नवजात शिशु को निमोनिया से कैसे बचाएं?HealthPlanet

Posted on Tue 29th Nov 2022 : 17:19

शिशु मृत्यु के प्रमुख कारण निमोनिया से बच्चों का करें बचाव

अररिया। जिले में निमोनिया रोग एक गंभीर समस्या है। आये दिन छोटे- छोटे बच्चे इस बीमारी के शिकार हो रहे और कई बच्चों को इस बीमारी से अपनी जान भी गवांनी पड़ रही है। शिशु मृत्यु के प्रमुख कारणों में निमोनिया शामिल है। इसको लेकर सरकार सक्रिय रूप से अपनी भूमिका भी अदा कर रहा है। निमोनिया के कारण शिशुओं में होने वाले मृत्यु को रोकने के लिए नि:शुल्क पीसीवी के टीके की शुरुआत भी सरकार की द्वारा की गई है। लेकिन सरकारी कार्यक्रमों एवं प्रयासों के इतर शिशुओं को निमोनिया जैसे गंभीर रोग से बचाने के लिए सामुदायिक जागरूकता की भूमिका को भी नजरंदाज नहीं किया जा सकता। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रत्येक साल 12 नवम्बर को विश्व निमोनिया दिवस के रूप में मनाकर आम लोगो को जागरूक करने का प्रयास किया जाता है। निमोनिया से बचाव में टीका असरदार इस संबंध में जानकारी देते हुए अस्पताल प्रबंधक विकास आनंद ने बताया कि निमोनिया सांस से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है। बच्चों के लिए यह सबसे बड़ी जानलेवा संक्रामक बीमारी है। बैक्टीरिया से बच्चों को होने वाले जानलेवा निमोनिया को टीकाकरण कर रोका जा सकता है। बच्चों को न्यू मोकॉकल कॉन्जुनगेट वैक्सी्न यानी पीसीवी का टीका 6 सप्ताह, 14 सप्ताह एवं 9 वें महीने पर लगाने होते हैं। इस टीके को नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया गया है साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला अस्पतालों में आवश्यक टीकाकरण की सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध है। पीसीवी का टीका बच्चों को निमोनिया से बचाने में काफी असरदार है। नियमित स्तनपान निमोनिया से बच्चों का करता है बचाव अस्पताल प्रबंधक ने बताया कि कोरोना संक्रमणकाल में बच्चों को निमोनिया से बचाने की अधिक जरूरत है। इसके लिए बच्चों का उचित ध्यान रखना काफी जरुरी है। निमोनिया को दूर रखने के लिए व्यक्तिगत साफ-सफाई जरूरी है। छींकते-खांसते समय मुंह और नाक को ढक लें। समय-समय पर बच्चे के हाथ भी जरूर धोने चाहिए। बच्चों को प्रदूषण से बचायें और सांस संबंधी समस्या न रहें इसके लिए उन्हें धूल-मिट्टी व धूम्रपान करने वाली जगहों से दूर रखें। बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पर्याप्त पोषण दें। यदि बच्चा छह महीने से कम का है तो उसे नियमित रूप से स्तनपान कराएं। इस दौरान स्तनपान के अलावा ऊपर से शिशु को पानी भी न दें। स्तनपान प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में जरूरी है। नियमित स्तनपान से भी बच्चा निमोनिया जैसे गंभीर रोग से सुरक्षित रहता है। इन लक्षणों से करें निमोनिया की पहचान सिविल सर्जन डॉ. रूपनारायण ने निमोनिया के विषय मे जानकारी साझा करते हुए बताया कि अगर किसी बच्चे कोतेज बुखार हो, खांसी के साथ हरा या भूरा गाढ़ा बलगम आए, सांस लेने में दिक्कत हो, दांत किटकिटाना, दिल की धड़कन बढ़ना ,सांस की रफ्तार अधिक होना, उलटी होना, दस्त आना, भूख की कमी, होठों का नीला पड़ना,कमजोरी या बेहोशी छाना जैसे लक्षण हो तो इसकी शीघ्र पहचान करें ताकि उन्हें सही समय पर इलाज प्राप्त हो सके। यदि बच्चे की सांस तेज चल रही हो, उन्हें सांस लेने में कोई दिक्कत हो रही हो, छाती व पसली अंदर धंस रही हो एवं तेज बुखार जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हो तो तुरंत आशा, एएनएम या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करना चाहिए।

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