प्रेग्नेंट होने के लिए कौन सी दवा लेनी चाहिए?HealthPlanet

Posted on Fri 11th Nov 2022 : 09:26

प्रजनन क्षमता की दवाइयां महिलाओं के लिए कैसे काम करती हैं?
प्रजनन अक्षमता (इनफर्टिलिटी) की समस्याओं वाली बहुत सी महिलाओं के लिए प्रजनन (फर्टिलिटी) की दवाएं लेना, उपचार का पहला कदम होता है। ये आमतौर पर उन महिलाओं की मदद करती हैं जो नियमित तौर पर डिंबोत्सर्जन (ओव्यूलेशन) नहीं कर पातीं। ये दवाएं गर्भधारण के लिए उपचारों जैसे आईवीएफ आदि का जरुरी हिस्सा होती हैं।

प्रजनन क्षमता की दवाएं आपके शरीर में विशिष्ट हॉर्मोनों का स्तर बढ़ा देती हैं। ये हॉर्मोन हर माह एक या इससे अधिक डिंब को परिपक्व होने और बाहर निकलने में मदद करती है। अगर, आप कभी-कभार या अनियमित तौर पर डिंबोत्सर्जन करती हैं, तो प्रजनन की दवाएं आपकी मदद कर सकती हैं।

इन दवाओं का इस्तेमाल पुरुष प्रजनन अक्षमता से जुड़ी समस्याओं के उपचार में भी किया जा सकता है।

बहुत सी प्रजनन दवाओं का इस्तेमाल कई दशकों से सुरक्षित और सफल तरीके से किया जा रहा है। मगर, कुछ के साइड इफेक्ट हो सकते हैं, जैसे कि बहुत सारे डिंब कोष विकसित होना (ओवेरियन हाइपरस्टिमुलेशन सिंड्रोम) या जुड़वा या इससे ज्यादा शिशु होने की उच्च संभावना। इसलिए यह जरुरी है कि फर्टिलिटी दवाओं का सेवन प्रजनन विशेषज्ञ या अन्य डॉक्टर की देखरेख में ही किया जाए।

प्रजनन विशेषज्ञ आपकी स्थिति को देखते हुए उपचार तय करेंगी ताकि कम से कम साइड इफेक्ट हों। साथ ही वे आप पर पूरी निगरानी रखेंगी ताकि कोई भी जटिलता उत्पन्न होने पर वे इसका उपचार कर सकें।
महिलाओं के लिए प्रजनन की कौन सी दवाइयां उपलब्ध हैं?
महिलाओं के लिए फर्टिलिटी की सर्वाधिक लोकप्रिय दवाएं हैं:

क्लोमिफीन सिट्रेट
गोनाडोट्रॉफिन
डोपेमीन एगोनिस्ट
मेटफॉर्मिन हाइड्रोक्लोराइड

ये सभी दवाएं ओव्यूलेशन होने में मदद करती हैं। मगर आपके लिए कौन सी दवा सही रहेगी, वह इस बात पर निर्भर करेगा कि आपके डिंबोत्सर्जन और गर्भधारण में हो रही मुश्किल की वजह क्या है। साथ ही क्या ये दवाएं आईवीएफ जैसे असिस्टेड कंसेप्शन उपचार में इस्तेमाल की जा रही हैं या नहीं।

क्लोमिफीन सिट्रेट

जिन महिलाओं को पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) की समस्या होती है, और जिनकी माहवारी अनियमित रहती है, उनके लिए क्लोमिफीन सिट्रेट काफी मददगार होती है। ​वहीं, जिन महिलाओं के पीरियड्स बिल्कुल नहीं आते या जिनका वजन सामान्य से काफी कम है, उनके लिए यह दवा इतनी कारगर नहीं होती।

क्लोमिफीन आपके शरीर में उन दो हॉर्मोनों के अधिक उत्पादन को बढ़ावा देता है, जो ओव्यूलेशन और गर्भधारण के लिए जरुरी हैं। ये दो हॉर्मोन हैं:

फॉलिकल-स्टिमुलेटिंग हॉर्मोन (एफएसएच)
ल्यूटेनाइजिंग हॉर्मोन (एलएच)

एफएसएच गर्भाशय में आपके डिंबों को परिपक्व होने और बाहर निकलने के लिए तैयार करता है। वहीं, एलएच अंडाशय के फॉलिकल्स में से एक या इससे ज्यादा परिपक्व डिंबों को बाहर निकलने के लिए प्रेरित करता है। इसके बाद एक या इससे ज्यादा डिंब नीचे निकलकर आपकी डिंबवाही नलिकाओं (फैलोपियन ट्यूब) में आ जाते हैं, जहां वे शुक्राणु द्वारा निषेचित किए जा सकते हैं।

यदि आपकी डॉक्टर आपको क्लीमिफिन लेने की सलाह देती हैं, तो शायद आपको छह महीने तक हर महीने में पांच दिन रोज एक गोली लेने के लिए कहा जाएगा। यदि आपके पीरियड्स नियमित रहते हैं, तो डॉक्टर माहवारी चक्र की शुरुआत में ही यह गोली लेने के लिए कहेंगी।

गोनाडोट्रॉफिन

ल्यूटेनाइजिंग हॉर्मोन (एलएच) और फॉलिकल-स्टिमुलेटिंग हॉर्मोन (एफएसएच), गोनाडोट्रॉफिन के ही प्रकार हैं।
एलएच और एफएसएच सीधे आपके अंडाशयों को डिंब का उत्पादन और उन्हें परिपक्व करने के लिए उत्तेजित करते हैं।

गोनाडोट्रॉफिन आमतौर पर निम्नांकित स्थितियों में इस्तेमाल किए जाते हैं:

जब महिला नियमित तौर पर डिंबोत्सर्जन नहीं कर रही हो और क्लोमिफीन जैसी अन्य दवाओं से भी फायदा न हुआ हो।
जब महिला बिल्कुल भी ओव्यूलेट न करे।
जब महिला प्रजनन उपचारों जैसे कि आईवीएफ की सहायता ले रही हो।

गोनाडोट्रॉफिन लेने की सलाह देने से पहले, डॉक्टर आपसे कुछ टेस्ट करवाने के लिए कहेंगी। आमतौर पर खून की जांच और अल्ट्रासाउंड स्कैन करवाया जाता है। यदि रिपोर्ट में सब ठीक रहा, तो वे आपको 12 दिनों तक रोजाना गोनाडोट्रॉफिन इंजेक्शन के तौर पर देंगी। इंजेक्शन आपके अंडाशयों को डिंब फॉलिकल विकसित करने और इन्हें परिपक्व करने में मदद करते हैं।

गोनाडोट्रॉफिन इंजेक्शन लेने के कुछ दिनों बाद आपको कुछ और टेस्ट करवाने होंगे, ताकि पता चल सके कि दवा कैसे काम कर रही है। इसे देखते हुए यदि जरुरत हुई तो डॉक्टर दवा की खुराक कम या ज्यादा कर सकती हैं, ताकि सुनिश्चित हो सके कि आपकी व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार आपको सही उपचार मिल रहा है।

यदि गोनाडोट्रॉफिन सही काम कर रही हों, तो दवा का कोर्स पूरा होने पर आपको अंत में एक अन्य हॉर्मोन ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रॉफिन (एससीजी) का इंजेक्शन दिया जाएगा। इससे डिंबोत्सर्जन को प्रेरित किया जाएगा।

जब आपके अंडाशयों से डिंब जारी हो जाता है, तो अगले दिन आपके संभोग करने से यह स्वत: निषेचित हो सकता है। यदि आपका प्रजनन उपचार चल रहा है तो छोटी सी चिकित्सकीय प्रक्रिया के जरिये डिंबों को ए​कत्रित किया जाएगा और उन्हें प्रयोगशाला में शुक्राणु के साथ मिला दिया जाएगा ताकि इनका निषेचन हो सके।

डोपेमीन एगोनिस्ट

यदि आपके शरीर में प्रोलेक्टिन हॉर्मोन की मात्रा बहुत ज्यादा हो, तो डॉक्टर आपको डोपेमीन एगॉनिस्ट लेने की सलाह दे सकती है। प्रोलेक्टिन की अत्याधिक मात्रा ईस्ट्रोजेन हॉर्मोन के स्तर को कम कर देती है। इसकी वजह से ओव्यूलेशन में समस्या होती है, जिससे गर्भवती होने में मुश्किल आती है।

डोपेमीन एगॉनिस्ट जैसे कि ब्रोमोक्रि​प्टीन और केबरगोलीन का इस्तेमाल प्रोलेक्टिन के स्तर को कम करने के लिए किया जाता है।

यदि आईवीएफ जैसे प्रजनन उपचारों के दौरान इनका इस्तेमाल किया जाए तो डोपेमीन एगॉनिस्ट ओवेरियन हाइपर-स्टिमुलेशन सिंड्रोम (ओएचएसएस) के खतरे को भी कर सकती हैं। साथ ही, इससे गर्भवती होने की संभावना या जुड़वा या इससे ज्यादा शिशु होने की संभावना पर असर नहीं पड़ता।

आप ब्रोमोक्रिप्टीन को निगलने वाली गोली के रूप में या फिर योनि में डालने वाले कैप्सूल के तौर पर ले सकती हैं।

मेटफॉर्मिन हाइड्रोक्लोराइड

मेटफॉर्मिन हाइड्रोक्लोराइड ऐसी दवा है जो आपके शरीर को इंसुलिन हॉर्मोन के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है। इसे मधुमेह (डायबिटीज) के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता है, मगर इसे पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) से ग्रस्त महिलाओं में डिंबोत्सर्जन से जुड़ी समस्याओं के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

यदि आपकी डॉक्टर को लगता है कि आपके मामले में यह दवा मदद करेगी, तो वे शायद एक दिन में बहुत सी मेटफॉर्मिन टैब्लेट लेने की सलाह देंगी। वे आपको बताएंगी कि आपको कैसे और कब ये दवा लेती है।

ये दवा आपके खून में संचारित हो रहे इंसुलिन के स्तर को कम करती हैं, जिससे आपको सामान्य ढंग से डिंबोत्सर्जन करने में मदद मिल सकती है।

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