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बचे खाने को सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ तरीके से सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° करने के 8 उपाय और जरूरी सावधानियां जानें नà¥à¤¯à¥‚टà¥à¤°à¤¿à¤¶à¤¨à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ से
à¤à¥‹à¤œà¤¨ से होने वाली बीमारियां आम हैं। इसलिठपके हà¥à¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨ को सही तरीके से सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ करना जरूरी है। डॉकà¥à¤Ÿà¤° शैली ने à¤à¥‹à¤œà¤¨ को सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° करने के कई तरीके बताठहैं।
दूषित à¤à¥‹à¤œà¤¨ खाने से लोगों को तमाम तरह की बीमारियां होती हैं और उससे उस देश की अरà¥à¤¥à¤µà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ पर असर पड़ता है। यही वजह है कि बचे हà¥à¤ खाने को सà¤à¥€ सावधानियों को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखते हà¥à¤ सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° करें, ताकि खाने से होने वाली बीमारियों को कम किया जा सके। नमामी लाइफ में नà¥à¤¯à¥‚टà¥à¤°à¥€à¤¶à¤¨à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ डॉकà¥à¤Ÿà¤° शैली तोमर का कहना है कि à¤à¥‹à¤œà¤¨ में करीब 1 मिलियन सूकà¥à¤·à¥à¤®à¤œà¥€à¤µ होते हैं जो दिखते नहीं हैं। इन माइकà¥à¤°à¥‹à¤‘रà¥à¤—ेइजà¥à¤® में बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾, वायरसिस, यीसà¥à¤Ÿ, मोलà¥à¤¡à¥à¤¸ और पैरासाइटà¥à¤¸ आदि होते हैं। डॉकà¥à¤Ÿà¤° का कहना है कि 5 डिगà¥à¤°à¥€ से 60 डिगà¥à¤°à¥€ सेलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤¸ की रेंज में बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ बहà¥à¤¤ तेजी से विकसित होते हैं। इस टेंपरेचर को ‘’डेंजर जोन’’ कहा जाता है।
इस टेंपरेचर में बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ 20 मिनट में डबल हो जाता है। इसलिठयह जानना है जरूरी है कि अगर किसी à¤à¥€ वजह से घर में पका हà¥à¤ खाना बच जाता है तो उसे कैसे सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° करें। à¤à¥‹à¤œà¤¨ को सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ तरीके से कैसे सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° किया जा सकता है, कितने समय के लिठकिया जा सकता है...आदि सवालों का जवाब दे रही हैं डॉकà¥à¤Ÿà¤° शैली तोमर।
फà¥à¤°à¤¿à¤œ में à¤à¥‹à¤œà¤¨ को रखें सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤
डॉकà¥à¤Ÿà¤° शैली तोमर कहती हैं कि पके हà¥à¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨ को रेफà¥à¤°à¤¿à¤œà¥‡à¤°à¥‡à¤Ÿà¤° में सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° करके आसानी से रखा जा सकता है। ठंडे तापमान में बैकà¥à¤Ÿà¤¿à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ तेजी से विकसित नहीं होते हैं और à¤à¥‹à¤œà¤¨ लंबे समय चल पाता है। उदाहरण के लिठअगर दूध को रूम टेंपरेचर पर खा जाठतो यह 2 घंटे में खराब हो जाà¤à¤—ा तो वहीं, अगर इसे फà¥à¤°à¤¿à¤œ में रखा जाठतो यह 4 दिन तक सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रह सकता है। हर सीजन के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° फà¥à¤°à¤¿à¤œ का टेंपरेटर 0 से 4 सेलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤¸ तक रहना चाहिà¤à¥¤ तो वहीं फà¥à¤°à¥€à¤œà¤° का तामपान 0 डिगà¥à¤°à¥€ सेलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤¸ होना चाहिà¤à¥¤ फà¥à¤°à¤¿à¤œ में à¤à¥‹à¤œà¤¨ को सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रखने के निमà¥à¤¨ तरीके हैं।
1. 2 घंटे का नियम
डॉकà¥à¤Ÿà¤° शैली का कहना है कि पके हà¥à¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨ को रूम टेंपरेचर पर 2 घंटे से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ न रखें। जो खाना जलà¥à¤¦à¥€ खराब होता है उसे 24 घंटे के अंदर कंजà¥à¤¯à¥à¤® कर लें। अगर आप फà¥à¤°à¤¿à¤œ से निकालकर खाने को गरà¥à¤® करते हैं तो धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि 70 डिगà¥à¤°à¥€ सेलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤¸ पर 2 मिनट तक खाने को गरà¥à¤® करें।
2. पका हà¥à¤ खाना और कचà¥à¤šà¥€ सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ कैसे रखें?
रेडी टू इट फूड को फà¥à¤°à¤¿à¤œ में ऊपर की तरफ रखें और कचà¥à¤šà¥‡ खाने को नीचे। इससे à¤à¥‹à¤œà¤¨ को कà¥à¤°à¥‰à¤¸ कंटैमिनेशन से बचाया जा सकता है। खाने को फà¥à¤°à¤¿à¤œ में ढक कर रखें। और छोटे व बड़े कंटेनर में रखें।
3. पके हà¥à¤ चावल को कैसे सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° करें?
डॉकà¥à¤Ÿà¤° शैली का कहना है कि पके हà¥à¤ चावल को दोबार गरà¥à¤® करके न खाà¤à¤‚ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इससे फूड पॉइजिंग हो सकती है। यह फूड पॉइजनिंग बैसिलस सेरेस (Bacillus Cereus) बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से होती है। अगर आप चावल खा रहे हैं तो धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि इसे आप पूरा खतà¥à¤® कर लें, लेकिन अगर बच रहा है तो रूम टेंपरेचर पर 1 घंटे से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ न छोड़ें। अगर इस खाने को दोबारा पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— में लाना à¤à¥€ है तो इसे पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° कà¥à¤•र में गरà¥à¤® करें और फà¥à¤°à¤¿à¤œ में 24 घंटे से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ समय तक सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° न करें।
4. रोटी और पराठा को कैसे रखें?
डॉकà¥à¤Ÿà¤° शैली ने बताया कि अगर रोटी और पराठा बच जाते हैं तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ फॉइल पेपर से कवर करके फà¥à¤°à¤¿à¤œ में सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° करें। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ किसी कंटेनर में रख कर 24 घंटे तक के लिठसà¥à¤Ÿà¥‹à¤° कर सकते हैं।
5. अंडा और हरी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को कैसे सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° करें?
बचे हà¥à¤ अंडे की सबà¥à¤œà¥€ को दोबारा गरà¥à¤® करके न खाà¤à¤‚। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह हानिकारक बन जाता है। अगर आपके पास पके हà¥à¤ अंडे हैं तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कà¥à¤› देर रूम टेंपरेचर पर रखें और उपà¤à¥‹à¤— कर लें। इसके अलावा पालक व अनà¥à¤¯ हरी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ à¤à¥€ गरà¥à¤® नहीं करनी चाहिà¤, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इनमें नाइटà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ होते हैं जो बाद में नाइटà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤Ÿà¥à¤¸ में बदल सकते हैं जो हानिकारक होते हैं।
6. बचे हà¥à¤ तेल का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करें या नहीं?
डॉकà¥à¤Ÿà¤° का कहना है कि अकà¥à¤¸à¤° घरों में जब à¤à¥€ कोई पकवान बनता है तो फà¥à¤°à¤¾à¤ˆ तेल बच जाता है। फà¥à¤°à¤¾à¤ˆ किठहà¥à¤ तेल को दोबारा पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— में न लाà¤à¤‚। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि तेल कई हानिकारक केमिकलà¥à¤¸ रिलीज करता है, जो नà¥à¤•सानदायक होते हैं। इसलिठबचे हà¥à¤ तेल का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— नहीं करना चाहिà¤à¥¤
7. गरà¥à¤® खाने को फà¥à¤°à¤¿à¤œ में न रखें
यह धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि पका हà¥à¤† खाना अगर गरà¥à¤® है तो उसे सीधे फà¥à¤°à¤¿à¤œ में न रखें। अगर आप सीधे तौर पर इसे रखते हैं तो इस à¤à¥‹à¤œà¤¨ की नà¥à¤¯à¥‚टà¥à¤°à¥€à¤¶à¤¨à¤² वैलà¥à¤¯à¥‚ खतà¥à¤® हो जाà¤à¤—ी। जब खाना ठंडा हो जाठतब उसे फà¥à¤°à¤¿à¤œ में रखें। पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि रूम टेंपरेचर पर इस फूड को 2 घंटे से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ न रखें।
8. फà¥à¤°à¤¿à¤œ में ओवर फिलिंग न करें
मैरिनेटेड फूड को रूम टेंपरेचर पर न रखें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि रूम टेंपरेचर पर बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ तेजी से बढ़ता है। मैरिनेटेड फूड को किसी कंटेनर में कवर करके फà¥à¤°à¤¿à¤œ में सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° करें। डॉकà¥à¤Ÿà¤° का कहना है कि खाने को सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रखने के चकà¥à¤•र में फà¥à¤°à¤¿à¤œ में ओवर फिलिंग न कर दें। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इससे फà¥à¤°à¤¿à¤œ में हवा के सरà¥à¤•à¥à¤²à¥‡à¤¶à¤¨ पर पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ेगा और खाना खराब होगा।
आइडियल सà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¥‡à¤œ तापमान
नà¥à¤¯à¥‚टà¥à¤°à¥€à¤¶à¤¨à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ डॉ. शैली तोमर का कहना है कि मांस, चिकन, सीफूड आदि को 0 से 2 डिगà¥à¤°à¥€ सेलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤¸ पर रखा जा सकता है और दूध व मकà¥à¤–न को 3 से 4 डिगà¥à¤°à¥€ तापमान पर रखा जा सकता है। à¤à¥‹à¤œà¤¨ को सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° करने का यह आदरà¥à¤¶ तापमान माना जाता है।
खराब à¤à¥‹à¤œà¤¨ की पहचान कैसे करें?
दà¥à¤°à¥à¤—ंध से
खाने का रंग बिगड़ना
गà¥à¤°à¥‡à¤µà¥€ और सूप कà¤à¥€-कà¤à¥€ गाढ़े और छूने में चिपचिपे हो जाते हैं।
रोटी या चपाती में फंगी की गà¥à¤°à¥‹à¤¥ होने लगती है जो आंखों से दिखाई दे जाते हैं।
à¤à¥‹à¤œà¤¨ से होने वाली बीमारियां आम हैं। पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि हमेशा फà¥à¤°à¥‡à¤¶ पका हà¥à¤† à¤à¥‹à¤œà¤¨ ही खाà¤à¤‚। अधिक समय तक à¤à¥‹à¤œà¤¨ सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° करके खाने से कई बीमारियां होती हैं। डॉकà¥à¤Ÿà¤° शैली तोमर का कहना है कि यह जरूरी नहीं है कि फà¥à¤°à¤¿à¤œ में बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ नहीं पनपता। लिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ मोनोसाटोजेनेस नामक बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ ठंडे तापमान में ही विकसित होता है। इसलिठकोशिश करें कि पके हà¥à¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨ को जलà¥à¤¦à¥€ से जलà¥à¤¦à¥€ खतà¥à¤® कर लें। अगर किनà¥à¤¹à¥€à¤‚ कारणों से पका हà¥à¤† à¤à¥‹à¤œà¤¨ बच जाता है तो ऊपर बताठगठतरीकों का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करके उसे सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ तरीके से पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— में लाया जा सकता है।
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