प्रेगनेंसी के शुरुआती दिनों में क्या खाना चाहिए?HealthPlanet

Posted on Fri 11th Nov 2022 : 09:26

मां बनने का सपना देखने से लेकर मां बनने तक की यात्रा एक महिला के लिए काफी रोमांचक, भावुक कर देने वाली होने के साथ ही जिम्‍मेदारी भरी भी होती है. इस दौरान शरीर में होने वाले बदलावों से लेकर आने वाली नई जिंदगी के लिए बेहतर जीवन की कल्‍पना भी साथ चलती है. मां के स्‍वास्‍थ्‍य और बच्‍चे के विकास के लिए गर्भधारण (Pregnancy) से लेकर नौवें महीने तक गर्भवती महिला के खान-पान का बेहद ध्‍यान रखा जाता है क्‍योंकि यही उसके होने वाले बच्‍चे को पोषण (Nutrition) प्रदान करता है. हालांकि कई बार अलग-अलग जगहों पर खान-पान की अलग-अलग मान्‍यताओं, बड़े बुजुर्गों के अनुभवों, चिकित्‍सकों की सलाहों और खुद प्रेग्‍नेंट महिला (Pregnant Woman) की पसंद-नापसंद के चलते सही और पोषणयुक्‍त भोजन का चुनाव करना काफी कठिन हो जाता है. ऐसे में आयुर्वेद की ओर से प्रेग्‍नेंट महिलाओं के लिए तय की गई ये पोषणयुक्‍त डाइट काफी फायदेमंद हो सकती हैखान-पान को लेकर विस्‍तार से बताया गया है. इसमें प्रेग्‍नेंट महिलाएं पहले महीने से लेकर नौवें महीने तक क्‍या खाएं, इसे भी बताया गया है. आयुर्वेद हमेशा से ही स्‍वास्‍थ्‍य को बेहतर बनाने और बीमारियों से बचाकर दुरुस्‍त रखने के लिए पोषणयुक्‍त खान-पान पर जोर देता रहा है. आयुर्वेद के अनुसार भोजन स्‍वस्‍थ जीवन जीने की महत्‍वपूर्ण जरूरत है. एक प्रेग्‍नेंट महिला का खान-पान ही गर्भ में मौजूद बच्‍चे के विकास और स्‍वास्‍थ्‍य के लिए जिम्‍मेदार है, इसलिए आयुर्वेद की इन सिफारिशों को अपनाना काफी लाभदायक हो सकता है.

पहला महीना– पहले महीने में महिलाएं ठंडा दूध और पोषणयुक्‍त खाना खाएं. जिसमें फल, सब्‍जी, दाल आदि ले सकते हैं.

दूसरा महीना– इस महीने में प्रेग्‍नेंट महिलाएं मौसमी फल, सब्‍जी, दूध, दही, रोटी खाने के साथ ही आयुर्वेदिक औषधि शतावरी को दूध (Milk) के साथ ले सकती हैं. शतावरी प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के साथ ही विटामिन की कमी को पूरी करती है. इसके अलावा बाला यानि सीदा कॉर्डिफोलिया भी ले सकती हैं. ये शरीर में ताकत, ऊर्जा, हड्डियों और जोड़ों की मजबूती को बढ़ाने वाली औषधि है.

तीसरा महीना– इस महीने में महिलाएं दूध और दूध से बने पदार्थ जरूर लें. जिनमें दही, पनीर, छाछ, घी शामिल है. इसके अलावा इस महीने से शहद लेना शुरू करें. रोजाना ठंडे दूध में शहद लें. यह माता और बच्‍चे दोनों के लिए लाभकारी है. पोषणयुक्‍त भोजन करें.

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