ब्लड प्रेशर कैसे चेक किया जाता है?HealthPlanet

Posted on Thu 1st Dec 2022 : 16:20

बीपी कैसे चेक करते हैं

बीपी (Blood pressure) यदि सामान्य रहे तो यह हमारे स्वास्थ्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए जिम्मेदार होता है। यदि यह सामान्य से कम यानि लो बीपी है या सामान्य से अधिक यानि हाई बीपी है तो स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। मेरा कहना है कि बीपी का अगर सही से ध्यान रखा जाए, डॉक्टरों के निर्देशानुसार बीपी समय-समय पर चेक कराया जाए तो इसे नियंत्रित कर स्वस्थ जीवन पाया जा सकता है। बहुत से लोगों के मन में इस बात को लेकर बहुत सी शंकाएं होती हैं कि बीपी कैसे चेक करते हैं, चेक करते समय क्या-क्या सावधानियां बरती जाएं, बीपी चेक करते समय क्या करें क्या न करें आदि। इन्हीं सवालों के जवाब आपको इस लेख में मिल जाएंगे-
बीपी किससे मापा जाता है ?

बीपी चेक करने के दो मुख्य तरीके हैं –स्वचलित (Automated) या (डिजिटल) और मैन्युअल (manual) तरीके से। दोनों ही तरीकों में अलग- अलग तरह की मशीनों का इस्तेमाल होता है। स्वचलित (Automated) मशीन को automated blood pressure monitor कहा जाता है जिसके साथ बाजू पर बाँधने के लिए एक कफ (cuff) आता है।

इसके अलावा मैन्युअल तरीके से बीपी चेक करने के लिए रक्तदाबमापी (sphygmomanometer) और स्टेथोस्कोप का इस्तेमाल होता है।
ऑटोमैटिक बीपी चेक करने के फायदे

प्रयोग करने में आसान
स्क्रीनिंग के लिए अच्छा विकल्प
घरेलू इस्तेमाल के लिए आसान
बार-बार बीपी चेक किया जा सकता है
कुछ मशीनें ली गई जानकारी (बीपी स्तर) को भविष्य के लिए सुरक्षित रख सकती हैं।
कुछ मशीनें बीपी के स्तर के साथ कुछ अन्य जानकारियां भी देती हैं जैसे हार्ट रेट और दिल की धड़कन की जानकारी।

ऑटोमैटिक बीपी चेक करने के नुकसान

पहले धमनी दबाव चेक करता है फिर सिस्टोलिक और डायस्टोलिक बीपी मापता है।
इस्तेमाल करने में कंपन (Vibration) महसूस होती है।
नतीजों में गलती (त्रुटि) होने की ज्यादा संभावना होती है।
ज्यादा रखरखाव (maintenance) की जरूरत होती है।

रक्तदाबमापी (sphygmomanometer) से बीपी चेक करने के फायदे

सबसे सटीक नतीजा देता है
हाइपरटेंशन (hypertension) की पुष्टि के लिए अच्छा विकल्प

रक्तदाबमापी (sphygmomanometer) से बीपी चेक करने के नुकसान

कभी-कभी नतीजों में त्रुटि (गलती) दिखा देता है
पारा एक जहरीला पदार्थ होता है, और इसके इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षण ( training) की जरूरीत होती है।

रक्तदाबमापी (sphygmomanometer) से बीपी कैसे चेक करें-

मैन्युअल तरीके यानि sphygmomanometer से बीपी नापने के लिए-

व्यक्ति को आराम से एक कुर्सी पर बैठाया या मेज पर लेटाया जाता है।
व्यक्ति के हाथ को सीधा और आरामदायक स्थिति में करके बांह (bicep) पर सुरक्षित तरीके कफ को बांधा जाता है। दबाव बढ़ाने के लिए गुब्बारे को दबाया जाता है।
कलाई के बाहरी किनारे पर नाड़ी (pulse) तक गुब्बारे को फुलाएं।
यह एक तरह से यह सिस्टोलिक बीपी होता है।
गुब्बारे को 20 mm Hg से अधिक फुलाएं।
नव्ज़ के ऊपर कोहनी क्रीज के अंदरूनी भाग पर स्टेथोस्कोप रखें।
हर सेकंड में 2 mm Hg पर गुब्बारे की हवा निकालें।
कुछ समय बाद, कुछ आवाज़ें (“kortkoff ध्वनियाँ”) सुनाई देंगी।
जिस बिंदु (point) पर वे आवाजें सुनाई देती हैं वह डायस्टोलिक बीपी (diastolic BP) होता है।
अंत में आए हुए बीपी के नतीजों को एक डायरी में नोट करें।

डिजिटल मशीन से बीपी कैसे चेक करें-

बीपी चेक करने का सबसे आसान तरीका होता है डिजिटल मशीन से चेक करना, इस मशीन में आपको एक कफ मिलता है जो आपको अपनी बांह पर बांधना होता है और असके बाद इस मशीन में दी गई स्क्रीन पर नतीजा देखना होता है।
बीपी रीडिंग का रिकॉर्ड कैसे रखें–

अपनी स्वास्थ्य स्थिति की लगातार निगरानी करने के लिए जरूरी है कि आप समय-समय पर चेक किए गए अपने बीपी के नतीजों को संभाल कर रखें। ऐसा हो सकता है कि किसी खास स्थिति में यह बात आपका डॉक्टर आपसे कहे। बीपी के नतीजों को आप तारीख और समय के हिसाब से या तो डायरी में लिख सकते हैं या फिर अपने व्यक्तिगत मोबाइल या कंप्यूटर में भी अपलोड करके रख सकते हैं। आजकल बीपी रीडिंग ऐप्स का भी चलन है, बीपी के नतीजों को संभालकर रखने वाले ऐप्स उन लोगों के लिए बहुत मददगार हो सकते हैं, जिन्हें नियमित रूप से बीपी चेक करने का निर्देश या सलाह दी जाती है।
बीपी चेक करते समय क्या करें, क्या न करें-

बीपी चेक करना सुनने में जितना आसान लगता है वाकई में उससे थोड़ा सा जटिल है, दरअसल चेक करवाते समय थोड़ा सा हिलना या बेआराम होना आपके बीपी के नतीजों पर असर डाल सकता है। इसी के चलते कुछ सावधानियां है जिनका हमें बीपी चेक करवाते समय या खुद चेक करते समय ध्यान रखना चाहिए। क्या हैं वे सावधानियां जानें-
क्या करें-

बीपी चेक होने की प्रक्रिया शुरु होने के लगभग 5 मिनट पहले से आराम से शांत बैठें, ऐसी कुर्सि पर बैंठे जो बिल्कुल हिलती न हो। टांगों को सीधी रखकर पीठ को कुर्सि से लगाकर बैठें।

बीपी चेक होने से पहले पेशाब जाकर मूत्राशय खाली कर लें।

बीपी चेक करवाने के लिए हाथ के कपड़े ऊपर सिकोड़ लें, नंगे हाथ पर कफ लगवाएं।

बीपी को मापने के लिए सही आकार के कफ (cuff) का ही उपयोग करें।

क्या न करें-

बीपी परीक्षण के 30 मिनट पहले से ही कैफीन युक्त पेय पदार्थ और धूम्रपान बंद कर दें।

बीपी की रीडिंग लेते समय अपनी बांह को आरामदायक स्थान पर रखें, जैसे टेबल या आपकी गोद।

बीपी किसे और कितनी बार चेक करवाना चाहिए-

40 साल से ज्यादा के किसी भी व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार बीपी जरूर चेक कराना चाहिए।

18 साल से 40 साल तक की उम्र में जब तक डॉक्टर न कहे, आप बीपी चेक कराने में कमी कर सकते हैं ।

हालांकि 18 से 40 साल तक की उम्र के दौरान आप हर तीन से पांच साल में स्क्रीनिंग के लिए जा सकते हैं।

40 साल की उम्र से पहले कुछ लोग जिन्हें ज्यादा खतरा होता उनमें शामिल हैं :-

मोटापा
व्यायाम न करने वाले लोग
ज्यादा शराब का सेवन करने वाले लोग
स्वस्थ आहार (डाइट) का पालन न करने वाले लोग
किडनी, हृदय रोग, और मधुमेह से पीड़ित लोग
अधिक धूम्रपान करने वाले लोग
हाई बीपी का पारिवारिक इतिहास
कम सोने वाले लोग
कैफीन युक्त पेय पदार्थों का आधिक सेवन करने वाले लोग

solved 5
wordpress 3 years ago 5 Answer
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