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यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ कà¥à¤¯à¤¾ है और यह बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में होना कितना आम है?
यूटीआई (Urinary tract infections) मूतà¥à¤° मारà¥à¤— संकà¥à¤°à¤®à¤£ होता है। यह बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ (रोगाणà¥) के कारण होता है, जो मूतà¥à¤° मारà¥à¤— के à¤à¤• हिसà¥à¤¸à¥‡ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। इन बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के कारण किडनी (kidney) व मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯ (bladder) में इंफेकà¥à¤¶à¤¨ हो सकता है। वहीं, बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की बात करें, तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ यूटीआई की समसà¥à¤¯à¤¾ होना सामानà¥à¤¯ है (2) (3)।
अब जानते है कि यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने के पीछे मà¥à¤–à¥à¤¯ कारण कà¥à¤¯à¤¾ हैं।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने के कारण
यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से मà¥à¤–à¥à¤¯ इस पà¥à¤°à¤•ार हैं (3):
यह बीमारी बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के कारण होती है। ये बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ गà¥à¤ªà¥à¤¤à¤¾à¤‚गों के आसपास हो सकते हैं और फिर मूतà¥à¤°à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— तक फैल जाते हैं।
वेसिकोराइटरल रिफà¥à¤²à¤•à¥à¤¸ (vesicoureteral reflux) मूतà¥à¤°à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— की समसà¥à¤¯à¤¾ होती है। इसके कारण à¤à¥€ यूटीआई हो सकता है। यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ शिशॠके जनà¥à¤® के समय उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो सकती है। इसमें यूरिन गलत दिशा यानी मूतà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹à¤¿à¤¨à¥€ और गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ में वापस फà¥à¤²à¥‹ होने लगता है
मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• या तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° की बीमारियां (जैसे कि मायेलोमेनिंगोसेले-myelomeningocele), रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ की चोट व हाइडà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥‡à¤«à¤²à¤¸ (hydrocephalus) के कारण। ये बीमारियां मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯ को खाली करने में मà¥à¤¶à¥à¤•िल पैदा कर सकती है।
लड़कियों में बबल बाथ या टाइट-फिटिंग कपड़े पहनने के कारण à¤à¤¸à¤¾ हो सकता है।
मूतà¥à¤° पथ के आकार में परिवरà¥à¤¤à¤¨ या कोई जनà¥à¤® दोष।
अकà¥à¤¸à¤° दिन के वकà¥à¤¤ पेशाब कम करना।
बाथरूम जाने के बाद बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के पीछे (गà¥à¤¦à¥‡ -anus) से आगे तक साफ करने के कारण à¤à¤¸à¤¾ हो सकता है।
नोट : लड़कों के मà¥à¤•ाबले लड़कियों को यूटीआई की समसà¥à¤¯à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है। à¤à¤¸à¤¾ 3 साल की उमà¥à¤° के आसपास हो सकता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इसी उमà¥à¤° से बचà¥à¤šà¥‡ शौचालय जाने का अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ शà¥à¤°à¥‚ करते हैं।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के लकà¥à¤·à¤£
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने के लकà¥à¤·à¤£ कà¥à¤› इस पà¥à¤°à¤•ार हैं (3)।
बà¥à¤–ार होना।
मतली और उलà¥à¤Ÿà¥€ आना।
à¤à¥‚ख नहीं लगना।
पेशाब में खून आना।
बार-बार पेशाब आना।
पेशाब करते समय दरà¥à¤¦ या जलन महसूस होना।
निचले शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿ या पीठके निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ में दबाव या दरà¥à¤¦ का अनà¥à¤à¤µ होना।
टॉयलेट टà¥à¤°à¥‡à¤¨à¤¿à¤‚ग के बाद à¤à¥€ बिसà¥à¤¤à¤° गीला करना।
वजन न बà¥à¤¨à¤¾
इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ तक फैलने पर कà¥à¤› इस तरह के लकà¥à¤·à¤£ नजर आ सकते हैं:
ठंड लगना और शरीर में कंपकंपी होना।
बà¥à¤–ार आना।
तà¥à¤µà¤šà¤¾ का गरà¥à¤® या लाल होना।
मतली और उलà¥à¤Ÿà¥€ होना।
पीठमें दरà¥à¤¦ होना।
पेट में गंà¤à¥€à¤° दरà¥à¤¦ होना।
आगे हम बता रहे हैं कि यूटीआई के कारण बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हो सकती हैं।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से होने वाली जटिलताà¤à¤‚
यूटीआई के चलते बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को निमà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार की समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं का सामना करना पड़ सकता है (4):
खून में संकà¥à¤°à¤®à¤£ (सेपà¥à¤¸à¤¿à¤¸ – Sepsis) – हालांकि, इसका खतरा बड़ों में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है, लेकिन बेहतर है कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को लेकर à¤à¥€ सावधानी बरती जाà¤, ताकि वो इसका शिकार न बनें।
किडनी की समसà¥à¤¯à¤¾ या कà¥à¤·à¤¤à¤¿à¥¤
किडनी का संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥¤
लेख के इस à¤à¤¾à¤— में जानिठकि यूटीआई का पता लगाने के लिठकिस-किस पà¥à¤°à¤•ार की जांच की जाती हैं।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ का निदान
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में यूटीआई का पता लगाने के लिठनिमà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के टेसà¥à¤Ÿ किठजा सकते हैं (2)
डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह – डॉकà¥à¤Ÿà¤° सबसे पहले बचà¥à¤šà¥‡ या बचà¥à¤šà¥‡ के माता-पिता से बचà¥à¤šà¥‡ के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥ से संबंधित कà¥à¤› सवाल पूछ सकते हैं। उसके बाद यूरिन टेसà¥à¤Ÿ की सलाह दे सकते हैं। मूतà¥à¤° के नमूने की जांच पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤—शाला में माइकà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोप से की जाती है।
यूरोडायनामिक (Urodynamics) – यह à¤à¤• परीकà¥à¤·à¤£ है, जिसका उपयोग यह आंकलन करने के लिठकिया जाता है कि बचà¥à¤šà¥‡ के मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯ (bladder) और मूतà¥à¤°à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं (5)।
सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸à¥à¤•ोपी (Cystoscopy) – इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में डॉकà¥à¤Ÿà¤° कैमरे की मदद से मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯ और मूतà¥à¤°à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— को देखकर इंफेकà¥à¤¶à¤¨ का पता लगा सकते हैं (6)।
जांच के लिठयूरिन का नमूना कैसे लिया जाता है, यह बचà¥à¤šà¥‡ की उमà¥à¤° पर निरà¥à¤à¤° करता है। जो बचà¥à¤šà¥‡ बहà¥à¤¤ छोटे होते हैं और सà¥à¤µà¤¯à¤‚ से टॉयलेट नहीं जाते हैं, à¤à¤¸à¥‡ बचà¥à¤šà¥‡ का सैंपल लेना कठिन हो सकता है। बहà¥à¤¤ छोटे बचà¥à¤šà¥‡ में मूतà¥à¤° का नमूना लेने के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ तरीके होते हैं, जो इस पà¥à¤°à¤•ार हैं (3):
यूरिन कलेकà¥à¤¶à¤¨ बैग – मूतà¥à¤° के नमूने के लिठà¤à¤• विशेष पà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• की थैली बचà¥à¤šà¥‡ के लिंग या योनि के संपरà¥à¤• में रखी जाती है। हालांकि, यह तरीका पूरी तरह उपयोगी नहीं है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इससे मूतà¥à¤° का नमूना दूषित हो सकता है।
कैथेटराइजà¥à¤¡ सà¥à¤ªà¥‡à¤¸à¤¿à¤®à¥‡à¤¨ यूरिन कलà¥à¤šà¤° (Catheterized specimen urine culture) – इसमें à¤à¤• पà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• टà¥à¤¯à¥‚ब (कैथेटर) लड़कों के लिंग से जोड़ी जाती है और लड़कियों के मूतà¥à¤°à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— में डाली जाती है। इससे सीधा मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯ से मूतà¥à¤° को à¤à¤•तà¥à¤° किया जा सकता है।
सà¥à¤ªà¤°à¤ªà¥à¤¯à¥‚बिक यूरिन कलेकà¥à¤¶à¤¨ (Suprapubic urine collection) – इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में à¤à¤• सà¥à¤ˆ को निचले पेट की तà¥à¤µà¤šà¤¾ और मांसपेशियों के माधà¥à¤¯à¤® से मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯ तक पहà¥à¤‚चाया जाता है। इसका उपयोग à¤à¥€ मूतà¥à¤° के सैंपल लेने के लिठकिया जाता है।
अगर बचà¥à¤šà¥‡ को पहली बार यूटीआई हà¥à¤† है, तो संकà¥à¤°à¤®à¤£ का कारण जानने के लिठया गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ की कà¥à¤·à¤¤à¤¿ की जांच के लिठइमेजिंग परीकà¥à¤·à¤£ किया जा सकता है। ये परीकà¥à¤·à¤£ निमà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के होते हैं :
चलिà¤, अब जानते हैं कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ का इलाज किस तरह किया जा सकता है।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ का इलाज
यूटीआई से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का कà¥à¤› इस पà¥à¤°à¤•ार इलाज किया जा सकता है (3)।
यूटीआई के दौरान बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की किडनी को सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रखने के लिठà¤à¤‚टीबायोटिक दवाà¤à¤‚ दी जा सकती हैं।
अगर शिशॠकाफी छोटे हैं और दवा खाने में असमरà¥à¤¥ हैं, तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ कर नसों में इंजेकà¥à¤¶à¤¨ के जरिठà¤à¤‚टीबायोटिक दिठजा सकते हैं।
जब यूटीआई का इलाज चल रहा हो, तो बचà¥à¤šà¥‡ को जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पेय पदारà¥à¤¥ का सेवन कराà¤à¤‚।
कà¥à¤› बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठयूटीआई के इलाज में काफी समय लग सकता है। खासतौर पर जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बार-बार यह बीमारी हो रही हो, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ इस समसà¥à¤¯à¤¾ के इलाज के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° 6 महीने से 2 साल तक à¤à¤‚टीबायोटिक दवा दे सकते हैं।
à¤à¤‚टीबायोटिक कोरà¥à¤¸ पूरा होने के बाद डॉकà¥à¤Ÿà¤° फिर से यूरिन टेसà¥à¤Ÿ कर सकते हैं, ताकि यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ किया जा सके कि समसà¥à¤¯à¤¾ पूरी तरह से खतà¥à¤® हà¥à¤ˆ है या नहीं।
नोट: उचित à¤à¤‚टीबायोटिक दवाई के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करें। बिना डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह के बचà¥à¤šà¥‡ को कोई à¤à¥€ दवाई न दें।
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