बच्चे को नमक देना कब शुरू करें?HealthPlanet

Posted on Fri 11th Nov 2022 : 09:30

नहीं। बेहतर है कि शिशु के भोजन में नमक न डाला जाए।

शिशु के ठोस आहार शुरु करते ही परिवारजन और दोस्त आपको उसके भोजन में नमक डालने की सलाह दे सकते हैं। मगर 12 महीने का होने तक शिशुओं को प्रतिदिन केवल एक ग्राम से भी कम नमक की जरुरत होती है।

बच्चों को भी बहुत कम नमक की जरुरत होती है। शिशु के पहले जन्मदिन के बाद उसके तीन साल का होने तक प्रतिदिन ज्यादा से ज्यादा दो ग्राम नमक की सलाह दी जाती है।

बताई गई मात्रा से अधिक नमक खाने से आपके शिशु के गुर्दे खराब हो सकते हैं। अध्ययन भी दर्शाते हैं कि जब शिशुओं के आहार में नमक डाला जाता है, तो उन्हें वयस्कता में हाइपरटेंशन होने की संभावना बढ़ जाती है।

छह महीने का होने से पहले तक आपके शिशु को जरुरी नमक स्तनदूध या फॉर्मूला दूध से मिल जाएगा। जब वह ठोस आहार खाना शुरु करता है, आपको घर पर बने या पैकेज्ड बेबी फूड में नमक डालने की जरुरत नहीं होती।

चाहे आपको लगे कि भोजन स्वादहीन लग रहा है, मगर याद रखें कि अधिकांश भोजनों में प्राकृतिक रूप से कुछ नमक होता है और उसमें थोड़ा और नमक मिलाने से यह शिशु के लिए अस्वास्थ्यकर होगा।

साथ ही, ऐसा प्रतीत होता है कि बाल्यावस्था में जो स्वाद विकसित होता है वही वयस्कता में भी जारी रहता है। इसलिए अगर आपके शिशु को अभी से ही नमक डालकर खाना खाने की आदत होगी, तो वह शायद आगे भी इसी तरह का भोजन खाना चाहेगा।

निम्नलिखित सुझााव शिशु के नमक के सेवन को सीमित करने में मदद कर सकते हैं।

अपने शिशु को ऐसे प्रसंस्कृत भोजन न दें, जिनमें बहुत ज्यादा नमक होता है, जैसे कि:

पैकेट बंद रेडीमेड भोजन
आलू की चिप्स
नमकीन
फ्रेंच फ्राई
बिस्किट
क्रेकर्स
इंसटेंट सूप और नूडल्स
सॉस और चटनी
पिज्जा
प्रसंस्कृत मांस (प्रोसेस्ड मीट)
टिन में आने वाले भोजन जिनमे अलग से नमक डला होता है
चाइनीज भोजन जिनमें सोया सॉस, एमएसजी या मोनोसोडियम ग्लूटामेट हो
बड़ो के ब्रेकफास्ट सीरीयल्स


अपने शिशु को स्वस्थ, कम नमक वाले भोजन दें, जैसे कि:

ताजा फल
सब्जियां और सलाद
मुर्गी और मछली
सादा मीट
अच्छी तरह पके हुए अंडे
दाल-दलहन
शिशु आमतौर पर जो दूध पीता है
दूध से बने उत्पाद जैसे कि दही और पनीर
पिसे हुए बिना नमक वाले मेवे


खाना पकाते समय नमक न डालें
चावल, गेहूं का आटा और सूखे पास्ता में नमक कम होता है। इन्हें पकाते समय नमक डालने की जरुरत नहीं है। यदि आपको लगे कि शिशु का भोजन बेस्वाद है तो उसमें कुछ मसाले या हर्ब डाल सकती हैं। स्वाद बढ़ाने के लिए भोजन में लहसुन, अदरक, पिसे हुए मसाले जैसे हल्दी, जीरा और धनिया थोड़ी मात्रा में मिलाया जा सकता है।

हालांकि, अधिकांश डॉक्टर आठ महीने के बाद ही शिशु के भोजन में मसाले मिलाना शुरु करने के लिए कहते हैं। बेहतर है कि शिशु के भोजन में मसाले डालना शुरु करने से पहले अपने डॉक्टर से पूछ लें। करीब एक साल का होने पर आपका बच्चा वे अधिकांश भोजन खा सकता है जो परिवार के अन्य सदस्य खाते हैं। हालांकि, फिर भी बेहतर है कि भोजन में मिर्च या अन्य तेज मसाले डालने से पहले शिशु के लिए कुछ भोजन अलग निकाल लिया जाए।

18 महीनों के बाद, यदि आपके बच्चे ने ताजा हर्ब और हल्के मसालों को अच्छे से खाना शुरु कर दिया है, तो आप उसके भोजन में थोड़ी सी मात्रा में गर्म व तेज मसाले मिला सकती हैं। इनमें शामिल हैं हरी मिर्च, काली मिर्च, लाल मिर्च और गर्म मसाला।

फिर भी, बेहतर यही है कि शिशु के भोजन में कोई भी नया मसाला डालने से पहले आप डॉक्टर से पूछ लें।

विशेषतौर पर शिशुओं के लिए बने भोजन ही दें
बाजार में मिलने वाले बेबी फूड जैसे कि बेबी सीरियल्स और फूड जार में नमक की मात्रा कम होती है। इन्हें तैयार करने की प्रक्रिया में नमक नहीं डाला जाता।

मगर जरुरी है कि आप यह समझें कि नन्हें बच्चों (टॉडलर्स) और बड़े बच्चों के लिए आने वाले भोजन, बेबी फूड से अलग होते हैं। बच्चों के लिए आने वाले भोजन अत्याधिक प्रसंस्कृत हो सकते हैं और उनमें नमक की उच्च मात्रा होती है। इसलिए वे शिशुओं के लिए उचित नहीं होते।

ध्यान रखें कि शिशु को पहले से तैयार ऐसे कोई भी भोजन न दें जो विशेषतौर पर शिशुओं के लिए न हों। बड़ों के नाश्ते के सीरियल्स और पास्ता सॉस आदि में बहुत ज्यादा नमक होता है। टिन में बंद आने वाले कुछ सब्जियों में भी नमक की उच्च मात्रा होती है।

भोजन पर दिए लेबल को पढ़ें
यदि आप पैकेट में आने वाले खाद्य पदार्थों के लेबल पढ़ने की आदत बनाएं, तो आप जल्द ही समझ जाएंगी कि कौन से भोजन आपके शिशु के लिए सबसे अच्छे हैं। नमक को आमतौर पर सोडियम के तौर पर दिया गया होता है। प्रति 100 ग्राम कितना नमक डाला गया है यह पता करें।

2.5 ग्राम नमक एक ग्राम सोडियम के बराबर होता है
प्रति 100 ग्राम यदि 1.5 ग्राम से अधिक नमक है (या 0.6 ग्राम सोडियम) तो यह नमक की उच्च मात्रा है
प्रति 100 ग्राम 0.3 ग्राम या इससे कम नमक (या 0.1 ग्राम सोडियम) का मतलब नमक की कम मात्रा है


ऐसे भोजन चुनें जिनमें सोडियम की मात्रा प्रति 100 ग्राम 0.1 ग्राम से ज्यादा न हो।

साथ ही, यह भी देखें कि भोजन में अतिरिक्त शक्कर या कृत्रिम मीठा (आर्टिफिशियल स्वीटनर) तो नहीं है। शिशु को खिलाए जाने वाले भोजनों में ये नहीं होने चाहिए।

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