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पà¥à¤°à¤¸à¤µ का अरà¥à¤¥ होता है जनन या बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® देना। गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ काल पूरा होने पर बचà¥à¤šà¥‡ का जनà¥à¤® बिना किसी अवरोध (रूकावट) के ही होना साधारण और सरल जनà¥à¤® कहलाता है।
बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ से देखने पर यह महसूस होता है कि बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® लेने की विधि को हम तीन à¤à¤¾à¤—ों में बांट सकते हैं। पà¥à¤°à¤¥à¤® à¤à¤¾à¤— में बचà¥à¤šà¥‡à¤¦à¤¾à¤¨à¥€ का मà¥à¤‚ह खà¥à¤²à¤¨à¤¾ और फैलना, दूसरे à¤à¤¾à¤— में बचà¥à¤šà¥‡ में सिर का दिखाई पड़ना और तीसरा à¤à¤¾à¤— जिसमें औवल बाहर आता है। पà¥à¤°à¤¥à¤® à¤à¤¾à¤— बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® का पà¥à¤°à¤¥à¤® चरण लगà¤à¤— 10 से 12 घंटे या अधिक समय का होता है। पà¥à¤°à¤¥à¤® चरण का समय इस बात पर निरà¥à¤à¤° करता है कि महिला का कौन सा बचà¥à¤šà¤¾ है। पहले बचà¥à¤šà¥‡ में यह चरण अधिक समय लेता है। दूसरे बचà¥à¤šà¥‡ में कम तथा तीसरे बचà¥à¤šà¥‡ में और कम समय लगता है। पà¥à¤°à¤¥à¤® चरण में योनि की दीवारों का पतला होना, फैलना, खिंचना और धीरे-धीरे करके बचà¥à¤šà¥‡ के सिर का खिसकना होता है। योनि का फैला और खिंचा हà¥à¤† à¤à¤¾à¤— धीरे-धीरे बचà¥à¤šà¥‡à¤¦à¤¾à¤¨à¥€ के मà¥à¤‚ह को आगे आने में मदद करता है। इस चरण के साथ ही à¤à¤• चिकना पदारà¥à¤¥ à¤à¥€ निकलता है जो कि à¤à¤• à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ के समान होता है जिसको शो कहते हैं। कà¤à¥€-कà¤à¥€ सà¥à¤•à¥à¤šà¤¨ जे साथ-साथ à¤à¤®à¤¨à¥€à¤“टिक सैक फट जाता है तथा à¤à¤®à¤¨à¥€à¤“टिक दà¥à¤°à¤µ निकलने लगता है। दूसरा à¤à¤¾à¤— बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के दूसरे चरण में बचà¥à¤šà¥‡à¤¦à¤¾à¤¨à¥€ का दबाव पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• दो-दो मिनट बाद होता है तथा आधे या à¤à¤• मिनट तक रहता है। इस दबाव के कारण बचà¥à¤šà¤¾ धीरे-धीरे नीचे ढकेला जाता है। इस चरण में बचà¥à¤šà¥‡ का सिर देखा जा सकता है। इसके बाद योनि धीरे-धीरे सिमटते हà¥à¤ परतों के रूप में à¤à¤• परत दूसरे के ऊपर चढ़ती रहती है। साधारणतया बचà¥à¤šà¥‡ का सिर ऊपर की ओर तथा उसका धड़ नीचे की ओर होता है।
कà¤à¥€-कà¤à¥€ दरà¥à¤¦ के साथ बचà¥à¤šà¥‡ को निकालने के लिठपेट से à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‡ को हलà¥à¤•े हाथों से दबाया जाता है। इस चरण में महिला को लमà¥à¤¬à¥€ सांस का वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® लाà¤à¤•ारी होता है। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि सांस को रोककर ही महिला का जोर लगाना पड़ता है। कई बार बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को निकालने के लिठऔजारों का à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किया जाता है। बचà¥à¤šà¥‡ का जनà¥à¤® होते समय जब बचà¥à¤šà¤¾ बाहर आता है मां को à¤à¤¸à¤¾ महसूस होता है कि जैसे कि उनके शरीर से मल बाहर आ रहा हो। पà¥à¤°à¤¸à¤µ के समय सबसे पहले बचà¥à¤šà¥‡ का सिर बहर आता है। फिर à¤à¤• कंधा, दूसरा कंधा तथा बाद में पूरा धड़ बाहर निकल आता है इस पà¥à¤°à¤•ार के बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® लेते ही दूसरा चरण पूरा हो जाता है।
गाय के बचà¥à¤šà¥‡ के पà¥à¤°à¤¸à¤µ के अनेक चरण
अनà¥à¤•à¥à¤°à¤®
1 पà¥à¤°à¤¸à¤µà¥‹à¤ªà¤°à¤¾à¤¨à¥à¤¤
2 बचà¥à¤šà¤¾
3 इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ देखें
4 बाहरी कड़ियाà¤
पà¥à¤°à¤¸à¤µà¥‹à¤ªà¤°à¤¾à¤¨à¥à¤¤
बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® लेने के बाद सरà¥à¤µà¤ªà¥à¤°à¤¥à¤® बचà¥à¤šà¥‡ के मà¥à¤‚ह और नाक को साफ किया जाता है कà¤à¥€-कà¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‡ के मà¥à¤‚ह और सांस की नलिका से चिकने पदारà¥à¤¥ व अनà¥à¤¯ दà¥à¤°à¤µà¥‹à¤‚ को साफ करने के लिठमशीन का उपयोग किया जाता है। इसके बाद बचà¥à¤šà¥‡ को अचà¥à¤›à¥€ तरह से साफ कपड़े में लपेट लेते हैं जिससे बचà¥à¤šà¥‡ के शरीर का तापमान बना रहे। जनà¥à¤® ने बाद बचà¥à¤šà¥‡ के आंखों की सफाई à¤à¥€ आवशà¥à¤¯à¤• होती है। बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® लेने के बाद बचà¥à¤šà¥‡ के सांस लेने की कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾, दिल की धड़कन, तà¥à¤µà¤šà¤¾ का रंग, हाथ पैरों का हिलना व छूने पर बचà¥à¤šà¥‡ का सà¥à¤µà¤à¤¾à¤µ देखा जाता है। इसको à¤à¤ªà¤—र कहते हैं। यदि बचà¥à¤šà¥‡ की कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ सामानà¥à¤¯ होती है तो बचà¥à¤šà¥‡ के हाथ-पैर, कान, मल-मूतà¥à¤°à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤° तथा बचà¥à¤šà¥‡ की पीठको देखने के बाद बचà¥à¤šà¥‡ के पेट की सफाई आदि की जाती है तथा à¤à¥‹à¤œà¤¨ की नलिका के अवरोध को देखा जाता है।
बचà¥à¤šà¤¾
बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® का तीसरा चरण बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® होने से औवल को बाहर आने को तीसरा चरण कहते हैं। बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® होने के बाद बचà¥à¤šà¤¾ à¤à¤• नाड़ (कोरà¥à¤¡) से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ होता है जिसको नाड़ कहते हैं। यह सफेद, मटमैला और रसà¥à¤¸à¥€ के समान आकृति का होता है। इसके बचà¥à¤šà¥‡ की धड़कन महसूस की जा सकती है। यह बचà¥à¤šà¥‡ को रकà¥à¤¤ और आकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ परà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤ª मातà¥à¤°à¤¾ में पहà¥à¤‚चाया रहता है। दूसरी तरफ यह नाड़ ओवल से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ रहता है जो मां के बचà¥à¤šà¥‡à¤¦à¤¾à¤¨à¥€ की दीवार से चिपका रहता है जब बचà¥à¤šà¤¾ ठीक तरफ से रोने लगता है और उसका रंग गà¥à¤²à¤¾à¤¬à¥€ रंग का हो जाठतो इसका अरà¥à¤¥ यह होता है कि बचà¥à¤šà¥‡ का दिल और फेफड़े कारà¥à¤¯ करने लगे हैं इसी अवसà¥à¤¥à¤¾ में नाड़ को बचà¥à¤šà¥‡ की नाà¤à¤¿ से लगà¤à¤— 8 से 10 सेमी की दूरी पर कà¥à¤²à¥ˆà¤®à¥à¤ª लगाकर काटा जाता है।
नाड़ को काटकर यह देखें कि यह जमीन या किसी अनà¥à¤¯ चीज से छू न जाठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह शीघà¥à¤° ही रोग को पकड़ लेता है और उससे बचà¥à¤šà¥‡ को रोग हो सकता है। इसीलिठइसे काटने के बाद बचà¥à¤šà¥‡ के पेट पर डाल देना ही उचित होता है बचà¥à¤šà¥‡ की कटी नाड़ पर कोई दवा à¤à¥€ लगाई जा सकती है। बचà¥à¤šà¥‡ की कटी हà¥à¤ˆ नाड़ 24 घंटे के अंदर धीरे-धीरे करके सूख जाती है। लगà¤à¤— 7 से 10 दिन में यह सूखकर शरीर से अलग हो जाती है तथा इसके सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर à¤à¤• बटन के आकार का दाग शरीर पर रह जाता है जिसको नाà¤à¤¿ कहते हैं। जब तक यह शरीर पर रहता है इसकी देखरेख आवशà¥à¤¯à¤• होती है। इसे पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ दिन में दो बार डाकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ रूई से सà¥à¤ªà¥à¤°à¤¿à¤Ÿ के सहायता से साफ करना तथा कीटाणà¥à¤¨à¤¾à¤¶à¤• दवा का उपयोग करना चाहिà¤à¥¤
à¤à¤®à¤¨à¥€à¤“टिक à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ के फाड़ने के बाद यह नाड़ (à¤à¤®à¤²à¤¾à¤‡à¤•ल कोरà¥à¤¡) बचà¥à¤šà¤¾ पैदा होने से पहले कई बार बाहर निकल जाती है। यह अवसà¥à¤¥à¤¾ यह अवगत कराती है कि बचà¥à¤šà¤¾ अपने समय के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° छोटा, शारीरिक तà¥à¤°à¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, गरà¥à¤ में बचà¥à¤šà¥‡ की आसामानà¥à¤¯ अवसà¥à¤¥à¤¾ या गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ में à¤à¤®à¤¨à¥€à¤“टिक दà¥à¤°à¤µ का अधिक मातà¥à¤°à¤¾ होना पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारण होता है। à¤à¤— से नाड़ के बाहर आने पर नाड़ में रकà¥à¤¤ का बहाव कम होने लगता है बचà¥à¤šà¥‡ के सिर का दबाव तथा मां के कूलà¥à¤¹à¥‡ की बीच की हडिडà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के बीच नाड़ पर लगातार दबाव पड़ने के कारण कई बार रकà¥à¤¤ का संचार बिलà¥à¤•à¥à¤² ही बंद हो जाता है। इस अवसà¥à¤¥à¤¾ में बचà¥à¤šà¥‡ का तापमान व रकà¥à¤¤ कम होने के कारण बचà¥à¤šà¤¾ गरà¥à¤ में ही मर जाता है। इसी कारण इस अवसà¥à¤¥à¤¾ में पà¥à¤°à¤¸à¤µ का शीघà¥à¤° करना या आपरेशन के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤¸à¤µ कराना लाà¤à¤¦à¤¾à¤¯à¤• होता है।
कई बार नाड़ की इस पà¥à¤°à¤•ार की अवसà¥à¤¥à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤®à¥à¤ में मालूम नहीं हो पाती है। इस अवसà¥à¤¥à¤¾ को मालूम करने के लिठà¤à¤— दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ जांच करनी पड़ती है। इस दशा में पà¥à¤°à¤¸à¤µ शीघà¥à¤° नहीं हो पाता है तथा बचà¥à¤šà¥‡ के दिल की धड़कनें कम होने लगती है। इस कारण यह आवशà¥à¤¯à¤• है कि जैसे ही à¤à¤®à¤¨à¥à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ फटती है। उस समय सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ की जांच à¤à¤‚ग दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ शीघà¥à¤° होनी चाहिà¤à¥¤ à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ जिनमें बचà¥à¤šà¥‡ का सिर कूलà¥à¤¹à¥‡ पर आकर न टिका हो उनमें नाड़ का बाहर आने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨ à¤à¥€ अधिक होती है और कà¥à¤› समय बाद यह सà¥à¤µà¤¯à¤‚ सूखकर गिर जाती है तथा बचà¥à¤šà¥‡ की नाà¤à¤¿ का निशान जीवनपरà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ के लिठरह जाता है।
बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के समय जैसे ही बचà¥à¤šà¥‡ का सिर बाहर आता है तो इस बात को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना चाहिठकि बचà¥à¤šà¥‡ के चेहरे पर चिकनाईयà¥à¤•à¥à¤¤ दà¥à¤°à¤µ कितना लगा है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यही चिकनाईयà¥à¤•à¥à¤¤ दà¥à¤°à¤µ बचà¥à¤šà¥‡ को सांस लेने में कठिनाई डाल सकता है। इसी कारण à¤à¤• साफ कपड़े के टà¥à¤•ड़े दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बचà¥à¤šà¥‡ का चेहरा, नाक और मà¥à¤‚ह को अचà¥à¤›à¥€ पà¥à¤°à¤•ार से साफ करना चाहिà¤à¥¤ बचà¥à¤šà¥‡ के पैदा होते ही बचà¥à¤šà¥‡ को उलà¥à¤Ÿà¤¾ लटकाया जा सकता है। जिसके कारण फेफड़े आदि में गया हà¥à¤† चिकना दà¥à¤°à¤µ मà¥à¤‚ह में लौटकर आ जाठऔर मà¥à¤‚ह का दà¥à¤°à¤µ फेफड़ों में न जा पाये। इस कारण इसको सकà¥à¤¶à¤¨ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सावधानी से निकाला जा सकता है।
थोड़ी सी मातà¥à¤°à¤¾ में चिकनाईयà¥à¤•à¥à¤¤ दà¥à¤°à¤µ फेफड़ों में जा सकता है। परनà¥à¤¤à¥ अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में दà¥à¤°à¤µ फेफड़ो में जाने से बचà¥à¤šà¥‡ का रोना ठीक नहीं होता है। à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ मà¥à¤°à¥‡à¤‚ फेफड़े में नली डालकर इसे निकालना पड़ता है तथा बचà¥à¤šà¥‡ को दवाइयां à¤à¥€ शà¥à¤°à¥‚ करनी पड़ती है। पहले बचà¥à¤šà¥‡ के फेफड़े गà¥à¤¬à¥à¤¬à¤¾à¤°à¥‡ की à¤à¤¾à¤‚ति बिना हवा के होते हैं। परनà¥à¤¤à¥ पहली बार सांस लेते ही फेफड़े हवा से à¤à¤° जाते हैं। उसमें से रकà¥à¤¤ आने लगता है तथा आकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨à¤¯à¥à¤•à¥à¤¤ रकà¥à¤¤ फेफड़े से बचà¥à¤šà¥‡ के हृदय की ओर पहà¥à¤‚च जाता है। इस अवसà¥à¤¥à¤¾ में बचà¥à¤šà¥‡ का हृदय शीघà¥à¤° ही कारà¥à¤¯ करने लगता है। इसी बीच बचà¥à¤šà¥‡ का संबनà¥à¤§ औवल से अलग हो जाता है।
बचà¥à¤šà¥‡à¤¦à¤¾à¤¨à¥€ में कà¥à¤› दरà¥à¤¦ के साथ औवल à¤à¥€ धीरे-धीरे बचà¥à¤šà¥‡à¤¦à¤¾à¤¨à¥€ की दीवारों की पकड़ को छोड़ने लगती है तथा धीरे-धीरे करके पूरा औवल अलग होकर इसी दà¥à¤µà¤¾à¤° से बाहर आ जाती है। कà¤à¥€-कà¤à¥€ औवल को आने में 10 मिनट से लेकर आधे घंटे का समय लग सकता है à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में मां के पेट की हलà¥à¤•ी मालिश à¤à¥€ करनी पड़ सकती है। यदि इसके बाद à¤à¥€ औवल बाहर नहीं आता है तो उसे रिटैनडॠऔवल कहते हैं। औवल के बाहर आते ही औवल को अचà¥à¤›à¥€ पà¥à¤°à¤•ार से देखना चहिà¤à¥¤ यदि औवल का à¤à¤• à¤à¥€ टà¥à¤•ड़ा नहीं आ पाया तो फिर बचà¥à¤šà¥‡à¤¦à¤¾à¤¨à¥€ पूरी तरफ से सिकà¥à¤¡à¤¼ नहीं पाती तथा रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ होता रहता है।
बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® लेते ही बचà¥à¤šà¤¾ कà¥à¤› नीले रंग का हो जाता है। परनà¥à¤¤à¥ बचà¥à¤šà¥‡ के रोने से अकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ और रकà¥à¤¤ बचà¥à¤šà¥‡ के शरीर में संचरित होने लगता है। इसके कारण बचà¥à¤šà¥‡ का रंग गà¥à¤²à¤¾à¤¬à¥€ हो जाता है। बचà¥à¤šà¥‡ के शरीर पर सफेद चिकनईयà¥à¤•à¥à¤¤ पदारà¥à¤¥ लगा रहता है। इस चिकनाईयà¥à¤•à¥à¤¤ पदारà¥à¤¥ को वरनिकà¥à¤¸ कहते हैं। बचà¥à¤šà¥‡ को साफ कपड़े से पोंछने या बचà¥à¤šà¥‡ को सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ कराने से यह चिकनाईयà¥à¤•à¥à¤¤ दà¥à¤°à¤µ शरीर से बाहर आ जाता है।
बचà¥à¤šà¥‡ के चेहरे पर कà¥à¤› सूजन, आंखों का धंसा रहना और बचà¥à¤šà¥‡ का सिर का कà¥à¤› à¤à¤¾à¤— उठा-सा दिखाई पड़ता है जिसको कैपà¥à¤Ÿ कहा जाता है। यह सब समय के साथ ठीक हो जाता है। बचà¥à¤šà¥‡ के पैदा होते समय सिर पर जो मांसपेशियों का जोर लगता है। उससे कैपà¥à¤Ÿ बन जाता है। परनà¥à¤¤à¥ यह कà¥à¤› ही दिनों में ठीक हो जाता है। बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के समय बचà¥à¤šà¥‡ की छाती कà¥à¤› बढ़ी हà¥à¤ˆ होती है। पà¥à¤°à¤¸à¤µ में यदि लड़की होती है। तो उसके मूतà¥à¤°à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤° के दोनों ओर की तà¥à¤µà¤šà¤¾ लेबिया कà¥à¤› अधिक à¤à¥‚री और सूजी हà¥à¤ˆ होती है और कà¥à¤› à¤à¤¾à¤— बाहर निकलता दिखाई देता है। कà¤à¥€-कà¤à¥€ थोड़ा सा रकà¥à¤¤ à¤à¥€ आ जाता है इसी पà¥à¤°à¤•ार लड़के में अंडकोषों का बड़ा होना या कà¥à¤› हलà¥à¤•े नीले ब à¤à¥‚रे रंग का दिखाई पड़ना आदि सामानà¥à¤¯ बातें होती है जो समय के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° बदल जाती है। गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के समय महिला को यह निरà¥à¤£à¤¯ ले लेना चाहिठकि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¤¸à¤µ घर में या हासà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² में करवाना है। गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान महिला की किसी सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ रोग से विशेषजà¥à¤ž से करवानी चाहिà¤à¥¤
इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ देखें
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾
सनà¥à¤¤à¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤¸à¤µ
शलà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¸à¤µ (सीजरियन सेकà¥à¤¶à¤¨)
गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤
अपरिणत पà¥à¤°à¤¸à¤µ
मृतà¥à¤¯à¥
बाहरी कड़ियाà¤
पà¥à¤°à¤¸à¤µ (मैं सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€)
शिशॠकेनà¥à¤¦à¥à¤° -- माठबनने की तैयारी से लेकर शिशॠकी देखà¤à¤¾à¤² तक सà¤à¥€ जानकारी हिंदी à¤à¤¾à¤·à¤¾ में
शà¥à¤à¤¦à¤¾ - पà¥à¤°à¤¸à¤µ व बचà¥à¤šà¥‹à¤‚को समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ हिनà¥à¤¦à¥€ चिटà¥à¤ ा
सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ पà¥à¤°à¤¸à¤µ (पतà¥à¤°à¤¿à¤•ा)
जब गूंजे किलकारी[मृत कड़ियाà¤] (पतà¥à¤°à¤¿à¤•ा)
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ : à¤à¥à¤°à¤¾à¤‚तियाठव तथà¥à¤¯ (1) (वेबदà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾)
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ : à¤à¥à¤°à¤¾à¤‚तियाठव तथà¥à¤¯ (2) (वेबदà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾)
सिज़ेरियन से पà¥à¤°à¤¸à¤µ (सà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¦à¤¨)
शà¥à¤°à¥‡à¤£à¤¿à¤¯à¤¾à¤:
पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨à¤—रà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£
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