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पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में पानी (à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ) कम होना । Pregnancy Me Pani Kam Hona
IN THIS ARTICLE
à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ में कमी कितना आम है?
शिशॠके विकास में à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ कà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¤¾ है?
गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ होने पर à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ का सामानà¥à¤¯ सà¥à¤¤à¤° कà¥à¤¯à¤¾ होता है? | Pregnancy Me Amniotic Fluid Kitna Hona Chahiye
कम à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ के सामानà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£
कम à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ के कारण
कम à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ के लिठनिदान के तरीके
à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ कम होने के जोखिम कारक
कम à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ आपके बचà¥à¤šà¥‡ को कैसे पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है?
कम à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ की जटिलताà¤à¤‚
कम à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ के लिठउपचार | Amniotic Fluid Badhane Ke Upay
आप à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ को कम होने से कैसे रोक सकते हैं?
हर महिला गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ करते ही सावधानी बरतनी शà¥à¤°à¥‚ कर देती है, ताकि होने वाला शिशॠसà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रहे। गरà¥à¤ में इन नौ महीनों के दौरान à¤à¤• तरल पदारà¥à¤¥ à¤à¥€ शिशॠको सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करता है, जिसे à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ कहते हैं। यह दà¥à¤°à¤µ शिशॠको धकà¥à¤•े व दबाव आदि से होने वाले नà¥à¤•सान से बचाता है। सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ में कहें, तो आपका शिशॠगरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ के अंदर दà¥à¤°à¤µ से à¤à¤°à¥€ हà¥à¤ˆ थैली (जिसे à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• सैक कहा जाता है) में सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रहता है। कà¥à¤› मामलों में à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ कम हो जाता है, जिसे मेडिकल à¤à¤¾à¤·à¤¾ में ओलिगोहाइडà¥à¤°à¥‡à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤¸ (Oligohydramnios) कहा जाता है। मॉमजंकà¥à¤¶à¤¨ के इस लेख में हम ओलिगोहाइडà¥à¤°à¥‡à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤¸ के बारे में विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से चरà¥à¤šà¤¾ करेंगे।
सबसे पहले जानते हैं कि ओलिगोहाइडà¥à¤°à¥‡à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤¸ की समसà¥à¤¯à¤¾ होना कितना आम हैं।
à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ में कमी कितना आम है?
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में ओलिगोहाइडà¥à¤°à¥‡à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤¸ की समसà¥à¤¯à¤¾ होना आम है (1)। खासतौर से गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की आखिरी तिमाही में à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ की कमी होने की आशंका जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बढ़ जाती है। अगर डिलीवरी में दो सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ का समय बचा है, तो à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ कम होने की आशंका जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बढ़ जाती है।
आइà¤, अब जानते हैं कि शिशॠके लिठà¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ कितना जरूरी है।
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शिशॠके विकास में à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ कà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¤¾ है?
यकीनन, गरà¥à¤ में शिशॠके विकास के लिठà¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ की खास à¤à¥‚मिका होती है। इस बारे में हम नीचे विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से बता रहे हैं (2) (3) :
जब शिशॠà¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• तरल पदारà¥à¤¥ में से घूमता है, तो यह उसकी हडà¥à¤¡à¥€ और मांसपेशियों के विकास में मदद करता है।
शिशॠके सांस लेने पर यह तरल उसके अंदर जाता है, जो उसके फेफड़ों के विकास में मदद करता है।
शिशॠके तरल पदारà¥à¤¥ गà¥à¤°à¤¹à¤£ करने और बाद में इसे निकालने से उसके पाचन तंतà¥à¤° का विकास होता है।
à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• तरल गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² को सिकà¥à¤¡à¤¼à¤¨à¥‡ से बचाता है। इससे शिशॠमां के शरीर से पोषक ततà¥à¤µ आसानी से गà¥à¤°à¤¹à¤£ कर पाता है।
à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• तरल à¤à¤• लà¥à¤¯à¥‚बà¥à¤°à¤¿à¤•ेंट की तरह à¤à¥€ काम करता है, जो शरीर के नाजà¥à¤• अंगों के विकास में मदद करता है।
लेख के अगले à¤à¤¾à¤— में इस दà¥à¤°à¤µ की मातà¥à¤°à¤¾ के बारे में बताया गया है।
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गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ होने पर à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ का सामानà¥à¤¯ सà¥à¤¤à¤° कà¥à¤¯à¤¾ होता है? | Pregnancy Me Amniotic Fluid Kitna Hona Chahiye
à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ की समय-समय पर जांच करना जरूरी है, ताकि उसकी मातà¥à¤°à¤¾ का पता लगाया जा सके। à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ की जांच à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• फà¥à¤²à¥‚ड इंडेकà¥à¤¸ के जरिठकी जाती है और इसे सेंटीमीटर में मापा जाता है। आपको बता दें कि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ बनना शà¥à¤°à¥‚ होता है और 14वें से 21वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तक यह सामानà¥à¤¯ होता है (4)। पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के अंतिम समय में यह कम हो सकता है। नीचे à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• फà¥à¤²à¥‚इड इंडेकà¥à¤¸ (AFI) के जरिठइसकी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के बारे में जानें।
सामानà¥à¤¯ सà¥à¤¤à¤° : इसमें à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ का सà¥à¤¤à¤° 5 से 25 सेंटीमीटर या 800 से à¤à¤• हजार मि.ली. तक होता है (5) (6) (7)।
ओलिगोहाइडà¥à¤°à¥‡à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤¸ : यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ तब आती है, जब à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ का सà¥à¤¤à¤° 5-6 सेंटीमीटर से कम हो। हालांकि, इसके सटीक नंबर में शिशॠकी उमà¥à¤° के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° अंतर आ सकता है (8)।
पॉलीहाइडà¥à¤°à¤¾à¤®à¥à¤¨à¤¿à¤“स : यह वो सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है, जब à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ का सà¥à¤¤à¤° 25 सेंटीमीटर से ऊपर चला जाता है। यह मां और बचà¥à¤šà¥‡ के लिठजोखिम à¤à¤°à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ हो सकती है (9)।
आपको बता दें कि गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के 36वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के बाद यह दà¥à¤°à¤µ धीरे-धीरे कम होने लगता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि पà¥à¤°à¤¸à¤µ का समय इस सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तक नजदीक आ जाता है। इस दौरान तरल का सà¥à¤¤à¤° 600 मिली तक पहà¥à¤‚च सकता है, जो सामानà¥à¤¯ है (7)।
आइà¤, अब जानते हैं कि à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ का सà¥à¤¤à¤° कम होने पर कà¥à¤¯à¤¾ लकà¥à¤·à¤£ नजर आते हैं।
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कम à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ के सामानà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£
इसके लकà¥à¤·à¤£ हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं। नीचे हम कà¥à¤› सामानà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ बता रहे हैं, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान कम à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ होने पर महसूस कर सकते हैं, जैसे :
गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ के विकास में कमी आना।
पेट की परेशानी होना।
à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ का रिसाव होना।
à¤à¥à¤°à¥‚ण की हलचल कम हो जाना।
गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ संकà¥à¤šà¤¨ होना।
लकà¥à¤·à¤£ जानने के बाद, अब हम कम à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ के कारणों के बारे में बात करेंगे।
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कम à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ के कारण
à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ का टूटना या रिसाव होना : अगर à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ जरा-सी à¤à¥€ कहीं से टूट जाà¤, तो दà¥à¤°à¤µ का रिसाव होने लगता है। यह जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¸à¤µ निकट होने के समय होता है। यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ मां और बचà¥à¤šà¥‡ में संकà¥à¤°à¤®à¤£ के खतरे को बढ़ा सकती है। बहà¥à¤¤ कम मामलों में ही टूटी हà¥à¤ˆ à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ खà¥à¤¦ से ठीक हो पाती है (10)।
पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा की समसà¥à¤¯à¤¾ : अगर पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा (अपरा) में रकà¥à¤¤ और पोषक ततà¥à¤µ आदि की आपूरà¥à¤¤à¤¿ करने में समसà¥à¤¯à¤¾ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होती है, तो à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ की कमी हो सकती है। इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा (अपरा) बचà¥à¤šà¥‡ के मूतà¥à¤° और अपशिषà¥à¤Ÿà¥‹à¤‚ को निकालने में असमरà¥à¤¥ होता है। अगर डॉकà¥à¤Ÿà¤° को पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा में कोई समसà¥à¤¯à¤¾ नजर आती है, तो गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला और होने वाल शिशॠके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ पर नजर रखी जाà¤à¤—ी। साथ ही à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ के सà¥à¤¤à¤° की जांच के लिठनियमित सà¥à¤•ैन किया जाà¤à¤—ा (11)।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान होने वाली अनà¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ : अगर गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला को डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ (निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण), गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤§à¤¿ मधà¥à¤®à¥‡à¤¹, पà¥à¤°à¥€-à¤à¤•à¥à¤²à¥‡à¤®à¤¸à¤¿à¤¯à¤¾ या कà¥à¤°à¥‹à¤¨à¤¿à¤• हाइपोकà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤¾ की समसà¥à¤¯à¤¾ है, तो à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ में कमी आ सकती है (12)।
गरà¥à¤ में à¤à¤• से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ शिशॠहोना : अगर गरà¥à¤ में à¤à¤• से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ शिशॠहैं, तो à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ कम होने का जोखिम बढ़ जाता है।
à¤à¥à¤°à¥‚ण असामानà¥à¤¯ : अगर गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की पहली और दूसरी तिमाही में दà¥à¤°à¤µ कम होने की समसà¥à¤¯à¤¾ होती है, तो शिशॠको किडनी या यूरिन की समसà¥à¤¯à¤¾ होने का अंदेशा हो सकता है।
कà¥à¤› दवाओं की वजह से : आइबà¥à¤°à¥‚फेन या उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª की दवाओं से à¤à¥€ à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ में कमी आ सकती है। हालांकि, गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में डॉकà¥à¤Ÿà¤° इन दवाओं के सेवन के लिठमना करते हैं (13)।
डिलीवरी की नियत तिथि निकल जाना : अगर डिलीवरी की तय तिथि à¤à¤• या दो सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ आगे निकल गई है, तो à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ कम होने लगता है। लगà¤à¤— 100 में से 12 गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤“ं में यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ देखने को मिल सकती है (14)।
अब जानते हैं कि ओलिगोहाइडà¥à¤°à¥‡à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤¸ का निदान यानी जांच कैसे की जाती है।
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कम à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ के लिठनिदान के तरीके
चूंकि, गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ होना बहà¥à¤¤ जरूरी है। इसके कम होने से कई तरह की समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हो सकती हैं। यही कारण है कि इसके लकà¥à¤·à¤£ दिखाई देने पर जरूरी जांच करनी चाहिà¤à¥¤ ओलिगोहाइडà¥à¤°à¥‡à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤¸ के निदान के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° नीचे बताई गई जांच कर सकते हैं, जैसे :
अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड : इस सà¥à¤•ैन में शिशॠके मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯ और किडनी की जांच की जाती है। इसके अलावा, डॉकà¥à¤Ÿà¤° डॉपà¥à¤²à¤° अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड à¤à¥€ कर सकता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह असामानà¥à¤¯ पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा को पहचाने में मदद कर सकता है (15)।
à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• फà¥à¤²à¥‚ड इंडेकà¥à¤¸ (à¤à¤à¤«à¤†à¤ˆ) टेसà¥à¤Ÿ : à¤à¤à¤«à¤†à¤ˆ टेसà¥à¤Ÿ से à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ की मातà¥à¤°à¤¾ मापी जाती है। इस टेसà¥à¤Ÿ को करने के लिठअलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¥‹à¤¨à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ की जाती है, जो पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ मापने का सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ तरीका है (16)। इस टेसà¥à¤Ÿ के दौरान गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ को पीठके बल लेटना होगा और डॉकà¥à¤Ÿà¤° उसके पेट पर अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड टà¥à¤°à¤¾à¤‚सडà¥à¤¯à¥‚सर से जांच करेंगे। चूंकि, यह जांच करना आसान नहीं होता, इसलिठअनà¥à¤à¤µà¥€ डॉकà¥à¤Ÿà¤° से ही इसे करवाना चाहिà¤à¥¤ अगर जांच के दौरान पेट पर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दबाव पड़ता है, तो यह जांच ठीक से नहीं हो पाती और दà¥à¤°à¤µ का सà¥à¤¤à¤° ठीक से पता नहीं चल पाता।
सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¤¾à¤‡à¤² सà¥à¤ªà¥‡à¤•à¥à¤¯à¥à¤²à¤® जांच : जैसा कि हमने बताया à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• सैक फटने के कारण à¤à¥€ दà¥à¤°à¤µ निकल सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में डॉकà¥à¤Ÿà¤° सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¤¾à¤‡à¤² सà¥à¤ªà¥‡à¤•à¥à¤¯à¥à¤²à¤® जांच कर सकते हैं (17)।
मैकà¥à¤¸à¤¿à¤®à¤® वरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल पॉकेट : इस टेसà¥à¤Ÿ में अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड की मदद से गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ की गहराई तक à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ के सà¥à¤¤à¤° की जांच की जाती है।
रकà¥à¤¤ जांच : à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ की जांच के लिठरकà¥à¤¤ जांच का à¤à¥€ सहारा लिया जा सकता है। इसमें मेटरनल सीरम सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤¿à¤‚ग की जाती है, जिसमें कम à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ के सà¥à¤¤à¤° का पता लगाया जाता है। इस टेसà¥à¤Ÿ से यह à¤à¥€ जाना जाता है कि कहीं शिशॠको किडनी या अनà¥à¤¯ जनà¥à¤®à¤œà¤¾à¤¤ दोष विकृति तो नहीं हैं (18)।
जांच के बाद आइठजानते हैं इसके जोखिम कारक।
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à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ कम होने के जोखिम कारक
कà¥à¤› गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं को à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ की मातà¥à¤°à¤¾ कम होने का जोखिम जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ रहता है, तो कà¥à¤› को कम। नीचे हम बता रहे हैं कि किनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ कम होने का जोखिम जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ रहता है :
जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª की समसà¥à¤¯à¤¾ हो।
जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ हो।
जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा संबंधी कोई समसà¥à¤¯à¤¾ हो।
मोटापे के कारण।
लà¥à¤¯à¥‚पस (शरीर में इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® को कमजोर बनाने वाली बीमारी)।
नोट: अगर कोई महिला गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान इन समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं से जूठरही हैं, तो उसे समय-समय पर जांच करवाते रहना चाहिà¤à¥¤
à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ के संबंध में और जानकारी के लिठयह लेख अंत तक जरूर पढ़ें।
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कम à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ आपके बचà¥à¤šà¥‡ को कैसे पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है?
अगर गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की पहली और दूसरी तिमाही में जांच के दौरान à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ की मातà¥à¤°à¤¾ का सà¥à¤¤à¤° कम आता है, तो यह चिंता का विषय बन सकता है। वहीं, तीसरी तिमाही में इस समसà¥à¤¯à¤¾ को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करना आसान होता है। à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ कम होने से बचà¥à¤šà¥‡ पर कà¥à¤› नकारातà¥à¤®à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ सकते हैं, जिनके बारे में हम नीचे बताने जा रहे हैं :
à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ की कमी होने से शिशॠके फेफड़े विकसित होने में परेशानी होती है।
पहली तिमाही और दूसरी तिमाही की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ कम होने पर गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ का खतरा बढ़ सकता है (19)।
अगर यह समसà¥à¤¯à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बढ़ जाती है (24वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ से पहले), तो मृत शिशॠके जनà¥à¤® का खतरा बढ़ सकता है।
इस समसà¥à¤¯à¤¾ के कारण 37वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ से पहले यानी समय पूरà¥à¤µ जनà¥à¤® होने की आशंका बढ़ सकती है।
अगर तीसरी तिमाही में à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ कम होने का पता चलता है, तो हो सकता है डिलीवरी के दौरान गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² कà¥à¤› सà¥à¤•ड़ी हà¥à¤ˆ हो। इसके अलावा, इस अवसà¥à¤¥à¤¾ में सिजेरियन डिलीवरी की आशंका à¤à¥€ बढ़ जाती है।
लेख के अगले à¤à¤¾à¤— में बताया गया है कि इस दà¥à¤°à¤µ के कम होने से कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ जोखिम हो सकते हैं।
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कम à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ की जटिलताà¤à¤‚
अगर गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ का सà¥à¤¤à¤° कम होता है, तो इससे नीचे बताई गई जटिलताà¤à¤‚ हो सकती हैं। ये जटिलताà¤à¤‚ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के लिठजोखिम पैदा कर सकती हैं और बचà¥à¤šà¥‡ को पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•ूल रूप से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकती है।
à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• बैंड सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® : इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में à¤à¥à¤°à¥‚ण के चारों ओर à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• बैंड उलठजाते हैं।
पलà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤°à¥€ हाइपरपà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤¿à¤¯à¤¾ : इसमें शिशॠके फेफड़े ठीक से विकसित नहीं हो पाते।
à¤à¥à¤°à¥‚ण को संकà¥à¤°à¤®à¤£ : इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में शिशॠको संकà¥à¤°à¤®à¤£ हो सकता है।
फीटल कंपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® : à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ का सà¥à¤¤à¤° कम होने से यह जटिलता à¤à¥€ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो सकती है।
आइà¤, अब जानते हैं कि इनका उपचार कैसे किया जा सकता है।
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कम à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ के लिठउपचार | Amniotic Fluid Badhane Ke Upay
à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤«à¥à¤¯à¥‚जन : इस उपचार में डॉकà¥à¤Ÿà¤° कमरे के तापमान पर à¤à¤• इंटà¥à¤°à¤¾à¤¯à¥‚टरिन कैथेटर के माधà¥à¤¯à¤® से à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• थैली में बाहरी सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ से सलाईन (saline) देकर दà¥à¤°à¤µ की मातà¥à¤°à¤¾ बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करते हैं।
वेसिको-à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• शंट : अगर à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ में कमी बचà¥à¤šà¥‡ के पेशाब न करने के कारण आ रही है, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° वेसिको-à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• शंट की मदद से उसे बाहर निकालते हैं। आपको बता दें कि वेसिको-à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• शंट à¤à¤• तरह की टà¥à¤¯à¥‚ब होती है, जो अतिरिकà¥à¤¤ तरल निकालने के लिठगरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ के पेट से होते हà¥à¤ शिशॠके मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯ में डाली जाती है (20)।
हाइडà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ रहें : डॉकà¥à¤Ÿà¤° गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ को पूरी तरह से हाइडà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ रहने की सलाह देते हैं, ताकि शरीर में पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक रूप से à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ बने।
आराम करें : अगर ओलिगोहाइडà¥à¤°à¥‡à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤¸ की समसà¥à¤¯à¤¾ हलà¥à¤•ी-सी है, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° दोपहर को आराम करने की सलाह देते हैं। हाइडà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ रहकर और परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ आराम करके इंटà¥à¤°à¤¾à¤µà¥ˆà¤¸à¥à¤•à¥à¤²à¤° सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
आइà¤, अब जानते हैं कि ओलिगोहाइडà¥à¤°à¥‡à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤¸ को कैसे रोका जा सकता है।
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आप à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ को कम होने से कैसे रोक सकते हैं?
हालांकि, इस समसà¥à¤¯à¤¾ को रोका नहीं जा सकता। यह किसी à¤à¥€ गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला को हो सकती है, लेकिन कà¥à¤› सावधानियां बरतकर इसके खतरे को कà¥à¤› हद तक कम किया जा सकता है। नीचे हम बताà¤à¤‚गे कि कैसे इस समसà¥à¤¯à¤¾ के होने की आशंका को कम किया जा सकता है।
इस समसà¥à¤¯à¤¾ से बचने के लिठजरूरी है आपका सही खानपान। हमेशा पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• खाना खाà¤à¤‚ और डॉकà¥à¤Ÿà¤° के कहे अनà¥à¤¸à¤¾à¤° अपने काम करें।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बिना पूछे खà¥à¤¦ से कोई दवा न लें।
नियमित रूप से योग करें। आप गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के लिठविशेष योग ककà¥à¤·à¤¾à¤“ं में à¤à¥€ जा सकती हैं। साथ ही नियमित रूप से सैर करना फायदेमंद होगा।
आप धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ बिलà¥à¤•à¥à¤² न करें। इससे आपके और शिशॠके फेफड़ों पर बà¥à¤°à¤¾ असर पड़ता है।
पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• समयांतराल पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° से अपनी जांच कराते रहें, ताकि अगर कोई समसà¥à¤¯à¤¾ शà¥à¤°à¥‚ हो रही हो, तो उसका निदान शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में ही हो जाठऔर उचित इलाज मिल जाà¤à¥¤
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गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ शिशॠका सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ कवच होता है, इसलिठइसके सà¥à¤¤à¤° का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना जरूरी है। कà¥à¤› सावधानियों को बरतते हà¥à¤ इस समसà¥à¤¯à¤¾ से बचा जा सकता है। वहीं, अगर कोई गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ इस समसà¥à¤¯à¤¾ से गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ है, तो उसे उचित इलाज करवाना चाहिà¤à¥¤ हम उमà¥à¤®à¥€à¤¦ करते हैं कि आपको ओलिगोहाइडà¥à¤°à¥‡à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤¸ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ सà¤à¥€ जानकारियां इस लेख में मिल गई होंगी। आप इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल को अपनी सहेलियों के साथ à¤à¥€ शेयर कर सकती हैं, ताकि उनकी गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ à¤à¥€ सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ और सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रहे।
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