Login
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के 5 महीने में कà¥à¤¯à¤¾ कà¥à¤¯à¤¾ दिकà¥à¤•त होती है-
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के हर महीने कà¥à¤› लकà¥à¤·à¤£ समान रहते हैं, तो कà¥à¤› नठहो सकते हैं। जानिà¤, पांचवें महीने के लकà¥à¤·à¤£ के बारे में :
1. थकान होना : गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के पांचवें महीने में थकान होना आम लकà¥à¤·à¤£ है। जैसे-जैसे गरà¥à¤ में शिशॠका वजन बढ़ेगा गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ को जलà¥à¤¦à¥€ थकान महसूस होगी।
2. पीठदरà¥à¤¦ होना : गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ में शिशॠका आकार बढ़ने के कारण पीठके निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ में दरà¥à¤¦ होने की समसà¥à¤¯à¤¾ आम है। अधिकतर गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाà¤à¤‚ पूरे गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान पीठदरà¥à¤¦ की समसà¥à¤¯à¤¾ से परेशान रहती हैं।
3. सिर दरà¥à¤¦ होना : हालांकि, गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में गैस और कबà¥à¤œ की समसà¥à¤¯à¤¾ होना आम है, इस वजह से सिर दरà¥à¤¦ की शिकायत अकà¥à¤¸à¤° रहती है।
4. नाखून कमजोर पड़ना : इस दौरान नाखूनों पर à¤à¥€ असर पड़ता है। आप पाà¤à¤‚गी कि गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान आपके नाखून पहले से कमजोर हो गठहैं और जलà¥à¤¦à¥€ टूट जाते हैं। कà¥à¤› मामलों में नाखून मजबूत à¤à¥€ हो जाते हैं। à¤à¤¸à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° दूसरी तिमाही के दौरान होता है।
5. मसूड़ों से खून आना : गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के पांचवें महीने में अधिकतर महिलाओं को मसूड़ों से खून आने की समसà¥à¤¯à¤¾ से जूà¤à¤¨à¤¾ पड़ता है। à¤à¤¸à¤¾ हारà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤² बदलाव या फिर विटामिन-के की कमी के कारण होता है।
6. सांस लेने में तकलीफ होना : पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤¨ हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ बढ़ने के कारण जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं को सांस लेने में तकलीफ होती है (4)। इसके अलावा, वजन बढ़ने के कारण à¤à¥€ सांस लेने में दिकà¥à¤•त हो सकती है। गरà¥à¤ में à¤à¤• से अधिक शिशॠहोने पर बढ़ते हà¥à¤ गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ डायफà¥à¤°à¤¾à¤® पर पड़ने से यह समसà¥à¤¯à¤¾ जलà¥à¤¦à¥€ शà¥à¤°à¥‚ हो जाती है।
7. योनि से सफेद पानी आना : योनि से सफेद सà¥à¤°à¤¾à¤µ आ सकता है। बिना दà¥à¤°à¥à¤—ंध का, सफेद व पिचà¥à¤›à¤¿à¤² (न जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ गाढ़ा, न जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पतला) सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤µ बिना जलन, खà¥à¤œà¤²à¥€ या दरà¥à¤¦ के आà¤, तो वह सामानà¥à¤¯ योनि सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤µ है। इसके अतिरिकà¥à¤¤ लकà¥à¤·à¤£ नजर आने पर चिकितà¥à¤¸à¤• से परामरà¥à¤¶ लें ।
8. à¤à¥‚लने की समसà¥à¤¯à¤¾ : गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में हारà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤² बदलाव के चलते मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• पर असर पड़ता है, जिस कारण गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ को कà¤à¥€-कà¤à¥€ à¤à¥‚लने की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है।
9. टखनों में सूजन आना और पैरों में दरà¥à¤¦ होना : गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के पांचवें महीने के दौरान पैरों में दरà¥à¤¦ और सूजन होना आम है। गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान शिशॠके पोषण के लिठशरीर में रकà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बनता है और अकà¥à¤¸à¤° टांगों की नसें बà¥à¤²à¥‰à¤• हो जाती हैं, जिस कारण रकà¥à¤¤ पैरों से हृदय तक नहीं पहà¥à¤‚च पाता, तब ये लकà¥à¤·à¤£ नजर आते हैं ।
10. गैस व कबà¥à¤œ रहना : शरीर में होने वाले तमाम तरह के बदलाव से कबà¥à¤œ हो सकती है, जिससे गैस की समसà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥€ होती है।
11. कà¤à¥€-कà¤à¥€ चकà¥à¤•र आना : जैसे-जैसे गरà¥à¤ में शिशॠका विकास होता है, शिशॠके लिठपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की जरूरत पड़ती है। à¤à¤¸à¥‡ में गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ को कà¤à¥€-कà¤à¥€ कमजोरी महसूस हो सकती है, जिस कारण चकà¥à¤•र आ सकते हैं।
12. नाक से खून आना : गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के पांचवें महीने के दौरान नकसीर आना यानी नाक से खून आना à¤à¥€ सामानà¥à¤¯ बात है। यह रकà¥à¤¤ संचार बढ़ने चलते होता है ।
| --------------------------- | --------------------------- |