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बलगम वाली खांसी
खांसी à¤à¤• परेशान कर देने वाली समसà¥à¤¯à¤¾ है, जो संकà¥à¤°à¤®à¤£, à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ व अनà¥à¤¯ कई कारणों से हो सकती है। खांसी होने पर आमतौर पर दो से तीन दिन का इंतजार किया जाता है और फिर उसके लिठदवाà¤à¤‚ ली जाती हैं। लेकिन कई बार दवाà¤à¤‚ लेने के बाद à¤à¥€ खांसी कम नहीं होती है और à¤à¤¸à¥‡ में हम उलà¤à¤¨ में पड़ जाते हैं। लेकिन आपको जानकारी होना जरूरी है कि खांसी à¤à¥€ अलग-अलग पà¥à¤°à¤•ार की हो सकती हैं और इनमें से à¤à¤• है बलगम वाली खांसी। इसे पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ कफ (Productive cough) à¤à¥€ कहा जाता है, जो खांसी का à¤à¤• अलग पà¥à¤°à¤•ार है। इस खांसी में बलगम व कफ अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में बनता है और इसलिठही इसे बलगम वाली खांसी कहा जाता है। इस तरह की खांसी फेफड़ों में जमी बलगम को बाहर निकालने में मदद करती है और इसलिठइसे नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ नहीं किया जा जाना चाहिà¤à¥¤ खांसी के साथ अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में बलगम आने के साथ-साथ छाती में à¤à¤¾à¤°à¥€à¤ªà¤¨ महसूस होना और सांस लेने में दिकà¥à¤•त होना आदि इसके पà¥à¤°à¤®à¥à¤– लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• हैं। यह आमतौर पर वायरल व बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² संकà¥à¤°à¤®à¤£ समेत कई समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के कारण हो सकती है।
बलगम वाली खांसी के लकà¥à¤·à¤£
जैसा कि इसके नाम से पता चलता है खांसी के साथ बलगम या कफ निकलना ही बलगम वाली खांसी सबसे पà¥à¤°à¤®à¥à¤– लकà¥à¤·à¤£ माना जाता है। खांसी के दौरान निकलने वाले इस बलगम व कफ में आमतौर पर बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾, मृत ऊतक और कोशिकाओं के टà¥à¤•ड़े होते हैं। बलगम वाली खांसी से कà¥à¤› अनà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ à¤à¥€ देखे जा सकते हैं, जिनमें पà¥à¤°à¤®à¥à¤– रूप से निमà¥à¤¨ को शामिल किया जाता है -
छाती में बलगम जमना (छाती में à¤à¤¾à¤°à¥€à¤ªà¤¨ महसूस होना)
सांस लेने में दिकà¥à¤•त होना (थोड़ी बहà¥à¤¤ या गंà¤à¥€à¤° रूप से)
बà¥à¤–ार होना
नाक बहना
नाक का बलगम बार-बार गले में जाना
डॉकà¥à¤Ÿà¤° को कब दिखाà¤à¤‚
अगर थोड़ी बहà¥à¤¤ खांसी है तो à¤à¤• दो दिन घर पर ही उपाय करें और अगर इससे आराम नहीं हो रहा है, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करें। वहीं अगर आपको उपरोकà¥à¤¤ में से कोई à¤à¥€ लकà¥à¤·à¤£ महसूस हो रहा है, तो à¤à¤¸à¥‡ में आपको तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• कर लेना चाहिà¤à¥¤
बलगम वाली खांसी के कारण
बलगम वाली खांसी के निमà¥à¤¨ कारण हो सकते हैं -
सामानà¥à¤¯ सरà¥à¤¦à¥€-जà¥à¤•ाम (फà¥à¤²à¥‚) के रूप में फेफड़ों में वायरल या बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ होना
असà¥à¤¥à¤®à¤¾, निमोनिया, कà¥à¤°à¥‹à¤¨à¤¿à¤• ऑबà¥à¤¸à¤Ÿà¥à¤°à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ पलà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤°à¥€ डिजीज (सीओपीडी), बà¥à¤°à¥‹à¤‚काइटिस और फेफड़ों में घाव बनने जैसी कोई समसà¥à¤¯à¤¾ होना
गैसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤‡à¤¸à¥‹à¤«à¥‡à¤œà¤¿à¤¯à¤² रिफà¥à¤²à¤•à¥à¤¸ डिजीज (जीईआरडी) जिसमें पेट के मौजूद अमà¥à¤² वापस à¤à¥‹à¤œà¤¨ नली (इसोफेगस) में आ जाà¤à¤‚। गैसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤‡à¤¸à¥‹à¤«à¥‡à¤œà¤¿à¤¯à¤² रिफà¥à¤²à¤•à¥à¤¸ डिजीज के à¤à¤• लकà¥à¤·à¤£ के रूप में à¤à¥€ बलगम वाली खांसी विकसित हो सकती है।
पोसà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡à¤œà¤² डà¥à¤°à¤¿à¤ª जिसमें नाक का दà¥à¤°à¤µ लगातार गले की तरफ बहता रहता है और इस कारण से à¤à¥€ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को बलगम वाली खांसी के लकà¥à¤·à¤£ विकसित हो सकते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में आपको बार-बार गला साफ करने की आदत à¤à¥€ पड़ जाती है।
इसके अलावा कà¥à¤› अनà¥à¤¯ कारक à¤à¥€ हैं, जो बलगम वाली खांसी होने के जोखिम बढ़ा सकती है। सिगरेट पीना या तंबाकू का सेवन करना दोनों सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में गला खराब हो जाता है और फेफड़ों को à¤à¥€ गंà¤à¥€à¤° नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚च सकता है।
बलगम वाली खांसी के जोखिम कारक
बलगम वाली खांसी होने का खतरा आमतौर पर निमà¥à¤¨ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है, जैसे -
सिगरेट पीना या सिगरेट पी रहे किसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के संपरà¥à¤• में आना
शà¥à¤µà¤¸à¤¨ तंतà¥à¤° में होने वाले किसी संकà¥à¤°à¤®à¤£ के संपरà¥à¤• में आना
किसी पà¥à¤°à¤•ार की à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होना (à¤à¤¸à¥‡ में à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¨ के संपरà¥à¤• में आना आपको खांसी होने का खतरा बढ़ा सकता है)
वातावरण में à¤à¥€ कई à¤à¤¸à¥‡ कारक मौजूद हो सकते हैं, जो आपको खांसी होने का खतरे को बढ़ा सकते हैं।
फेफड़ों से संबंधित रोग होना à¤à¥€ आपको बलगम वाली खांसी होने के खतरे को बढ़ा देते हैं, इनमें आमतौर पर फेफड़ों में संकà¥à¤°à¤®à¤£ व सीओपीडी जैसी बीमारियां शामिल हैं।
पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में महिलाओं को बलगम वाली खांसी होने का खतरा अधिक रहता है, à¤à¤¸à¤¾ इसलिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि महिलाà¤à¤‚ खांसी के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ अधिक संवेदनशील होती हैं।
बलगम वाली खांसी का निदान
बलगम वाली खांसी à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾ है, जिसका निदान करना à¤à¥€ काफी आसान होता है। निदान के दौरान डॉकà¥à¤Ÿà¤° मरीज से उसको हो रहे लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के बारे में पूछते हैं और साथ ही सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¥à¥‹à¤¸à¥à¤•ोप की मदद से खांसी के दौरान आ रही धà¥à¤µà¤¨à¤¿ का करीब से सà¥à¤¨à¤¾ जाता है। हालांकि, बलगम वाली खांसी के कारण का पता लगाने के लिठकà¥à¤› अनà¥à¤¯ टेसà¥à¤Ÿ किठजा सकते हैं। उदाहरण के लिठअसà¥à¤¥à¤®à¤¾ जैसी समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं का पता लगाने के लिठमेथाकोलाइन चैलेंज नामक टेसà¥à¤Ÿ किया जा सकता है।
बलगम वाली खांसी का इलाज
बलगम वाली खांसी के इलाज का मà¥à¤–à¥à¤¯ लकà¥à¤·à¥à¤¯ छाती में जमे हà¥à¤ बलगम को निकालना होता है। डॉकà¥à¤Ÿà¤° कà¥à¤› पà¥à¤°à¤•ार दवाà¤à¤‚ देते हैं, जो बलगम निकालने का काम करती हैं इन दवाओं को à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¥‡à¤‚टà¥à¤¸ (Expectorants) के नाम से à¤à¥€ जाना जाता है। हालांकि, अगर बलगम वाली खांसी किसी अनà¥à¤¯ बीमारी के कारण विकसित हà¥à¤ˆ है, तो साथ ही साथ इसका इलाज à¤à¥€ किया जाता है। उदाहरण के रूप में अगर असà¥à¤¥à¤®à¤¾ के कारण बलगम वाली खांसी विकसित हà¥à¤ˆ है, तो इसका इलाज करने के लिठइनहेलà¥à¤¡ बà¥à¤°à¥‹à¤‚कोडायलेटरà¥à¤¸ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है। वहीं निमोनिया और फेफड़ों में घाव बनने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ या इलाज आमतौर पर à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं के साथ किया जाता है। ठीक इसी पà¥à¤°à¤•ार अगर किसी अनà¥à¤¯ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤•े कारण बलगम वाली खांसी हो गई है, तो उसके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° ही इलाज शà¥à¤°à¥‚ किया जाता है औऱ साथ ही ही साथ बलगम को निकालने वाली दवाà¤à¤‚ दी जाती हैं।
इलाज के दौरान डॉकà¥à¤Ÿà¤° इन बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखने की सलाह à¤à¥€ देते हैं -
परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ पानी पिà¤à¤‚ और शरीर में पानी की कमी न होने दें
सोते समय सिर को नीचे अतिरिकà¥à¤¤ तकिठलगाà¤à¤‚ ताकि रात के समय खांसी कम हो
कमरे के तापमान को सामानà¥à¤¯ रखें
कोई à¤à¥€ à¤à¤¸à¥€ गतिविधि न करें जिससे आपको खांसी हो दौड़ना या उंची आवाज में बोलना
सिगरेट व अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤•ार के धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ न करें और न ही धà¥à¤à¤‚ वाली जगह पर जाà¤à¤‚
रात को सोने से आधा घंटा पहले à¤à¤• टेबलसà¥à¤ªà¥‚न शहद लें, लेकिन à¤à¤• साल से कम उमà¥à¤° के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को शहद न दें
अगर आपको संकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण खांसी हà¥à¤ˆ है, तो जब तक आप पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते तब तक à¤à¥€à¤¡à¤¼-à¤à¤¾à¤¡à¤¼ वाले सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ पर न जाà¤à¤‚
नियमित रूप से à¤à¤¾à¤ª लें और à¤à¤¯à¤° वैपोराइजर का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें। साथ ही गरà¥à¤® पानी में नहाना à¤à¥€ मदद बलगम को बाहर निकालने में मदद कर सकता है।
बलगम वाली खांसी की जटिलताà¤à¤‚
बलगम वाली खांसी आमतौर पर किसी अंदरूनी समसà¥à¤¯à¤¾ के कारण विकसित होती है और इसलिठअगर इसका समय पर इलाज न किया जाठतो यह गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ पैदा कर सकती है। उदाहरण के लिठअगर फेफड़ों में संकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण बलगम वाली खांसी विकसित हà¥à¤ˆ है और इसका समय पर इलाज शà¥à¤°à¥‚ नहीं किया गया है, तो à¤à¤¸à¥‡ में संकà¥à¤°à¤®à¤£ अनà¥à¤¯ अंगों में फैल सकता है। वहीं असà¥à¤¥à¤®à¤¾ और सीओपीडी के मरीजों की समय पर देखà¤à¤¾à¤² न करने पर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सांस लेने में दिकà¥à¤•त होने लगती हैं। वहीं समय पर खांसी का इलाज न करने पर खांसी गंà¤à¥€à¤° हो जाती है और इससे पेट में दरà¥à¤¦, बेहोशी और यहां तक कि दबाव के कारण इसोफेगस में कà¥à¤·à¤¤à¤¿ à¤à¥€ हो सकती है।
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