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जब बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ की बात हो तो पेरेंटà¥à¤¸ को हर चीज बेसà¥â€à¤Ÿ चाहिठहोती है। 6 महीने के शिशॠको मां के दूध से ही सारा पोषण मिलता है और बड़ा होने पर विकास के लिठउसे अनà¥â€à¤¯ चीजें खिलाने की जरूरत होती है।
पीडियाटà¥à¤°à¤¿à¤¶à¤¿à¤¯à¤¨ à¤à¥€ 6 महीने के होने के बाद शिशॠको मां के दूध के अलावा अनà¥â€à¤¯ पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• चीजें खिलाने की सलाह देते हैं। बात पोषण की हो और घी का नाम न आà¤, à¤à¤¸à¤¾ तो हो ही नहीं सकता है। यहां हम आपको बताà¤à¤‚गें कि ठोस आहार शà¥à¤°à¥‚ करने पर बचà¥â€à¤šà¥‡ को घी खिलाना चाहिठया नहीं और कब शिशॠको खिला सकते हैं।
​शिशॠको घी खिला सकते हैं या नहीं
यदि घी का सेवन सही मातà¥à¤°à¤¾ में किया जाठतो इससे सà¥â€à¤µà¤¾à¤¸à¥â€à¤¥à¥â€à¤¯ को कई तरह के लाठमिलते हैं। घी में सैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ होते हैं जो आसानी से पच जाते हैं।
घी विटामिनों और खनिज पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का बेहतरीन सà¥à¤°à¥‹à¤¤ है। इससे शिशॠके विकास में बहà¥à¤¤ मदद मिल सकती है। बचà¥â€à¤šà¥‡ को à¤à¤• साल का होने तक नमक नहीं खिलाना चाहिठइसलिठउसके ठोस आहार में सà¥â€à¤µà¤¾à¤¦ और पोषण बढ़ाने के लिठघी डाला जा सकता है।
​शिशॠको कब खिलाà¤à¤‚ घी
6 महीने से अधिक उमà¥à¤° के बचà¥â€à¤šà¥‡ के आहार में घी को शामिल कर सकते हैं। दाल और चावल की खिचड़ी में घी की कà¥à¤› बूंदें डालकर इसकी शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ की जा सकती है। आप शिशॠके बढ़ने के साथ-साथ घी की मातà¥à¤°à¤¾ धीरे-धीरे बढ़ा सकते हैं। हालांकि, à¤à¤• दिन में बचà¥â€à¤šà¥‡ को à¤à¤• चमà¥â€à¤®à¤š से जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ घी नहीं खिलाना चाहिà¤à¥¤
​शिशॠको कितनी मातà¥à¤°à¤¾ में घी खिलाना चाहिà¤
शिशॠके विकास के लिठघी बहà¥à¤¤ लाà¤à¤•ारी होता है। हालांकि, आपको पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ सीमित मातà¥à¤°à¤¾ में ही घी का सेवन करना है। जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ घी खाने से पाचन संबंधी परेशानियां, à¤à¥‚ख में कमी और मोटापे की शिकायत हो सकती है।
6 महीने के शिशॠको दिन में बार में सिरà¥à¤« आधा चमà¥â€à¤®à¤š घी खिलाना चाहिà¤à¥¤ 8 महीने के शिशॠको दो बार कर के à¤â€à¤• तिहाई से à¤à¤• चमà¥â€à¤®à¤š घी, 10 महीने के शिशॠको दिन में तीन बार कर के à¤à¤• चमà¥â€à¤®à¤š घी
à¤à¤• साल के बचà¥â€à¤šà¥‡ को दिन में 3 बार कर के à¤à¤• से डेढ़ चमà¥â€à¤®à¤š घी और दो साल के बचà¥â€à¤šà¥‡ को दिन में तीन बार कर के डेढ़ से दो चमà¥â€à¤®à¤š घी खिलाना चाहिà¤à¥¤
​शिशॠको घी खिलाने के फायदे
à¤à¤• चमà¥â€à¤®à¤š घी से 112 किलो कैलोरी à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ मिलती है इसलिठघी शिशॠके लिठà¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ का अचà¥â€à¤›à¤¾ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ हो सकता है। रोज सीमित मातà¥à¤°à¤¾ में घी खाने से संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ रूप से वजन बढ़ता है। घी में कोंजà¥à¤—ेटिड लिनोलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ होता है जो शिशॠको संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ वजन पाने में मदद करता है।
घी में मौजूद कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ की हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को सà¥â€à¤µà¤¸à¥â€à¤¥ रखने में मदद करता है। इसमें कई विटामिन और डीà¤à¤šà¤ होते हैं जो आंखों, तà¥â€à¤µà¤šà¤¾ और इमà¥â€à¤¯à¥‚निटी के लिठफायदेमंद माने जाते हैं। बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ में à¤à¤•à¥à¤œà¤¿à¤®à¤¾ और खà¥à¤œà¤²à¥€ का इलाज घी से किया जा सकता है। पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हिसà¥â€à¤¸à¥‡ पर बस हलà¥â€à¤•ा सा घी मल दें। घी के सेवन से बचà¥â€à¤šà¥‡ का पाचन à¤à¥€ ठीक रहता है।
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