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5 तरह के होते हैं पिंपल, जानें कारण और बचाव के उपाय
अकà¥à¤¸à¤° पिंपल ठीक हो जाने के बाद कà¥à¤› ही दिनों के अंदर इनके निशान à¤à¥€ चले जाते हैं। लेकिन कà¥à¤› पिंपल à¤à¤¸à¥‡ होते हैं, जो चेहरे पर परà¥à¤®à¤¾à¤¨à¥‡à¤‚ट मारà¥à¤• की तरह अपनी पहचान छोड़ देते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में ना केवल फिजिकल पेन बलà¥à¤•ि मेंटल पेन से à¤à¥€ गà¥à¤œà¤°à¤¨à¤¾ होता है। यहां जानें कितने पà¥à¤°à¤•ार के होते हैं पिंपलà¥à¤¸à¥¤
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टीनà¤à¤œ के दौरान पिंपलà¥à¤¸ की समसà¥à¤¯à¤¾ होना आम बात है। लेकिन कई बार यह दिकà¥à¤•त बड़ी उमà¥à¤° में à¤à¥€ घेर लेती है। यह दिकà¥à¤•त उन लोगों को जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ फेस करनी पड़ती है, जिनकी सà¥à¤•िन ऑइली होती है। कà¥à¤¯à¤¾ आपको पता है कि पिंपल कितनी तरह के होते हैं और इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कंटà¥à¤°à¥‹à¤² में रखने के लिठआपको किन चीजों को खाना चाहिà¤? आइà¤, यहां जानते हैं...
सबसे पहले जानें यह
हम सà¤à¥€ की तà¥à¤µà¤šà¤¾ में छोटे-छोटे रोम छिदà¥à¤° होते हैं। जिन लोगों की सà¥à¤•िन ऑइली होती है, इसका कारण उनकी बॉडी में तैलीय गà¥à¤°à¤‚थियों का अधिक à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ होना होता है। जब इन गà¥à¤°à¤‚थियों से निकलने वाले ऑइल पर डेड सà¥à¤•िन सेलà¥à¤¸ की परत आ जाती है तो पिंपलà¥à¤¸ की समसà¥à¤¯à¤¾ होने लगती है। पिंपलà¥à¤¸ का कारण अनà¥à¤µà¤¾à¤‚शिक और खान-पान की वजह à¤à¥€ हो सकता है।
लाइफसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² और पिंपल
अकà¥à¤¸à¤° पिंपल ठीक हो जाने के बाद कà¥à¤› ही दिनों के अंदर इनके निशान à¤à¥€ चले जाते हैं। लेकिन कà¥à¤› पिंपल à¤à¤¸à¥‡ होते हैं, जो चेहरे पर परà¥à¤®à¤¾à¤¨à¥‡à¤‚ट मारà¥à¤• की तरह अपनी पहचान छोड़ देते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में ना केवल फिजिकल पेन बलà¥à¤•ि मेंटल पेन से à¤à¥€ गà¥à¤œà¤°à¤¨à¤¾ होता है। पिंपल होने की वजह खराब डायजेशन और अधिक तनाव à¤à¥€ हो सकता है।
कई तरह के होते हैं मà¥à¤‚हासे
कई पà¥à¤°à¤•ार के होते हैं पिंपलà¥à¤¸
हम पिंपलà¥à¤¸ को केवल पिंपलà¥à¤¸ के नाम से जानते हैं लेकिन शायद ही कà¤à¥€ à¤à¤• इस बात पर गौर करते हैं कि पिंपलà¥à¤¸ à¤à¥€ अलग-अलग तरह के होते हैं। जैसे दाना या फà¥à¤‚सी बà¥à¤²à¥ˆà¤•हैडà¥à¤¸, वाइट हैडà¥à¤¸, पेपà¥à¤²à¥à¤¸, पà¥à¤Ÿà¥€ या गांठऔर नेडà¥à¤¯à¥‚लà¥à¤¸à¥¤
दाना या फà¥à¤‚सी पिंपल
दाना या फà¥à¤‚सी होने का अनà¥à¤à¤µ हम सà¤à¥€ को रहा होता है। ये लाल रंग के और साइज में छोटे या बड़े दाने हो सकते हैं। शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में ठोस होते हैं और इनमें दरà¥à¤¦ और दà¥à¤–न à¤à¥€ बहà¥à¤¤ होते हैं। कà¥à¤› दिन बाद इनकी रेडनेस कम हो जाती है और इनमें पस à¤à¤° जाता है।
बà¥à¤²à¥ˆà¤•हैडà¥à¤¸
बà¥à¤²à¥ˆà¤• हेडà¥à¤¸ आमतौर पर काले रंग के हलà¥à¤•े सखà¥à¤¤ और लंबे रेशे होते हैं, जो तà¥à¤µà¤šà¤¾ के रोमछिदà¥à¤°à¥‹à¤‚ में जमा हो जाते हैं। ये तà¥à¤µà¤šà¤¾ की बà¥à¤²à¥ˆà¤•नेस बढ़ाते हैं और इसकी सà¥à¤®à¥‚दनेस को à¤à¥€ कम करते हैं। बà¥à¤²à¥ˆà¤•हैडà¥à¤¸ सà¥à¤•िन में मेलानिन के ऑकà¥à¤¸à¥€à¤•रण के कारण होते हैं और हमें लगता है कि ये गंदगी के कारण जमा हà¥à¤ हैं।
कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होते हैं पिंपलà¥à¤¸?
पेपà¥à¤²à¥à¤¸
पेपà¥à¤²à¥à¤¸ का रंग हलà¥à¤•ा गà¥à¤²à¤¾à¤¬à¥€ से लेकर गहरा लाल तक हो सकता है। ये रेजर कट, रेजर बरà¥à¤¨, किसी कीड़े के काटने या तà¥à¤µà¤šà¤¾ संबंधी किसी समसà¥à¤¯à¤¾ के कारण हो सकते हैं। आमतौर पर ये बहà¥à¤¤ ही सेंसटिव और पेनफà¥à¤² होते हैं।
नोडà¥à¤¯à¥‚लà¥à¤¸
नोडà¥à¤¯à¥‚लà¥à¤¸ उन पिंपलà¥à¤¸ को कहा जाता है, जो हमारी सà¥à¤•िन के ऊपर की तरफ डिवेलप होने के बजाय अंदर की तरफ डिवेलप होते हैं। ये आकार में दूसरे पिंपलà¥à¤¸ से कà¥à¤› बड़े, कठोर और हलà¥à¤•े से टच से à¤à¥€ दरà¥à¤¦ देनेवाले हो सकते हैं।
पà¥à¤Ÿà¥€, सिसà¥à¤Ÿ या गांà¤
पिंपलà¥à¤¸ में à¤à¥€ सिसà¥à¤Ÿ या गांठà¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार होता है। इसमें सूजन à¤à¥€ होती है और घाव à¤à¥€à¥¤ आमतौर पर इस तरह के मà¥à¤‚हासे होने पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° की गाइडेंस की जरूरत पड़ती है। ये काफी दरà¥à¤¦ देनेवाले और पस à¤à¤°à¥‡ होते हैं।
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