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बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को बोतल से दूध पिलाना: फायदे, नà¥à¤•सान व सही तरीका | Baby Ko Bottle Se Dudh Pilana
September 20, 2022 ankita mishra दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ लिखित
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को बोतल से दूध पिलाना: फायदे, नà¥à¤•सान व सही तरीका | Baby Ko Bottle Se Dudh Pilana
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Image: Shutterstock
IN THIS ARTICLE
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को बोतल से दूध पिलाना कब शà¥à¤°à¥‚ करें?
शिशॠको बोतल से कितना और कितनी बार दूध पिलाना चाहि�
बोतल से शिशॠको दूध कैसे पिलाà¤à¤‚?
कैसे पता करें कि आपका शिशॠआराम से दूध पी रहा है?
बोतल से दूध पिलाने से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾
बोतल से दूध पिलाने के फायदे
बोतल से दूध पिलाने के नà¥à¤•सान
बचà¥à¤šà¥‡ को बोतल से दूध पिलाते समय धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देने वाली बातें
अगर बचà¥à¤šà¤¾ बोतल से दूध न पिà¤, तो कà¥à¤¯à¤¾ करें?
बचà¥à¤šà¥‡ की बोतल को सही ढंग से सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¤²à¤¾à¤‡à¤œ कैसे करें?
शिशॠके लिठफीडिंग बोतल का चà¥à¤¨à¤¾à¤µ कैसे करें?
बोतल का दूध गरà¥à¤® करने का सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ तरीका कà¥à¤¯à¤¾ है?
नवजात शिशॠको à¤à¤• तय उमà¥à¤° तक सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ की खास जरूरत होती है। वहीं, कà¥à¤› परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में à¤à¤¸à¤¾ संà¤à¤µ नहीं हो पाता और बोतल से दूध पिलाना जरूरी हो जाता है। à¤à¤¸à¥‡ में शिशॠके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ को देखते हà¥à¤ अधिक सावधानी बरतना जरूरी हो जाता है। मॉमजंकà¥à¤¶à¤¨ के इस लेख में हम इसी विषय पर चरà¥à¤šà¤¾ करेंगे। यहां आप जानेंगे कि बचà¥à¤šà¥‡ को बोतल से दूध पिलाना कब शà¥à¤°à¥‚ करें और बोतल से दूध पिलाने के फायदे व नà¥à¤•सान कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ हो सकते हैं। इस विषय से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ कई अनà¥à¤¯ जरूरी बातों को इस लेख में शामिल किया गया है।
सबसे पहले जानते हैं कि शिशॠको बोतल से दूध पिलाना कब शà¥à¤°à¥‚ करना चाहिà¤à¥¤
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को बोतल से दूध पिलाना कब शà¥à¤°à¥‚ करें?
अमेरिकन à¤à¤•ेडमी ऑफ पेडियाटà¥à¤°à¤¿à¤•à¥à¤¸ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° जनà¥à¤® के बाद 6 महीने तक शिशॠको सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराना चाहिà¤à¥¤ वहीं, 6 महीने के बाद 1 साल तक शिशॠको सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के साथ सॉलिड फूड à¤à¥€ दिठजा सकते हैं (1)। अगर हम बोतल से दूध पिलाने की बात करें, तो इसका कोई निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ समय नहीं होता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ विशेषजà¥à¤ž सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ को ही पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤•ता देते हैं। वहीं, सà¥à¤¤à¤¨ में दूध का न बनना या अनà¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ जिसमें मां सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने में सकà¥à¤·à¤® हो, तो à¤à¤¸à¥‡ में बोतल से दूध पिलाना ही à¤à¤• मातà¥à¤°à¤¾ विकलà¥à¤ª बचता है। à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ परामरà¥à¤¶ पर बचà¥à¤šà¥‡ को बोतल से दूध पिलाना शà¥à¤°à¥‚ किया जा सकता है (2)।
वहीं, सीडीसी के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ न करा पाने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में पहले दिन से ही फॉरà¥à¤®à¥‚ला मिलà¥à¤• दिया जा सकता है, जो कि बोतल के जरिठही दिया जाता है (3)। अचà¥à¤›à¤¾ होगा, इस विषय में बाल चिकितà¥à¤¸à¤• से अचà¥à¤›à¥€ तरह सलाह-मशविरा किया जाà¤à¥¤
सà¥à¤•à¥à¤°à¥‰à¤² करके पढ़ें शिशॠको बोतल से दूध कितना देना चाहिà¤à¥¤
शिशॠको बोतल से कितना और कितनी बार दूध पिलाना चाहि�
यह पूरी तरह से शिशॠकी जरूरत पर निरà¥à¤à¤° करता है कि उसे कितना और कितनी बार बोतल से दूध पिलाना चाहिà¤à¥¤ अगर सीडीसी का मानें, सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ न करा पाने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में बोतल से लगà¤à¤— 29 से 59 à¤à¤®à¤à¤² फॉरà¥à¤®à¥‚ला मिलà¥à¤• बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® के पहले दिन हर दो से तीन घंटे के अंतराल में दिया जा सकता है। वहीं, बचà¥à¤šà¥‡ की जरूरत के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° इस मातà¥à¤°à¤¾ में बदलाव à¤à¥€ हो सकता है। वहीं, नवजात को à¤à¤• दिन में 8 से 12 बार फॉरà¥à¤®à¥‚ला मिलà¥à¤• दिया जा सकता है (3)। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि यह औसतन मातà¥à¤°à¤¾ है। आपके शिशॠको दिनà¤à¤° में कितना और कितनी बार दूध पिलाना है, इस बारे में डॉकà¥à¤Ÿà¤° ही बेहतर बता सकते हैं।
शिशॠको बोतल से दूध पिलाने का सही तरीका नीचे बताया गया है।
बोतल से शिशॠको दूध कैसे पिलाà¤à¤‚?
अगर शिशॠको बोतल से दूध पिला रहे हैं, तो उसका सही तरीका à¤à¥€ मालूम होना जरूरी है, वरना शिशॠको नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚च सकता है। नीचे जानिठइस विषय से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ जरूरी बातें :
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ की तरह ही बचà¥à¤šà¥‡ को बोतल से दूध पिलाने की पॉजिशन को समान रखा जा सकता है। साथ ही सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करें कि बचà¥à¤šà¥‡ को कोई असà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ न हो।
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे बचà¥à¤šà¥‡ का सिर उठा हà¥à¤† हो।
शिशॠको सीधा बिसà¥à¤¤à¤° पर लेटाकर दूध न पिलाà¤à¤‚।
बोतल को सीधा न रखें बलà¥à¤•ि तिरछा करके रखें, इससे बचà¥à¤šà¤¾ सही से दूध पी पाà¤à¤—ा।
कà¥à¤› नवजात तकिठपर सिर रखकर à¤à¥€ दूध पीना पसंद करते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में उनका धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ ठीक से रखें।
आगे जानिठशिशॠके दूध पीने से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ à¤à¤• जरूरी सवाल का जवाब।
कैसे पता करें कि आपका शिशॠआराम से दूध पी रहा है?
निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित बातों से पता कर सकते हैं कि शिशॠआराम से दूध पी रहा है या नहीं :
अगर दूध पीते समय बोतल की निपà¥à¤ªà¤² से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ आवाज आ रही है, तो हो सकता है कि निपà¥à¤ªà¤² में हवा à¤à¤°à¥€ हो, इससे बचà¥à¤šà¤¾ दूध के साथ हवा à¤à¥€ अंदर ले सकता है। इसलिà¤, बोतल को तिरछा करके ही दूध पिलाà¤à¤‚, जिससे निपà¥à¤ªà¤² हमेशा दूध से à¤à¤°à¥€ रहे।
बचà¥à¤šà¤¾ दूध पीने के दौरान बीच-बीच में रà¥à¤• à¤à¥€ सकता है। इससे पता चलता है कि बचà¥à¤šà¤¾ आराम से दूध पी रहा है।
अगर बचà¥à¤šà¥‡ के मà¥à¤‚ह से बार-बार निपà¥à¤ªà¤² हट जा रही है, तो हो सकता है कि बोतल को सही तरीके से पकड़ा नहीं गया है या दूध पिलाने की पॉजिशन ठीक नहीं है।
दूध पीने के दौरान अगर बचà¥à¤šà¤¾ खà¥à¤¦ से निपà¥à¤ªà¤² से मà¥à¤‚ह हटा ले रहा है, तो हो सकता है कि उसका पेट à¤à¤° गया है।
बोतल से दूध पिलाने से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ नीचे बताई गई हैं।
बोतल से दूध पिलाने से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के मà¥à¤•ाबले बोतल से दूध पिलाना थोड़ा मà¥à¤¶à¥à¤•िल à¤à¤°à¤¾ हो सकता है। नीचे जानिठबोतल से दूध पिलाने के दौरान आने वाली समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ :
दूध पिलाने की पॉजिशन पर खास धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना पड़ता है, नहीं तो इससे शिशॠठीक से दूध नहीं पी पाà¤à¤—ा और उसे कà¥à¤› नà¥à¤•सान à¤à¥€ हो सकते हैं।
यातà¥à¤°à¤¾ के दौरान बोतल से दूध पिलाने में मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो सकती है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इस दौरान बचà¥à¤šà¥‡ के मà¥à¤‚ह से दूध निकल सकता है और दूध बचà¥à¤šà¥‡ के चेहरे पर फैल सकता है या कान में जा सकता है।
बोतल को ठीक से साफ और सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¤²à¤¾à¤‡à¤œ करना जरूरी होता है।
बोतल से दूध पिलाना महंगा पड़ता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इसमें सही बोतल से लेकर फॉरà¥à¤®à¥‚ला मिलà¥à¤• के लिठअचà¥à¤›à¥€-खासी कीमत चà¥à¤•ानी पड़ती है।
फॉरà¥à¤®à¥‚ला मिलà¥à¤• और बोतल के सही बà¥à¤°à¤¾à¤‚ड के चà¥à¤¨à¤¾à¤µ में परेशानी आ सकती है।
हाइजिन का पूरा धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना पड़ता है।
अब आगे बोतल से दूध पिलाने के फायदे à¤à¥€ जान लीजिà¤à¥¤
बोतल से दूध पिलाने के फायदे
बोतल से दूध पिलाने के निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित फायदों को देखा जा सकता है :
बोतल से दूध पिलाने का सबसे बड़ा फायदा तो यही है कि सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ न कराने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में बचà¥à¤šà¥‡ को दूध पिलाना जारी रखा जा सकता है।
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के दौरान कई बार महिला को निपà¥à¤ªà¤² में होने वाले दरà¥à¤¦ से à¤à¥€ गà¥à¤œà¤°à¤¨à¤¾ पड़ता है (4)। वहीं, बोतल से दूध पिलाने के दौरान महिला इस चिंता से मà¥à¤•à¥à¤¤ रहती है।
बोतल से दूध बचà¥à¤šà¥‡ को परिवार का कोई à¤à¥€ सदसà¥à¤¯ पिला सकता है। इससे बचà¥à¤šà¤¾ परिवार के सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को पहचानने लगता है (2)।
बोतल से दूध घर में या बाहर किसी à¤à¥€ जगह आसानी से पिलाया जा सकता है।
अगर परिवार का कोई दूसरा सदसà¥à¤¯ बचà¥à¤šà¥‡ को दूध पिला रहा है, तो मां घर के अनà¥à¤¯ काम à¤à¥€ कर सकती है, लेकिन à¤à¤¸à¤¾ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के दौरान नहीं किया जा सकता है।
à¤à¥‚ख लगने के समय और दूध की मातà¥à¤°à¤¾ का अंदाजा लगाया जा सकता है, इससे बचà¥à¤šà¥‡ के लिठपहले से दूध को तैयार किया जा सकता है।
अब जानिठबोतल से दूध पिलाने के नà¥à¤•सान कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ हो सकते हैं।
बोतल से दूध पिलाने के नà¥à¤•सान
बोतल से दूध पिलाने के निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित नà¥à¤•सान देखे जा सकते हैं :
सबसे पहला नà¥à¤•सान तो यह है कि बचà¥à¤šà¤¾ मां के दूध से मिलने वाले पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ से वंचित रह जाता है। दरअसल, मां का दूध बचà¥à¤šà¥‡ को पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक रूप से बढ़ने में मदद करता है और à¤à¤‚टीबॉडी की तरह काम कर बचà¥à¤šà¥‡ को बीमार होने से बचाता है। वहीं, बोतल से दूध पिलाना बचà¥à¤šà¥‡ को पोषण देने का à¤à¤• अपà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक तरीका है (2)।
अगर गलती से बोतल को बचà¥à¤šà¥‡ के मà¥à¤‚ह से लगा छोड़ दिया गया, तो चोकिंग, कान के संकà¥à¤°à¤®à¤£ के साथ-साथ बचà¥à¤šà¥‡ के दांत टूटने का जोखिम बढ़ सकता है (5)।
बचà¥à¤šà¤¾ जरूरत से अधिक दूध का सेवन कर सकता है, जिससे शारीरिक समसà¥à¤¯à¤¾ पैदा हो सकती है (5)।
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के दौरान मां और शिशॠमें आपसी लगाव पैदा हो जाता है, लेकिन बोतल से दूध पिलाने के दौरान इस लगाव में थोड़ी कमी आ सकती है।
दूध की बोतल को ठीक से सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¤²à¤¾à¤‡à¤œ नहीं किया गया, तो बोतल में जमे बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ बचà¥à¤šà¥‡ के शरीर में दाखिल हो सकते हैं और शारीरिक समसà¥à¤¯à¤¾ का कारण बन सकते हैं।
जरूरत पड़ने पर बचà¥à¤šà¥‡ को तà¥à¤°à¤‚त सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराया जा सकता है, लेकिन à¤à¤¸à¤¾ बोतल के साथ नहीं है। बोतल से दूध पिलाने से पहले दूध को तैयार करना पड़ता है।
सà¥à¤•à¥à¤°à¥‰à¤² करके जानिठबोतल से दूध पिलाने के दौरान बरतने वाली सावधानियां।
बचà¥à¤šà¥‡ को बोतल से दूध पिलाते समय धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देने वाली बातें
बोतल से दूध पिलाते समय निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना जरूरी है (5) :
à¤à¤¸à¥‡ समय का चà¥à¤¨à¤¾à¤µ करें जिस दौरान बचà¥à¤šà¤¾ शांत हो, न जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ à¤à¥‚खा हो और न जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ उसका पेट à¤à¤°à¤¾ हो।
पहले कम मातà¥à¤°à¤¾ में ही दूध पिलाà¤à¤‚ और जरूरत के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° ही दूध की मातà¥à¤°à¤¾ को बढ़ाà¤à¤‚।
यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करें कि मां और बचà¥à¤šà¥‡ की पॉजिशन सही हो। साथ ही बोतल की à¤à¥€ पॉजिशन सही रखें यानी उसे तिरछा रखें, सीधा नहीं। बचà¥à¤šà¥‡ को किस पॉजिशन में दूध पिलाना है, इस बारे में लेख में ऊपर बताया गया है।
अगर दूध पीने के दौरान बचà¥à¤šà¤¾ कà¥à¤› सेकंड का आराम लेता है, तो उसे लेने दें।
इस दौरान पूरा धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि बचà¥à¤šà¥‡ का पेट à¤à¤° गया है या नहीं।
बचà¥à¤šà¥‡ को दूध की बोतल के साथ अकेला न छोड़ें।
बिसà¥à¤¤à¤° पर सीधा लेटाकर बचà¥à¤šà¥‡ को दूध न पिलाà¤à¤‚।
दूध पिलाने के दौरान किसी à¤à¥€ तरह की जबरदसà¥à¤¤à¥€ न करें। बचà¥à¤šà¤¾ जितना दूध पिà¤, उसे पीने दें।
आगे जानिठअगर बचà¥à¤šà¤¾ बोतल से दूध पीने में आनाकानी करे, तो कà¥à¤¯à¤¾ करना चाहिà¤à¥¤
अगर बचà¥à¤šà¤¾ बोतल से दूध न पिà¤, तो कà¥à¤¯à¤¾ करें?
बचà¥à¤šà¤¾ बोतल से दूध पीने में आनाकानी कर सकता है। à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में धैरà¥à¤¯ से काम लें और नीचे दी गई बातों का पालन करें :
बचà¥à¤šà¤¾ à¤à¤¸à¤¾ पेट à¤à¤°à¤¨à¥‡ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में कर सकता है। इसलिà¤, जबरदसà¥à¤¤à¥€ न करें और à¤à¥‚ख लगने के संकेत तक इंतजार करें।
बचà¥à¤šà¥‡ को किसी शांत कमरे में ही दूध पिलाà¤à¤‚, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि अनà¥à¤¯ सदसà¥à¤¯ की मौजूदगी या शोर बचà¥à¤šà¥‡ का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ à¤à¤Ÿà¤•ा सकते हैं और वो दूध पीने में अनाकानी कर सकता है।
अगर बचà¥à¤šà¤¾ बार-बार à¤à¤¸à¤¾ कर रहा है और सही से दूध नहीं पी रहा है, तो बाल चिकितà¥à¤¸à¤• से संपरà¥à¤• करें।
सà¥à¤•à¥à¤°à¥‰à¤² करके जानिठबचà¥à¤šà¥‡ की बोतल को सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¤²à¤¾à¤‡à¤œ करने का सही तरीका।
बचà¥à¤šà¥‡ की बोतल को सही ढंग से सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¤²à¤¾à¤‡à¤œ कैसे करें?
बचà¥à¤šà¥‡ की दूध की बोतल को सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¤²à¤¾à¤‡à¤œ करने का सही तरीका नीचे बताया गया है (6) :
सबसे पहले दूध की बोतल के सà¤à¥€ पारà¥à¤Ÿà¥à¤¸ (बोतल, कैप, रिंग, निपà¥à¤ªà¤² और वालà¥à¤µ) को अलग कर दें।
अब नल चलाà¤à¤‚ और पानी से सà¤à¥€ पारà¥à¤Ÿà¥à¤¸ को अचà¥à¤›à¥€ तरह धोà¤à¤‚।
इसके बाद साबà¥à¤¨ के पानी से बोतल के सà¤à¥€ पारà¥à¤Ÿà¥à¤¸ को अचà¥à¤›à¥€ तरह धोà¤à¤‚।
फिर और à¤à¤• बार साफ पानी से बोतल के सà¤à¥€ पारà¥à¤Ÿà¥à¤¸ को धोà¤à¤‚।
अब सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¤²à¤¾à¤‡à¤œ करने के लिठबोतल के सà¤à¥€ पारà¥à¤Ÿà¥à¤¸ को लगà¤à¤— 5 मिनट तक पानी में उबालें।
फिर इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ निकालकर किसी साफ और सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ जगह पर रख दें।
आगे जानिठबचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठफीडिंग बोतल का चà¥à¤¨à¤¾à¤µ किस पà¥à¤°à¤•ार करें।
शिशॠके लिठफीडिंग बोतल का चà¥à¤¨à¤¾à¤µ कैसे करें?
शिशà¥à¤“ं के लिठफीडिंग बोतल खरीदते समय निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना जरूरी है :
बोतल किसी अचà¥à¤›à¥‡ बà¥à¤°à¤¾à¤‚ड की हो।
इस बात का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ जरूर रखें कि लीक पà¥à¤°à¥‚फ हो।
निपà¥à¤ªà¤² को फूड गà¥à¤°à¥‡à¤¡ सिलिकॉन से बनाया गया हो।
फीडिंग बोतल को बनाने में à¤à¤µà¥€à¤à¤¸ तकनीक यानी à¤à¤¯à¤° वेंटिलेशन सिसà¥à¤Ÿà¤® का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया गया हो।
बोतल का मटीरियल बीपीठरहित हो।
किसी à¤à¤°à¥‹à¤¸à¥‡à¤®à¤‚द डीलर या दà¥à¤•ान से ही बोतल खरीदें।
बोतल को बनाने में फà¥à¤¥à¤¾à¤²à¥‡à¤Ÿ जैसे हानिकारक रसायन का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² न किया गया हो।
ऑनलाइन खरीदते समय गà¥à¤°à¤¾à¤¹à¤•ों के रिवà¥à¤¯à¥‚ जरूर पढ़ें।
सà¥à¤•à¥à¤°à¥‰à¤² करके जानिठबोतल के दूध को गरà¥à¤® करने का तरीका।
बोतल का दूध गरà¥à¤® करने का सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ तरीका कà¥à¤¯à¤¾ है?
यहां हम दूध को गरà¥à¤® करने के तीन तरीके बता रहे हैं (7):
सीडीसी की मानें, तो बेबी मिलà¥à¤• और फॉरà¥à¤®à¥‚ला मिलà¥à¤• को पिलाने से पहले गरà¥à¤® करने की जरूरत नहीं होती। वहीं, कà¥à¤› माता-पिता दूध की बोतल को गरà¥à¤® करना पसंद करते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में फॉरà¥à¤®à¥‚ला मिलà¥à¤• को बोतल में à¤à¤°à¤•र फिर बोतल को कà¥à¤› देर गरà¥à¤® पानी में रखा जा सकता है।
इसके अलावा, पानी को गरà¥à¤® करके उसमें फॉरà¥à¤®à¥‚ला मिलà¥à¤• मिलाया जा सकता है। बस बेबी को दूध देने से पहले यह जरूर चेक कर लें कि दूध पिलाने योगà¥à¤¯ गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¾ है या नहीं। इसके लिठआप अपनी हथेली में दूध की दो-तीन बूंद लेकर चेक कर सकते हैं कि वह शिशॠके पीने लायक है या नहीं।
à¤à¥‚ल से à¤à¥€ दूध की बोतल को माइकà¥à¤°à¥‹à¤µà¥‡à¤µ में गरà¥à¤® न करें, इससे बोतल के साथ दूध अधिक गरà¥à¤® हो सकता है।
उमà¥à¤®à¥€à¤¦ करते हैं कि बचà¥à¤šà¥‡ को बोतल से दूध पिलाने से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ जरूरी बातें आप अचà¥à¤›à¥€ तरह समठगठहोंगे। खासकर, वो महिलाà¤à¤‚ इस लेख में दी गईं बातों को गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ से लें, जो किसी कारण से सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने में समरà¥à¤¥ नहीं हैं और बचà¥à¤šà¥‡ को बोतल से दूध पिलाने की तैयारी में हैं। इसके अलावा, शिशॠको बोतल से दूध पिलाने से पहले डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह जरूर लें। साथ ही बोतल से दूध पिलाने से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ सावधानियों का à¤à¥€ पालन करें। आशा करते हैं कि यह लेख आपके लिठमददगार साबित होगा।
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