प्रेगनेंसी के चौथे महीने में क्या क्या सावधानी रखनी चाहिए?HealthPlanet

Posted on Tue 7th Feb 2023 : 13:01

​क्‍या करना चाहिए


चार महीने प्रेगनेंट महिला को नीचे बताई गई बातों पर ध्‍यान देना चाहिए ताकि मां और बच्‍चा दोनों स्‍वस्‍थ रहें।

शिशु को अत्‍यधिक पोषण की जरूरत है और ये मां से ही उसे मिलेगा। आपको पर्याप्‍त मात्रा में विटामिन लेने हैं।
रोज एक्‍सरसाइज करें। प्रेगनेंसी में पैदल चलना और योग करना एवं एक्टिव रहना डिलीवरी के दौरान फायदेमंद साबित होता है।
गर्भावस्‍था में शरीर को दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है इसलिए 7 से 8 घंटे की नींद लेना बहुत जरूरी है।
फिश में भरपूर मात्रा में ओमेगा 3 फैटी एसिड और अन्‍य खनिज पदार्थ होते हैं। अपनी डायट में फिश को शामिल करें, लेकिन सीफूड (समुद्री भोजन) को अच्‍छी तरह से धोने के बाद ही खाएं। कच्‍ची और उच्‍च मात्रा में मर्करी वाली फिश न खाएं।
इस महीने सेक्‍स ड्राइव बेहतर होती है इसलिए आप सेक्‍स का आनंद ले सकती हैं। हालांकि, एक बार डॉक्‍टर से इस बारे में सलाह जरूर लें।
गर्भावस्‍था में किसी भी तरह की बीमारी या इंफेक्‍शन से बचने के लिए फ्लू शॉट जरूर लगवाएं।
अपने वजन को कंट्रोल में रखें और पौष्टिक आहार लें।
प्रेगनेंसी दांतों को भी प्रभावित करती है इसलिए डेंटल चेकअप करवा आएं।

​क्‍या न करें

चौथे महीने में कुछ काम करने से पूरी तरह से बचना चाहिए, जैसे कि :

ज्‍यादा कैफीन का सेवन न करें, क्‍योंकि इससे शिशु की हार्ट रेट बढ़ सकती है।
घर में कोई पैट है तो उसकी गंदगी को आप खुद साफ न करें।
गर्म पानी में नहाने से बचें और सॉना बाथ भी न लें। ज्‍यादा गर्म पानी से नहाने से प्रेगनेंसी में प्रॉब्‍लम हो सकती है।
बाहर पके हुए मीट को खाने से बचें। बाहर से मीट आए तो उसे अच्‍छी तरह से धोकर पकाने के बाद ही खाएं।
शराब न पिएं, क्‍योंकि इससे शिशु को फीटल एल्‍कोहल सिंड्रोम हो सकता है।
प्रेगनेंसी में सिगरेट नहीं पीनी चाहिए। धूम्रपान करने वाली प्रेगनेंट महिलाओं के बच्‍चे का जन्‍म के समय वजन कम हो सकता है और उसमें विकलांगता का खतरा भी अधिक होता है।

​​चौथे में कौन से टेस्‍ट करवाएं

मां और बच्‍चे की सेहत की जांच के लिए अब जल्‍दी जल्‍दी चेकअप करवाते रहना चाहिए। इस समय निम्‍न टेस्‍ट करवाने की जरूरत होती है :

फिजीकल चेकअप : इसमें प्रेगनेंट महिला की योनि, ब्रेस्‍ट और पेट जैसे हिस्‍सों की जांच की जाती है।
चौथे महीने में प्रेगनेंसी स्‍कैन : भ्रूण के विकास में आए बदलावों को देखने के लिए अल्‍ट्रासाउंड किया जाता है।
फीटल हार्टबीट :डॉपलर अल्‍ट्रासाउंड की मदद से शिशु के दिल की धड़कन को नोट किया जाता है कि धड़कन ज्‍यादा तेज है या धीमी।
एडिमा टेस्‍ट : पैरों, एड़ियों और टांगों में सूजन की जांच की जाती है। असामान्‍य सूजन प्रीक्‍लैंप्‍सिया, जेस्‍टेशनल डायबिटीज या खून का थक्‍का जमने का संकेत हो सकता है।

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