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पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में चाय पीनी चाहिठया नहीं?
à¤à¤¾à¤°à¤¤ में अधिकतर लोग अपने दिन की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ चाय के कप से ही करते हैं। हालांकि, ये बात तो सामानà¥à¤¯ दिनों की है, लेकिन जब बात गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की हो तो चाय सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है या नहीं, इसकी दà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ हो सकती है। कई महिलाओं के मन में इसे लेकर संशय बना रहता है। यही कारण है कि सà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤²à¤•à¥à¤°à¥‡à¤œ के इस लेख में हम आपको पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में चाय का सेवन करना चाहिठया नहीं, इस बारे में जानकारी दे रहे हैं। साथ ही लेख में आप पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में चाय पीने के फायदे, नà¥à¤•सान और इसकी मातà¥à¤°à¤¾ के बारे में à¤à¥€ जानेंगे। उमà¥à¤®à¥€à¤¦ करते हैं कि लेख को अंत तक पढ़ने के बाद पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में चाय पीने से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ आपकी सà¤à¥€ दà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤à¤‚ दूर हो जाà¤à¤—ी। तो लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।
कà¥à¤¯à¤¾ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में चाय पीना सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है?
अगर सीमित मातà¥à¤°à¤¾ में कà¤à¥€-कà¤à¥€ चाय का सेवन किया जाà¤, तो पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में चाय पीना सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ हो सकता है। इसका उलà¥à¤²à¥‡à¤– चीन में गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं पर किठगठà¤à¤• शोध में मिलता है (1)। साथ ही यह à¤à¥€ बता दें कि चाय में कैटेचिन (Catechins) और फेनोलिक (Phenolic) नामक à¤à¤‚टीऑकà¥à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤‚ट पाठजाते हैं, जो ओवेरियन और à¤à¤‚डोमेटà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤® (गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ की अंदरूनी परत पर होने वाला कैंसर) कैंसर के साथ ही टाइप-2 डायबिटीज के उपचार में मदद कर सकते हैं। हालांकि, चाय में कैफीन मौजूद होता है, जिस वजह से सीमित मातà¥à¤°à¤¾ में इसे लेने की सलाह दी जाती है (2)।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में दिनà¤à¤° में à¤à¤• से दो छोटे कप चाय का सेवन सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ माना जा सकता है (3)। à¤à¤¸à¥‡ में इन अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨à¥‹à¤‚ के आधार पर देखा जाà¤, तो गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला के लिठसीमित मातà¥à¤°à¤¾ में चाय का सेवन करना सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ व फायदेमंद माना जा सकता है। हालांकि हर किसी की गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ अलग-अलग होती है। इसलिठबेहतर होगा कि गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ चाय का सेवन करने से पहले डॉकà¥à¤Ÿà¤° से परामरà¥à¤¶ à¤à¥€ लें।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान कौन-सी चाय सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है?
चाय की विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ वैरायटी होती है, जिनमें से हरà¥à¤¬à¤² चाय पीना पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ माना जा सकता है। à¤à¤¨à¥€à¤¸à¥€à¤¬à¥€à¤†à¤ˆ (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेकà¥à¤¨à¥‹à¤²à¥‰à¤œà¥€ इंफॉरà¥à¤®à¥‡à¤¶à¤¨) की वेबसाइट पर पà¥à¤°à¤•ाशित à¤à¤• शोध के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° रसà¤à¤°à¥€, पेपरमिंट (पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¤¾), अदरक, कैमोमाइल और गà¥à¤°à¥€à¤¨ टी पीना सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ हो सकता है (4)। हालांकि, हरà¥à¤¬à¤² चाय में à¤à¥€ कैफीन होता है, लेकिन इसकी मातà¥à¤°à¤¾ काफी कम होती है। जिस वजह से इसके दà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ होने के जोखिम कम हो सकते हैं (5)। इस आधार पर गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ हरà¥à¤¬à¤² चाय पीना न सिरà¥à¤« सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ माना जा सकता है, बलà¥à¤•ि इसके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ फायदे à¤à¥€ हो सकते हैं, जो हम आगे बता रहे हैं।
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में चाय पीने के फायदे
हम यहां पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में चाय पीने के फायदे कà¥à¤°à¤®à¤µà¤¾à¤° तरीके से बता रहे हैं, जो गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान होने वाली विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं को कम करने में कà¥à¤› हद तक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤•ारी हो सकते हैं। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि इनकी मातà¥à¤°à¤¾ और पीने के समय के बारे में डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह जरूर लें।
1. मॉरà¥à¤¨à¤¿à¤‚ग सिकनेस दूर करे
लगà¤à¤— दो-तिहाई गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाà¤à¤‚ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के पहले चरण में मॉरà¥à¤¨à¤¿à¤‚ग सिकनेस का अनà¥à¤à¤µ करती हैं। इस दौरान उनमें मतली और उलà¥à¤Ÿà¥€ के लकà¥à¤·à¤£ देखे जा सकते हैं। इसके लकà¥à¤·à¤£ दिन के समय में सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होते हैं, जिस वजह से इसे मॉरà¥à¤¨à¤¿à¤‚ग सिकनेस कहा जाता है (6)। वहीं, इस समसà¥à¤¯à¤¾ से राहत पाने के लिठगरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाà¤à¤‚ अदरक से बनी हरà¥à¤¬à¤² चाय का सेवन कर सकती हैं। अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° अदरक में विटामिन बी6 होने के साथ-साथ à¤à¤‚टीà¤à¤®à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• (Antiemetic – मतली रोकने वाला) पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ à¤à¥€ होता है। यही कारण है कि गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में अदरक की चाय पीने से गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाà¤à¤‚ मॉरà¥à¤¨à¤¿à¤‚ग सिकनेस और हाइपरमेसिस गà¥à¤°à¥‡à¤µà¤¿à¤¡à¥‡à¤°à¤® (Hyperemesis gravidarum- पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• उलà¥à¤Ÿà¥€ होना) जैसी समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं से राहत पा सकती हैं (4)। हालांकि, अगर समसà¥à¤¯à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो तो अदरक की चाय पर निरà¥à¤à¤° न करते हà¥à¤ डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ इलाज का विकलà¥à¤ª लें।
2. गरà¥à¤à¤•ालीन मधà¥à¤®à¥‡à¤¹
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ को मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ का जोखिम à¤à¥€ हो सकता है (7)। à¤à¤¸à¥‡ में इसके जोखिम को कम करने के लिठरसà¤à¤°à¥€ उपयोगी हो सकती है। गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में रसà¤à¤°à¥€ की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से बनी हरà¥à¤¬à¤² चाय का सेवन बेहद आम है। लाल रसà¤à¤°à¥€ की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से बनी चाय जेसà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨à¤² डायबिटीज को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ कर सकती है। शोध में इस बात की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ हà¥à¤ˆ है कि रसà¤à¤°à¥€ के सेवन से बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र लेवल नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ हो सकता है। इसके अलावा रसà¤à¤°à¥€ चाय के सेवन से लेबर को उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ किया जा सकता है (4)। ये सà¤à¥€ गà¥à¤£ इस बात की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ करते हैं कि गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान रसà¤à¤°à¥€ चाय पीना लाà¤à¤•ारी हो सकता है।
3. पेट की समसà¥à¤¯à¤¾ में राहत
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में पेट से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾ को कम करने में à¤à¥€ चाय का सेवन उपयोगी हो सकता है। इसके लिठपेपरमिंट या पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¥‡ की चाय का सेवन किया जा सकता है। पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¤¾ पेट फूलने की समसà¥à¤¯à¤¾ कम करने और सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में दूध के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ को बढ़ावा देने में फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके साथ ही इसमें à¤à¤‚टीसà¥à¤ªà¤¾à¤¸à¥à¤®à¥‹à¤¡à¤¿à¤• (Antispasmodic) गà¥à¤£ होता है, जो पेट में à¤à¤‚ठन की परेशानी को कम कर सकता है। वहीं, इसका सीडेटिव (Sedative) गà¥à¤£ शà¥à¤µà¤¸à¤¨ तंतà¥à¤° और मूतà¥à¤° पथ के संकà¥à¤°à¤®à¤£ के उपचार में à¤à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤•ारी हो सकता है (4)। साथ ही पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¤¾ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान मतली और उलà¥à¤Ÿà¥€ की शिकायत को कम करने में à¤à¥€ उपयोगी हो सकता है (8)।
4. गैसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤‡à¤‚टेसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤¨à¤² समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं में चाय पीने के फायदे
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान लगà¤à¤— 40 से 85 फीसदी महिलाओं में गैसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤à¤¸à¥‹à¤«à¥‡à¤—ल रिफà¥à¤²à¤•à¥à¤¸ डिजीज (पेट में बनने वाला à¤à¤¸à¤¿à¤¡ जब à¤à¥‹à¤œà¤¨ नली में आ जाà¤) के लकà¥à¤·à¤£ देखे जा सकते हैं। इसकी समसà¥à¤¯à¤¾ आमतौर पर पहली तिमाही के अंत में शà¥à¤°à¥‚ हो सकती है, जो पूरी गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान बनी रह सकती है (9)। वहीं, इस समसà¥à¤¯à¤¾ से राहत पाने के लिठगरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाà¤à¤‚ कैमोमाइल चाय का सेवन कर सकती हैं। कैमोमाइल चाय का उपयोग करने से गैसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤‡à¤‚टेसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤¨à¤² से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के साथ ही अनिदà¥à¤°à¤¾ और जोड़ों की परेशानी à¤à¥€ दूर हो सकती है। हालांकि, इसका सेवन हर रोज या नियमित तौर पर न करें, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इससे समय पूरà¥à¤µ पà¥à¤°à¤¸à¤µ और गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ का जोखिम à¤à¥€ हो सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में बेहतर है इसके सेवन से पहले à¤à¤• बार डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह à¤à¥€ ली जाठ(4)।
5. उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª की समसà¥à¤¯à¤¾ आम हो सकती है, जो मां और बचà¥à¤šà¥‡ दोनों के लिठजटिलताà¤à¤‚ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ कर सकती है (10)। इससे बचाव करने के लिठमहिलाà¤à¤‚ गà¥à¤°à¥€à¤¨ टी का सेवन कर सकती हैं। दरअसल, गà¥à¤°à¥€à¤¨ टी में पॉलीफेनोलà¥à¤¸ (Polyphenols) होते हैं, जो रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के सà¥à¤¤à¤° को कम करने में à¤à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ हो सकते हैं (11)। इसके अलावा, अनà¥à¤¯ चाय की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में गà¥à¤°à¥€à¤¨ टी में कैटेचिन का सà¥à¤¤à¤° अधिक और कैफीन का सà¥à¤¤à¤° कम होता है (12)। वहीं, लेख में यह पहले ही बता चà¥à¤•े हैं कि गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में कैफीन की कम मातà¥à¤°à¤¾ सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ हो सकती है (3)। इस वजह से गà¥à¤°à¥€à¤¨ टी का सीमित मातà¥à¤°à¤¾ में उपयोग करना गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के लिठसà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ और फायदेमंद दोनों ही माना जा सकता है।
6. फोलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ की पूरà¥à¤¤à¤¿
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में फोलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ जरूरी पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ में से à¤à¤• होता है। यह न सिरà¥à¤« गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान à¤à¥à¤°à¥‚ण के विकास में मदद करता है, बलà¥à¤•ि बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤®à¤œà¤¾à¤¤ दोष (जैसे :- दिमाग और रीॠसे संबंधित विकार) से बचाने में à¤à¥€ मदद कर सकता है (13)। वहीं, इसकी पूरà¥à¤¤à¤¿ करने के लिठगरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाà¤à¤‚ केले की चाय का सेवन कर सकती हैं। दरअसल, केले में फोलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ मौजूद होता है। वहीं, फोलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ चयापचय कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ (Metabolic Functions) को बेहतर बनाने में à¤à¥€ मदद कर सकता है (14)। इस आधार पर कह सकते हैं कि गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में फोलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ की पूरà¥à¤¤à¤¿ के लिठअनà¥à¤¯ फोलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ यà¥à¤•à¥à¤¤ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ के साथ केले की चाय का सेवन à¤à¥€ उपयोगी हो सकता है। हालांकि केले की चाय का सेवन करने से पहले डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह à¤à¥€ जरूर लें।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में कितनी चाय पीनी चाहिà¤?
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान, पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ 200 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® से कम मातà¥à¤°à¤¾ में कैफीन का सेवन किया जा सकता है (15)। वहीं, लेख की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में ही हमने जानकारी दी है कि गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में दिनà¤à¤° में à¤à¤• से दो कप तक चाय का सेवन किया जा सकता है (3)। हालांकि, गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाà¤à¤‚ं अपनी सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ और गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के चरण के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° इस बारे में डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह à¤à¥€ ले सकती हैं।
पà¥à¤°à¥‡à¤—
नेंसी में चाय पीने के नà¥à¤•सान
अगर अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में चाय का सेवन किया जाà¤, तो इसके दà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ à¤à¥€ हो सकते हैं, जिनके बारे में हम नीचे विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से बता रहे हैं।
पहली तिमाही में अदरक की चाय का सेवन करने से दवा के साथ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ का जोखिम हो सकता है। साथ ही यह मà¥à¤‚ह सूखने, निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण (डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨) और दूसरे व तीसरे तिमाही में रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ या सà¥à¤ªà¥‰à¤Ÿà¤¿à¤‚ग का कारण à¤à¥€ बन सकता है (4)।
à¤à¤¸à¥€ महिलाà¤à¤‚ जो गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ का उपयोग करती हैं, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ रसà¤à¤°à¥€ की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से बनी चाय से परहेज करना चाहिà¤, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में हाइपोगà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¸à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ (Hypoglycemia-लो बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र का सà¥à¤¤à¤°) का जोखिम बढ़ा सकता है (4)।
वहीं, अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में कैमोमाइल चाय पीने से समय से पहले बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® होने का जोखिम हो सकता है (4)।
इसके अलावा, अगर गà¥à¤°à¥€à¤¨ टी का अधिक सेवन किया जाà¤, तो इसमें मौजूद कैफीन की मातà¥à¤°à¤¾ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में फोलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ की कमी का कारण बन सकता है, जो जनà¥à¤® दोषों का जोखिम बढ़ा सकता है (16)।
कà¥à¤› लोगों को केले से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है (17)। à¤à¤¸à¥€ गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं को केले से बनी चाय का सेवन करने से परहेज करना चाहिà¤à¥¤
जैसा कि लेख में बता चà¥à¤•े हैं कि चाय में कैफीन की मातà¥à¤°à¤¾ होती है, à¤à¤¸à¥‡ में गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान चाय के रूप में अधिक कैफीन का सेवन करना न सिरà¥à¤« गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ का जोखिम बढ़ा सकता है, बलà¥à¤•ि यह जनà¥à¤® के समय शिशॠके कम वजन का कारण à¤à¥€ बन सकता है (18) (19)।
उमà¥à¤®à¥€à¤¦ करते हैं कि इस लेख के जरिठआपको पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में चाय पीने के फायदे से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ जानकारी विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से मिली होगी। अगर सीमित मातà¥à¤°à¤¾ में चाय का सेवन किया जाठतो ये लाà¤à¤•ारी हो सकती है। हालांकि, इसका धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि अगर गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ किसी दवा का सेवन करती है, तो उसके साथ हरà¥à¤¬à¤² चाय का सेवन करने से पहले डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह जरूर लें। साथ ही अगर पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में चाय पीने के बाद किसी तरह के शारीरिक लकà¥à¤·à¤£ नजर आते हैं, तो जलà¥à¤¦ से जलà¥à¤¦ अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से परामरà¥à¤¶ करें। इस लेख को अनà¥à¤¯ लोगों के साथ शेयर कर हर किसी को गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में चाय पीने से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ जानकारियों से अवगत कराà¤à¤‚।
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