी अहमियत समझ जाएंगी|”

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