नवजात शिशुओं में बलगम कितने समय तक रहता है?HealthPlanet

Posted on Mon 17th Oct 2022 : 13:46

शिशुओं में खांसी किस कारण से होती है?
खांसना एक स्वाभाविक क्रिया है जो कि बच्चे के वायुमार्ग को अवरुद्ध होने से बचाती है। खांसी इसलिए होती है क्योंकि:

गले और छाती में से श्लेम (म्यूकस), धूल या धुआं जैसे तकलीफ पैदा करने वाले तत्वों को बाहर निकाल सके
वायुमार्ग या फेफड़ों किसी इनफेक्शन की वजह से असहजता होने पर।

खांसी के अलग-अलग प्रकार कौन से हैं?
खांसी सूखी (जिसमें बलगम न आए) या गीली (जिसमें बलगम आए) हो सकती है। ये आमतौर पर किसी इनफेक्शन की वजह से होती है, मगर कई बार इसके गैर-संक्रामक कारण भी हो सकते हैं जैसे कि अस्थमा (दमा) आदि। यदि खांसी किसी एलर्जी या अस्थमा की वजह से है, तो शिशु को बुखार नहीं होगा।

शिशुओं और छोटे बच्चों को इनफेक्शन की वजह से होने वाली कुछ आम तरह की खांसियों के बारे में नीचे बताया गया है:

सर्दी-जुकाम या फ्लू का वायरस
अधिकांश खांसी किसी विषाणु (वायरस) की वजह से होती है, जैसे कि सर्दी-जुकाम या फ्लू पैदा करने वाले बहुत से विषाणुओं में से एक की वजह से खांसी भी होती है। आपके नन्हें शिशु को जन्म के पहले साल में सात से ज्यादा बार सर्दी-जुकाम हो सकती है, क्योंकि उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) अभी आम विषाणुओं का सामना करना सीख रही है।

यदि सर्दी या फ्लू के वायरस की वजह से आपके शिशु को खांसी है, तो शायद उसकी नाक भी बंद होगी या बह रही होगी। उसे गले में दर्द, आंखों में पानी और बुखार भी हो सकता है।

फ्लू की वजह से कई बार दस्त (डायरिया) या उल्टी भी हो सकती है।

रेस्पिरेटरी सिंसीशियल वायरस (आरएसवी) एक आम वायरस है जिसकी वजह से शिशुओं और छोटे बच्चों में छाती के संक्रमण होते हैं। अधिकांश मामलों में यह सर्दी-जुकाम के वायरस की तरह ही होता है, मगर यह ब्रोंकाइटिस या निमोनिया जैसी स्वास्थ्य जटिलताओं का कारण बन सकता है।

यदि कोविड महामारी के दौरान आपके शिशु को फ्लू जैसे लक्षण हों और खांसी हो तो आपका चिंतित होना स्वाभाविक है कि कहीं शिशु को कोविड-19 इनफेक्शन न हो। आप शिशु के डॉक्टर से संपर्क करें और उनकी सलाह का पालन करें। शिशुओं और छोटे बच्चों में कोविड-19 के बारे में हमारा यह लेख पढ़ें।

निमोनिया या ब्रोंकाइटिस
निमोनिया फेफड़ों का इनफेक्शन है। ब्रोंकाइटिस तब होता है जब ब्रोंकाई (फेफड़ों तक हवा ले जाने वाली नलिकाएं) में संक्रमण हो जाए। निमोनिया और ब्रोंकाइटिस अक्सर सर्दी-जुकाम या फ्लू इनफेक्शन के बाद होता है। इनमें लगातार कई हफ्तों तक खांसी बनी रहती है। इनके अन्य लक्षणों में शामिल हैं बुखार, बदन दर्द और कंपकंपी।

यदि आपके बच्चे को निमोनिया या ब्रोंकाइटिस के लक्षण हों तो डॉक्टर से बात करें। इनफेक्शन और खांसी दूर करने के लिए हो सकता है बच्चे को एंटिबायोटिक दवाओं की जरुरत हो।

क्रूप
क्रूप खांसी मे भौंकने जैसी आवाज निकलती है। यह अक्सर रात में शुरु होती है। क्रूप आमतौर पर स्वरतंत्री (वोकल कॉर्ड्स-लेरिंक्स), श्वासनली (ट्रेकिया) और ब्रोंकाइल नलिकाओं (ब्रोंकाई) में इनफेक्शन की वजह से सूजन होने पर होती है। सूजी हुई स्वरतंत्री की वजह से खांसने पर अजीब सी आवाज आती है।

यह खांसी सुनने में जितनी भयावह लगती है, अधिकांश मामलों में इतनी गंभीर नहीं होती और इसका उपचार घर पर किया जा सकता है। यदि आपके शिशु की क्रूप खांसी में सुधार न हो रहा हो, तो डॉक्टर से बात करें। वे शायद जांच के लिए बच्चे को अस्पताल या क्लिनिक लाने के लिए कह सकती हैं।

काली खांसी (व्हूपिंग कॉफ)
काली खांसी/कुक्कुर खांसी (पर्टुसिस) श्वासनलिका और वायुमार्ग में होने वाला जीवाण्विक (बैक्टीरियल) इनफेक्शन है। यह बहुत ही संक्रामक है, मगर डीटीपी का टीका लगवाकर बच्चे को इस इनफेक्शन से सुरक्षित किया जा सकता है। इसलिए बच्चे को सभी टीके और बूस्टर खुराकें दिलवाना बहुत ही जरुरी है।

काली खांसी होने पर बच्चा आमतौर पर 20 से 30 सैकंड तक लगातार खांसता है, और फिर सांस लेने की कोशिश करता है और इसके बाद फिर से खांसी का दौरा शुरु हो जाता है। बच्चे को सर्दी-जुकाम के लक्षण जैसे कि बहती नाक और छींके भी हो सकती हैं।

यदि आपको लगे कि आपके बच्चे को काली खांसी है, तो तुरंत डॉक्टर से बात करें। काली खांसी गंभीर हो सकती है, विशेषतौर पर एक साल से कम उम्र के शिशुओं के लिए। यदि आपके बच्चे को कांली खांसी है, तो डॉक्टर शायद उसे एंटिबायोटिक दवाएं देंगे। कुछ शिशुओं को अस्पताल में भर्ती होने की जरुरत भी पड़ सकती है।

तपेदिक (ट्यूबरक्यूलोसिस, टीबी)
दो हफ्ते से ज्यादा रहने वाली खांसी तपेदिक (टीबी) का लक्षण हो सकती है। अगर शिशु को टीबी हो तो उसका पर्याप्त वजन भी नहीं बढ़ रहा हो या संभव है कि उसका वजन कम हो रहा हो। बीसीजी का टीका शिशु को टीबी से बचाता है। इसलिए यदि आपके शिशु को सभी टीके समय पर लगवाए गए हैं, तो शायद शिशु को यह इनफेक्शन न हो। यदि शिशु को टीबी हो जाए, तो उसे एंटिबायोटिक दवाएं देनी होंगी।

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