प्रेगनेंसी में शुगर कंट्रोल कैसे करे?HealthPlanet

Posted on Tue 29th Nov 2022 : 14:20

प्रेग्‍नेंसी में शुगर कंट्रोल करने के काम आते हैं ये कारगर घरेलू नुस्‍खे, आजमाने से जेस्‍टेशनल डायबिटीज होगी कम
प्रेग्‍नेंसी में मधुमेह होना मां और बच्‍चे दोनों के लिए हानिकारक होता है। कुछ घरेलू नुस्‍खे प्रेग्‍नेंसी में जेस्‍टेशनल डायबिटीज से बचाने और इसे कंट्रोल करने में कारगर होते हैं।
जब गर्भवती महिला के शरीर में ब्‍लड ग्‍लूकोज का लेवल बढ़ जाए, तो इस स्थिति को जेस्‍टेशनल डायबिटीज कहते हैं। हम जो भी खाते हैं, शरीर उसे ग्‍लूकोज में बदलता है। इसकी प्रतिक्रिया में एनर्जी बनाने के लिए ग्‍लूकोज को खून से कोशिकाओं तक पहुंचाने के लिए अग्‍नाश्‍य इंसुलिन बनाता है। पर्याप्‍त इंसुलिन के बिना खून में ब्‍लड शुगर का लेवल बढ़ सकता है जिससे प्रेगनेंट मां और उसके गर्भस्‍थ शिशु को दिक्‍कत हो सकती है।प्रेग्‍नेंसी में जेस्‍टेशनल डायबिटीज होना, शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकता है। य‍दि किसी गर्भवती महिला को डायबिटीज हो जाए, तो कुछ घरेलू नुस्‍खों की मदद से इसे कंट्रोल या ठीक किया जा सकता है।
​विटामिन सी खाएं
इस विटामिन के कई तरह के लाभ होते हैं और गर्भवती महिलाओं के लिए तो यह बहुत ही फायदेमंद होता है। माना जाता है कि प्रेग्‍नेंसी में पर्याप्‍त मात्रा में विटामिन सी लेने वाली महिलाओं में इसका सेवन करने वाली महिलाओं की तुलना में जेस्‍टेशनल डायबिटीज का खतरा कम होता है।
​एक्‍सरसाइज

एक्‍सरसाइज कई बीमारियों से बचाने में कारगर होती है और प्रेग्‍नेंसी में भी रोज व्‍यायाम करना जरूरी है। इससे प्रेग्‍नेंसी में बढ़ने वाले वजन को भी रोका जा सकता है। रोज दिन में दो बार 30 मिनट की एक्‍सरसाइज से हार्ट रेट ठीक रहता है और मेटाबोलिज्‍म भी ठीक तरह से कार्य करता है।
इससे जेस्‍टेशनल डायबिटीज होने से बचाव होता है। अपने डॉक्‍टर से पूछें कि आपकी स्‍वास्‍थ्‍य स्थिति के हिसाब से कौन-सी एक्‍सरसाइज बेहतर रहेंगी।
​फाइबर वाले फूड्स

डायबिटीज मरीजों को डॉक्‍टर हमेशा उच्‍च फाइबर युक्‍त आहार लेने की सलाह देते हैं। फाइबर इंसुलिन रिसेप्‍टर्स को उत्तेजित करता है और रक्‍त वाहिकाओं में रिलीज हुए इंसुलिन की मात्रा को कंट्रोल करता है। इस तरह फाइबर डायबिटीज से बचाता है। अलसी और साबुत अनाज में डायट्री फाइबर ज्‍यादा होता है।
​नींद भी है जरूरी
गहरी और अच्‍छी नींद, दिमाग और शरीर, दोनों के लिए जरूरी होती है। प्रेग्‍नेंसी में आपके शरीर को दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है इसलिए इस समय भरपूर नींद बहुत जरूरी होती है। नींद की कमी से शरीर में कोर्टिसोल नामक स्‍ट्रेस हार्मोन पैदा होता है जिससे पेट की चर्बी भी बढ़ती है। इसमें तेजी से इंसुलिन सेंसिटिविटी में गिरावट आती है और डाय‍िबिटीज का खतरा बढ़ता है।
​स्‍ट्रेस को रखें दूर

जेस्‍टेशनल डायबिटीज में महिलाओं को अक्‍सर स्‍ट्रेस और एंग्‍जायटी महसूस होती है। खाने-पीने में ज्‍यादा ध्‍यान रखने की वजह से भी महिलाओं को स्‍ट्रेस होता है। स्‍ट्रेस की जवह से शरीर में हार्मोंस का स्‍तर बिगड़ जाता है जिसमें इंसुलिन भी शामिल है।

वहीं प्रेग्‍नेंसी में स्‍ट्रेस लेने से शिशु में लो बर्थ वेट की समस्‍या भी हो सकती है। गर्भावस्‍था के दौरान ही नहीं, बल्कि इससे पहले और बाद में भी तनाव को कंट्रोल करने के लिए अपनी जीवनशैली में योग, मेडिटेशन आदि को अपनाएं। नहाने के पानी में लैवेंडर ऑयल की कुछ बूंदें डालकर भी तनाव से राहत मिल सकती है।

solved 5
wordpress 3 years ago 5 Answer
--------------------------- ---------------------------
+22

Author -> Poster Name

Short info