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कà¥â€à¤¯à¤¾ पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ दान करने से घट सकती हैं डोनर के शरीर में पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿ, जानें
देश में बढ़ते डेंगू के मामलों के कारण पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿ दान करने का चलन बढ़ रहा है. देश में डेंगू (Dengue) के मामले बढ़ने के साथ ही मरीजों में पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ घटने की समसà¥â€à¤¯à¤¾ पैदा हो रही है. à¤à¤¸à¥‡ में दवाओं के माधà¥â€à¤¯à¤® से शरीर में पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿ (Platelet) की संखà¥â€à¤¯à¤¾ को बढ़ाने के अलावा कई बार à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ आती है कि मरीज को ततà¥â€à¤•ाल पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ से पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿ चढ़ानी पड़ती हैं. लिहाजा रकà¥â€à¤¤à¤¦à¤¾à¤¨ की तरह लोगों से पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿ दान (Platelet Donation) करने के लिठà¤à¥€ कहा जा रहा है. हालांकि काफी आम हो चà¥à¤•े रकà¥â€à¤¤à¤¦à¤¾à¤¨ (Blood Donation) के मà¥à¤•ाबले पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿ दान करने को लेकर अà¤à¥€ à¤à¥€ लोगों में कà¥à¤› संशय रहता है.
हाल ही में देश में बढ़े डेंगू के मामलों के बाद पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿ दान करने वालों की संखà¥â€à¤¯à¤¾ बढ़ी है लेकिन इसी दौरान कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ à¤à¥€ लोग सामने आठहैं जिनà¥â€à¤¹à¥‹à¤‚ने पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿ दान की लेकिन उसके तà¥à¤°à¤‚त बाद डेंगू की चपेट में आ गठऔर उनकी पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿ गिरकर 50 हजार से नीचे पहà¥à¤‚च गईं और लोगों में यह डर पैदा हो गया कि यह पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿ देने की वजह से तो नहीं हà¥à¤†. हालांकि इस बारे में ऑल इंडिया इंसà¥â€à¤Ÿà¥€à¤Ÿà¥à¤¯à¥‚ट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) के पूरà¥à¤µ निदेशक डॉ. à¤à¤®à¤¸à¥€ मिशà¥à¤° कहते हैं कि पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿ दान करने से कà¤à¥€ कà¤à¥€ पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿ की कमी नहीं आती. बलà¥à¤•ि à¤à¤• वà¥â€à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ 48 घंटे के बाद दोबारा पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ दान कर सकता है.
फिलहाल जो मामले पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿ देने के बाद शरीर में इनके घटने के मामले सामने आ रहे हैं उसका पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿ दान करने से कोई लेना देना नहीं है. यह संयोग ही हो सकता है कि किसी ने पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿ दान की और फिर उसे तà¥à¤°à¤‚त बाद डेंगू (Dengue) के मचà¥â€à¤›à¤° ने काट लिया हो और फिर उसकी तबियत बिगड़ी हो. डेंगू के बà¥à¤–ार के ठीक होने के बाद ही मरीज की पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ गिरती हैं या गिरने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ होती है. यही फिलहाल सामने आठकà¥à¤› मामलों में देखा गया है. लिहाजा पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿ दान करना पूरी तरह सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है.
आपके शहर से (दिलà¥à¤²à¥€-à¤à¤¨à¤¸à¥€à¤†à¤°)
वे कहते हैं कि पहले जो डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿ लेते थे वह तकनीक कà¥à¤› अलग थी लेकिन अब पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿ à¤à¤«à¤°à¥‡à¤¸à¤¿à¤¸ मशीन की वजह से यह काफी आसान है. इस मशीन से डोनर के शरीर से सिरà¥à¤« पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿ ही निकाली जाती हैं. इसके लिठरकà¥â€à¤¦à¤¾à¤¤à¤¾ को इस मशीन से जोड़ दिया जाता है लेकिन पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿ किट में सिरà¥à¤« पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿ इकठà¥à¤ ी होती जाती हैं और बाकी का बचा हà¥à¤† रकà¥â€à¤¤ दोबारा से उसके शरीर में पहà¥à¤‚चा दिया जाता है. इस पूरी पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में करीब 40 से 60 मिनट का समय लगता है. खास बात है कि इस मशीन से इकठà¥à¤ ा की गई पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿ से मरीज के शरीर में à¤à¤• बार में 50-60 हजार पà¥â€à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿ की संखà¥â€à¤¯à¤¾ बढ़ाई जा सकती है.
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