बांझपन के लिए कौन सी आयुर्वेदिक दवा सबसे अच्छी है?HealthPlanet

Posted on Wed 8th Feb 2023 : 09:05

कचनार गुग्गुल- आयुर्वेद में कचनार गुग्गुल कई औषधियों से मिलकर बनता है। इस औषणि का उपयोग हार्मोनल संतुलन के लिए होता है। पीसीओएस की समस्या हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी हुई है। यह एक ऐसी जड़ी-बूटी है, जो हार्मोनल संतुलन बनाने और साइकल को नियमित रखने में मदद करती है।

1. अश्वगंधा- अश्वगंधा हार्मोनल-संतुलन बनाए रखती है और प्रजनन क्षमता को बढ़ाती है। यह गर्भाश्य को समुचित आकार में लाकर उसे स्वस्थ बनाने में मदद करती है।

2. अनार - अनार गर्भाश्य में खून के प्रवाह को तेज करता है और गर्भाश्य की दीवारों को मोटा कर के गर्भपात की संभावना को कम करने के लिए सहायक है। यह भ्रूण के स्वस्थ विकास को बढ़ावा देता है ।

सेवनः अनार के बीज और छाल को बराबर मात्रा में मिलाकर इसका चूर्ण बना लें और किसी एयर टाइट जार में रख लें। कुछ हफ्तों के लिए दिन में 2 बार गर्म पानी के एक गिलास के साथ इस मिश्रण का आधा चम्मच लें। आप ताजा अनार-फल भी खा सकते हैं, और अनार का ताज़ा रस भी पी सकते हैं।

3. दालचीनी- दालचीनी डिम्ब-ग्रंथि के सही रूप से कार्य करने में मदद कर सकती है।

सेवनः गर्म पानी के एक कप में, दालचीनी पाउडर का 1 चम्मच मिलाएं । कुछ महीनों के लिए दिन में एक बार इसे पीते रहें । इसके अलावा, अपने अनाज, दलिया, और दही पर भी दालचीनी पाउडर का छिड़काव करके इसे अपने आहार में शामिल करें। ध्यान रहे कि इस मसाले का प्रयोग एक दिन में 2 चम्मच से अधिक ना करें।

4. खजूर- यह गर्भ धारण करने के लिए, आपकी प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद कर सकता है। इसमें कई पोषक तत्व होते हैं, जैसे कि:- विटामिन ए, ई और बी लोहा और अन्य ज़रूरी खनिज, जोकि एक महिला को गर्भ धारण करने के लिए और गर्भावस्था से लेकर बच्चे के जन्म तक आवश्यक हैं।

सेवनः 2 बड़े चम्मच कटे हुए धनिए की जड़ के साथ 10 से 12 खजूर (बीज के बिना) पीस लें। पेस्ट बनाने के लिए गाय के दूध के ¾ कप मिलाएं और इसे उबाल लें। इसे पीने से पहले ठंडा होने दें। अपनी अंतिम माहवारी की तारीख से, एक सप्ताह के लिए, इसे दिन में एक बार पीएं। एक स्वस्थ-नाश्ते के रूप में प्रतिदिन 6-8 खजूर खाते रहें और दूध, दही और स्वास्थ्य-पेय में भी कटे हुए खजूर का समावेश करें।

5. विटामिन-डी - प्रैग्नेंसी और एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देने के लिए विटामिन डी बहुत ही आवश्यक है। वास्तव में विटामिन डी की कमी से बांझपन और गर्भपात का कारण हो सकता है

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