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जब बचà¥à¤šà¥‡ इस दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में पैदा होते हैं, तो उनका वजूद à¤à¤• बेजà¥à¤¬à¤¾à¤¨ जानवर या हिलने-डोलने वाले खिलौने से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ अहमियत नहीं रखता। उनकी हर चीज पर à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ गहरी नजर होती है जिसका अहसास हम लोग नहीं कर सकते जो जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° नजर अंदाज हो जाता है। इस लेख में हम बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का लालन-पालन कैसे करे और अचà¥à¤›à¥‡ माता पिता कैसे बने या दà¥à¤¸à¤°à¥‡ शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ में कहे तो औलाद (संतान) की परवरिश के बारे में बात करेंगे और जानेगे की बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के माता-पिता पर कà¥à¤¯à¤¾ अधिकार हैं।
बचà¥à¤šà¥‡ का दिमाग Camera की तरह काम करता है उसके सामने जो à¤à¥€ चीज़ आती है उसको वह Capture कर लेता है और उसके बारे में अधिक जानने की जिजà¥à¤žà¤¾à¤¸à¤¾ उसके अनà¥à¤¦à¤° पैदा होती है। सच तो यह है कि बचà¥à¤šà¤¾ आà¤à¤– खोलते ही हर चीज़ का जायजा लेना शà¥à¤°à¥‚ कर देता है। जितनी कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ उसमे होती है उसके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° वह हर चीज़ को जांचने और जानने की कोशिश करता है। जिसका पता उसके बोलने पर ही हमको हो पता है। वह पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• चीज़ पर Focus करता है। इसकी Starting उसके आस-पास से ही होती है।
बचपन में बचà¥à¤šà¤¾ कैसे सीख लेता है और उसकी इचà¥à¤›à¤¾ कà¥à¤¯à¤¾ होती है
यानि बचà¥à¤šà¤¾ जिस माहोल को अपने आस-पास देखता है उसके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° ही उसमे ढल जाता है। उसके बाद जो वह अपने पास के लोगों को करता हà¥à¤† देखता है ठीक उसी तरह आप à¤à¥€ करने की कोशिश करता है। यह बात अलग है की वह उसमें कामयाब नहीं होता लेकिन कोशिश उसकी यही रहती है की मैं à¤à¥€ इस कारà¥à¤¯ को करूà¤à¥¤ इसलिठबचà¥à¤šà¤¾ सबसे पहले अपने माता – पिता के बीच अंतर करने में सबसे पहले कामयाब होता है। इसके बाद वह अपने माà¤-बाप के माधà¥à¤¯à¤® से दूसरी चीज़ों को पहचानने लगता है। जो à¤à¥€ उसके करीब होता है जैसे की माà¤-बाप, à¤à¤¾à¤ˆ-बहन, चाचा-चाची, दादा-दादी आदि इन सबको वह à¤à¤²à¥€ à¤à¤¾à¤‚ति जानने लगता है। फिर यही चीज़ें उसके पलने-बà¥à¤¨à¥‡ की वजह बनती हैं और उसी विकाशशील टाइम में उसकी जानकारी दिन दोगà¥à¤¨à¥€- रात चोगà¥à¤¨à¥€ तरकà¥à¤•ी करती जाती है।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठमाà¤-बाप कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ करते हैं
जिस पà¥à¤°à¤•ार à¤à¤• किसान फसल पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ के लिठअपनी खेती में दिन-रात मेहनत करता है। अचà¥à¤›à¥€ फसल के लिठउसकी निराई-गà¥à¥œà¤¾à¤ˆ, खाद डालना, सà¥à¤ªà¥à¤°à¥‡ आदि करता है। वह शà¥à¤°à¤†à¤¤ से ही यानि बीज बोने के टाइम से ही उसमे मेहनत करता है तथा जो चीज़ उस फसल के लिठबेहतर होती है वह उसको कर गà¥à¤œà¤°à¤¤à¤¾ है। तब जाकर किसान को उसकी मेहनत का फल मिलता है और अचà¥à¤›à¥€ फसल हासिल करने में कामयाब होता है। इसी तरह संतान à¤à¥€ माà¤-बाप के लिठखेती की तरह होती है। माà¤-बाप à¤à¥€ अपने बेटे-बेटियों के लिठमेहनत करते-करते थक जाते हैं। बचà¥à¤šà¥‡ के पैदा होने से पहले ही माता-पिता अपने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के बारे में सोचने लगते हैं। उनकी देखà¤à¤¾à¤² और रहन-सहन का इंतजाम करते हैं। जब बचà¥à¤šà¥‡ कà¥à¤› बड़े होते हैं तो उनके कपड़ों (dress), à¤à¥‹à¤œà¤¨, बीमारी में दवाई दिलाना, school fees का à¤à¥à¤—तान करना इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ का बंदोबसà¥à¤¤ माà¤-बाप को ही करना होता है।
औलाद à¤à¥€ माता-पिता के लिठखेती की तरह होती है इसलिठइस खेती में जरा à¤à¥€ लापरवाही नहीं करनी चाहिà¤à¥¤ बलà¥à¤•ि जहाठतक हो सके उसके विसà¥à¤¤à¤¾à¤° पर नजर रखते हà¥à¤ बचà¥à¤šà¥‡ की हर हरकत (Locomotion) पर खास नजर रखें। देखें की बचà¥à¤šà¥‡ का रà¥à¤à¤¾à¤¨ किस चीज़ में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ है अगर उसका रà¥à¤à¤¾à¤¨ गलत चीज़ों पर है तो उसको उसी टाइम रोके ताकि उसके आगे के बार में गलती न कर सकें।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का लालन-पालन (परवरिश) कैसे करें और अचà¥à¤›à¥‡ माà¤-बाप कैसे बने
जिस पà¥à¤°à¤•ार à¤à¤• मजबूत à¤à¤µà¤¨ बनाने के लिठमजबूत नींव की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है। ठीक उसी तरह à¤à¤• सपूत पà¥à¤¤à¥à¤° (son) or पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ (daughter) पाने के लिठबचपन की study बेहतर होनी चाहिà¤à¥¤ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का बचपन à¤à¥€ उनकी नींव (बà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤¦) होता है इसलिठउस टाइम उनको मजबूती की जरà¥à¤°à¤¤ होती है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनकी कामयाबी के लिठबà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤¦ रखने का यही वक़à¥à¤¤ होता है। अब यह टाइम माठबाप के लिठबहà¥à¤¤ ही लाà¤à¤¦à¤¾à¤¯à¤• है कि अपने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को कामयाब बनाने के लिठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करें। à¤à¤• अचà¥à¤›à¥‡ माता-पिता को चाहिठकी वह इस वक़à¥à¤¤ से फायदा उठायें और उनको सफाई, छोटे बड़ों से बोलने की तमीज,मजहब, मोहबà¥à¤¬à¤¤, पà¥à¤¯à¤¾à¤°-पà¥à¤°à¥‡à¤® से रहने का तरीका, लेटने-सोने व खाने का तरीका सिखाà¤à¤‚। बचà¥à¤šà¤¾ अपने माठबाप के पास रहते हà¥à¤ इन चीज़ों को सीखेगा उसके बाद सà¥à¤•ूल या मदरसे में पà¥à¥‡à¤—ा यानी पढाई करेगा तो वह सà¤à¥€ खूबियाठइसमें उà¤à¤° कर सामने आà¤à¤à¤—ी जो माता पिता से हासिल की हैं। इसके बाद वह कामयाब होकर à¤à¤• चमकदार सितारा बनकर चमकेगा। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को सही मारà¥à¤— दिखाना ही अचà¥à¤›à¥‡ माà¤-बाप की पहचान होती है।
आजकल माà¤-बाप अपने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की शिकायत करते रहते हैं की बात नहीं मानते, बदतमीज़ होते जा रहे हैं आदि। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के बिगड़ने की वजह अकà¥à¤¸à¤° माठबाप की बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ लापरवाही है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनको सà¥à¤Ÿà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤¿à¤‚ग से ही वह बात नहीं समà¤à¤¾à¤ˆ जो उनको बहà¥à¤¤ जरà¥à¤°à¥€ थी। मैंने आपको ऊपर à¤à¥€ बताया था बचà¥à¤šà¥‡ का दिमाग à¤à¤• रिकॉरà¥à¤¡à¤° या कैमरा की तरह वरà¥à¤• करता है। इसलिठजो माठबाप उनको सिखाते हैं उसको दिमाग में संगà¥à¤°à¤¹à¤¿à¤¤ कर लेते हैं। अगर उस टाइम बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ पर मोम डैडी का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ नहीं है तो अकà¥à¤¸à¤° बचà¥à¤šà¥‡ गलत मारà¥à¤— पर चलने लगते हैं। à¤à¤• बात और आपको बतानी जरà¥à¤°à¥€ है कि बचà¥à¤šà¥‡ का सरà¥à¤µà¤ªà¥à¤°à¤¥à¤® यानि सबसे पहला सà¥à¤•ूल या मदरसा माठकी गोद होती है तथा सबसे पहले Teacher à¤à¥€ माठबाप ही होते हैं। इसलिठइस बात में कोई शक नहीं है कि माठबाप दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की तरबियत और तालीम सही नहीं होने पर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¤à¤° औलाद बिगडती है।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को कितना लाड-पà¥à¤¯à¤¾à¤° करना चाहिà¤
हद से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मोहबà¥à¤¬à¤¤ और लाड पà¥à¤¯à¤¾à¤° à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को सही मारà¥à¤— से à¤à¤Ÿà¤•ा देता है। हम मानते हैं कि संतान से लाड-पà¥à¤¯à¤¾à¤° किया जाता है लेकिन लाड-पà¥à¤¯à¤¾à¤° में à¤à¥€ अंतर होता है। à¤à¤• लाड-पà¥à¤¯à¤¾à¤° अकà¥à¤²à¤®à¤‚दी और सही तरीके से किया जाता है जिसको सà¤à¥€ करते हैं तथा à¤à¤• लाड-पà¥à¤¯à¤¾à¤° वह होता है जो अà¤à¤§à¤¾-धà¥à¤‚ध होता है जिसे अà¤à¤§à¤¾ लाड कहते हैं। बचà¥à¤šà¥‡ की पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• इचà¥à¤›à¤¾à¤“ं को पूरा करना, उनकी हर जिद पूरी करना à¤à¥€ उनकी नींव को कमजोर कर देता है। बचà¥à¤šà¤¾ अचà¥à¤›à¥€ बà¥à¤°à¥€ चीज़ों में फरà¥à¤• नहीं कर सकता है इसलिठमाठबाप ही उनके लिठअचà¥à¤›à¥‡ बà¥à¤°à¥‡ के बारे में जानते हैं।
आइये इस बात को à¤à¤• उदाहरण समà¤à¤¤à¥‡ हैं:- अगर बचà¥à¤šà¤¾ चाक़ू से खेलने की जिद करता है तो उसका पिता या माता उससे चाक़ू को छीन लेते हैं। अगर बचà¥à¤šà¤¾ चाकू से खेलने की जिद करे तो कà¥à¤¯à¤¾ उसके माता पिता उसको चाक़ू दे देंगे नहीं देंगे ना कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनको पता है की चाकू बचà¥à¤šà¥‡ को नà¥à¤•à¥à¤¸à¤¾à¤¨ पहà¥à¤‚चा सकता है।
आइये à¤à¤• दूसरा उदाहरण à¤à¥€ समठलेते हैं:- अगर बचà¥à¤šà¥‡ को कोई à¤à¥€ फौड़ा या फà¥à¤‚सी हो जाये और डॉकà¥à¤Ÿà¤° उसके ऑपरेशन के लिठकहे तो कà¥à¤¯à¤¾ माठबाप यह कह कर मना कर देंगे की बचà¥à¤šà¤¾ रोयेगा कà¤à¥€ मना नहीं करेंगे कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनको मालूम है की अगर ऑपरेशन नहीं करवाया तो बचà¥à¤šà¥‡ को जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बीमारी या खतरा हो सकता है इसलिठचाहे बचà¥à¤šà¤¾ कितना ही रोये वह फोड़े-फà¥à¤‚सी में चीरा लगवा देंगे। ठीक इसी तरह माठबाप को जरà¥à¤°à¥€ नहीं है कि वह अपने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की हर खवाहिश और जिद को पूरा करें चाहे बचà¥à¤šà¤¾ कितना ही नाराज कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ न हो जाये।
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