Login
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
: पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी का फरà¥à¤¸à¥à¤Ÿ टà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤®à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤° (Pregnancy first Trimester) गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला (Pregnant women) और गरà¥à¤ में पल रहे शिशॠके लिठबेहद ही नाजà¥à¤• होता है। पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के पांचवे सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में जब à¤à¤• महिला पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करती है, तो वह पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी का दूसरा महीना (Second Month Pregnancy) कहलाता है। गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दूसरे महीने में शरीर में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं। पहले महीने में दिखने वाले लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ से दूसरे महीने में नजर आने वाले लकà¥à¤·à¤£ थोड़े अलग हो सकते हैं। सà¥à¤¬à¤¹ उठकर थकान, उलà¥à¤Ÿà¥€, जी मिचलाना, सिरदरà¥à¤¦ आदि कॉमन पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के लकà¥à¤·à¤£ (Pregnancy symptoms in Hindi) हैं। दूसरे महीने से गरà¥à¤ में पल रहे à¤à¥à¤°à¥‚ण को à¤à¥€ अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड करवाते समय देखा जा सकता है। विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से जानते हैं पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दूसरे महीने में शरीर में कई तरह के हारà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤² बदलाव आते हैं। खासकर, à¤à¤šà¤¸à¥€à¤œà¥€ हारà¥à¤®à¥‹à¤‚स का सà¥à¤¤à¤° बढ़ जाता है। इससे ये पता चलता है कि आप पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚ट हैं। इस हारà¥à¤®à¥‹à¤‚स के बढ़ने से ही शरीर में बदलाव आते हैं और आपको अनियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ महसूस होता है। दरअसल, दूसरे महीने में पेट बढ़ा हà¥à¤† नजर नहीं आता है, इसलिठà¤à¥€ लोगों को पता नहीं चलता कि आप पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚ट हैं। धीरे-धीरे पेट पर दबाव बढ़ने लगता है, जिससे आपको महसूस होता है कि आपको आराम करना चाहिà¤à¥¤
दूसरे महीने में शिशॠका विकास
दूसरे महीने में शिशॠका विकास लगà¤à¤— 1-5 मिमी तक हो जाता है। शरीर के महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ अंग जैसे- दिल, हडà¥à¤¡à¥€, मांसपेशियों, तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° विकास होना शà¥à¤°à¥‚ हो जाता है। हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ अपना आकार लेने लगती हैं। शिशॠके दिल का विकास जलà¥à¤¦à¥€ होता है। हारà¥à¤Ÿ चार चैमà¥à¤¬à¤° में विà¤à¤¾à¤œà¤¿à¤¤ हो जाता है। खून पंप करना शà¥à¤°à¥‚ कर देता है। पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा यानी नाल और à¤à¤®à¥à¤¬à¤¿à¤²à¤¿à¤•ल कॉरà¥à¤¡ यानी गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² का विकास हो जाता है और इसी के जरिठशिशॠको à¤à¥‹à¤œà¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होता है। धीरे-धीरे नाक, मà¥à¤‚ह, कान, आंख, उंगà¥à¤²à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ दिखाई देने लगती हैं।
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दूसरे महीने नजर आने वाले लकà¥à¤·à¤£ (Symptoms at 2 months pregnant in Hindi)
1 दूसरे महीने में पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚ट महिला को सà¥à¤¬à¤¹ मॉरà¥à¤¨à¤¿à¤‚ग सिकनेस की समसà¥à¤¯à¤¾ (Symptoms of pregnancy in hindi) बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है। सà¥à¤¬à¤¹ उठते ही जी मिचलाना अधिक महसूस कर सकती हैं।
2 मूड में बहà¥à¤¤ बदलाव आता है। बात-बात पर चिड़चिड़ापन, खीजना, गà¥à¤¸à¥à¤¸à¤¾ करना कई महिलाओं (2 months pregnant symptoms) में देखा जा सकता है। इसकी मà¥à¤–à¥à¤¯ वजह है पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤¨ और à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ में बदलाव होना। यह मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• के रासायनिक संरचना में बदवाल होने के कारण होता है।
3 दूसरे महीने में आपको बार-बार पेशाब करने का मन कर सकता है। à¤à¤²à¥‡ आप पेशाब जाà¤à¤‚, लेकिन पानी पीना कम ना करें, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी में हाइडà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ रहना बहà¥à¤¤ जरूरी होता है।
4 आपके बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ का साइज बढ़ने लगता है। हो सकता है आपको पहले के बà¥à¤°à¤¾ फिट ना हों। बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ को छूने से आपको दरà¥à¤¦ à¤à¥€ महसूस हो सकता है। बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ के साथ ही वजन à¤à¥€ बढ़ना शà¥à¤°à¥‚ हो सकता है।
5 किसी-किसी महिलाओं की à¤à¥‚ख खतà¥à¤® हो जाती है। वो जो कà¥à¤› à¤à¥€ खाती हैं, उलà¥à¤Ÿà¥€ हो जाती है। तो कà¥à¤› महिलाओं को तरह-तरह की चीजें खाने का मन करता है। कà¥à¤› महिलाओं को खाने की महक नहीं à¤à¤¾à¤¤à¥€ है।
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दूसरे महीने में हो सकती हैं ये समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚
आपको बार-बार लार बन सकता है।
कबà¥à¤œ की शिकायत हो सकती है।
सीने और पेट में जलन।
अपच, गैस या फिर पेट खराब हो सकता है।
खाने की इचà¥à¤›à¤¾ में कमी।
सिरदरà¥à¤¦, चकà¥à¤•र आना बहà¥à¤¤ कॉमन है।
निपà¥à¤ªà¤² के आसपास का à¤à¤¾à¤— अधिक डारà¥à¤• हो जाना।
शरीर में खासकर, पैरों में सूजन रहना।
योनी से हलà¥à¤•ा रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ होना।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दूसरे महीने में बरतें ये सावधानियां (precautions for second month of pregnancy)
आराम करें। अधिक à¤à¤¾à¤°à¥€ चीजें ना उठाà¤à¤‚।
लिकà¥à¤µà¤¿à¤¡ पदारà¥à¤¥ अधिक लें। पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी में खà¥à¤¦ को हाइडà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ रखना जरूरी है।
à¤à¥‹à¤œà¤¨ घर का खाà¤à¤‚। फल-सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को अचà¥à¤›à¥€ तरह से धोकर खाà¤à¤‚।
à¤à¤• बार में ही अधिक खाने से बचें। थोड़ा-थोड़ा खाà¤à¤‚। इससे खाना जलà¥à¤¦à¥€ पच जाà¤à¤—ा।
बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ का साइज बढ़ने लगता है, à¤à¤¸à¥‡ में सपोरà¥à¤Ÿà¤¿à¤µ बà¥à¤°à¤¾ पहनें।
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दूसरे महीने में डाइट (Second month pregnancy diet)
यदि आप दो महीने की पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚ट हैं, तो यह सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ शिशॠके विकास के लिठबहà¥à¤¤ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ होता है। à¤à¤¸à¥‡ में आपका खानपान हेलà¥à¤¦à¥€ और पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• चीजों से à¤à¤°à¤ªà¥‚र होना चाहिà¤à¥¤ बाहर का खाना बंद कर दें। घर का बना ताजा और पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• à¤à¥‹à¤œà¤¨ ही करें। सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ और संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार लें। हरी पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, फल, अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में तरल पदारà¥à¤¥, साबà¥à¤¤ अनाज, सà¥à¤ªà¥à¤°à¤¾à¤‰à¤Ÿà¥à¤¸, अंडा, मछली आदि को अपनी डाइट में शामिल करें। पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी में हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को मजबूती देने के लिठदूध, दही, पनीर à¤à¥€ खाà¤à¤‚। शरीर में खून और आयरन की कमी ना हो, इसके लिठआयरन से à¤à¤°à¤ªà¥‚र फूडà¥à¤¸, फल-सबà¥à¤œà¥€ जैसे पालक, चà¥à¤•ंदर आदि खाà¤à¤‚। फॉलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡, फोलेट, कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, जिंक, आयरन, आयोडीन, विटामिन डी गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में बहà¥à¤¤ जरूरी हैं। डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपको सपà¥à¤²à¥€à¤®à¥‡à¤‚टà¥à¤¸ लेने की à¤à¥€ सलाह देंगे, इनके सेवन से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में जनà¥à¤®â€“दोष को रोका जा सकता है।
| --------------------------- | --------------------------- |