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किसे दूध पीना चाहिठऔर किसे दूध नहीं, जानें à¤à¤¸à¥‡ सà¤à¥€ सवालों के जवाब आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• डॉकà¥à¤Ÿà¤° से
Ayurvedic Method To Drink Milk: दूध हमारे à¤à¥‹à¤œà¤¨ का à¤à¤• अà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ अंग है. मानव समाज में दूध पीने का चलन सदियों से है. à¤à¤¾à¤°à¤¤ के जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में गाय के दूध का सेवन किया जाता है तो राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के कà¥à¤› हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में ऊंटनी के दूध का सेवन होता है. कहीं लोग à¤à¥ˆà¤‚स के दूध का सेवन करते हैं तो कहीं बकरी का दूध पीने की परंपरा है.
दूध पीना इंसान के लिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚ जरूरी है, इसके सेवन से किन बीमारियों से बचाव होता है और दूध पीने के अनà¥à¤¯ कà¥à¤¯à¤¾ लाठहैं, à¤à¤¸à¥‡ ही दूध से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ अनेक पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨à¥‹à¤‚ का उतà¥à¤¤à¤° दे रहे हैं आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¾à¤šà¤¾à¤°à¥à¤¯ डॉकà¥à¤Ÿà¤° सà¥à¤°à¥‡à¤‚दà¥à¤° सिंह राजपूत. ये पिछले 41 साल से आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ के माधà¥à¤¯à¤® से लोगों की चिकितà¥à¤¸à¤¾ कर रहे हैं...
दूध पीने से किन बीमारियों से बचाव होता है?
आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में दूध को संपूरà¥à¤£ आहार माना गया है. यानी यह शरीर में सà¤à¥€ पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी को दूर करता है. हालांकि यह फैकà¥à¤Ÿ पूरी तरह इस बात पर निरà¥à¤à¤° करता है कि आप किस पशॠके दूध का सेवन कर रहे हैं. आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में दूध से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° नियम देसी गाय के दूध से ही संबंधित होते हैं. कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि गाय की पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿ के आधार पर, à¤à¥ˆà¤‚स, बकरी और ऊंट इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ जितने à¤à¥€ दà¥à¤§à¤¾à¤°à¥‚ (दूध देने वाले) पशॠहैं, इनके दूध की पà¥à¤°à¥‰à¤ªà¤°à¥à¤Ÿà¥€à¤œ अलग-अलग होती हैं. इसलिठहम यहां जो à¤à¥€ बात करेंगे, वह देसी गाय के दूध के संबंध में है.
नियमित रूप से दूध का सेवन करने पर शरीर में विटामिनà¥à¤¸ की कमी संबंधी रोगों की आशंका नà¥à¤¯à¥‚नतम हो जाती है. यानी इस बात की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ ना के बराबर होती है कि आपको विटामिन की कमी संबंधी कोई रोग होगा.
दूध का सेवन करने से शरीर में आवशà¥à¤¯à¤• मातà¥à¤°à¤¾ में कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की पूरà¥à¤¤à¤¿ होती रहती है और हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से संबंधित रोग दूर रहते हैं.
दूध से शरीर को आयरन à¤à¥€ मिलता है. इसलिठरकà¥à¤¤ संबंधी जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° विकार à¤à¥€ नियमित रूप से दूध पीने वालों से दूर रहते हैं.
सà¥à¤•िन संबंधी रोग जैसे à¤à¤—à¥à¤œà¤¿à¤®à¤¾, सोरायसिस या अà¥à¤¯ इंफेकà¥à¤¶à¤¨ की आशंका à¤à¥€ नहीं रहती है. यदि कोई और बीमारी शरीर में ना पनप रही हो तो इस तरह के रोग नियमित दूध पीने वालों को नहीं होते.
बà¥à¤¢à¤¼à¤¾à¤ªà¤¾ शरीर पर हावी नहीं हो पाता.कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि जो लोग नियमित रूप से दूध पीते हैं, उनके शरीर में आवशà¥à¤¯à¤• मातà¥à¤°à¤¾ में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ की पूरà¥à¤¤à¤¿ होती रहती है, तà¥à¤µà¤šà¤¾ की कोशिकाओं को दूध से परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ नमी मिलती है इसलिठà¤à¥à¤°à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की समसà¥à¤¯à¤¾ नहीं होती है.
शरीर फिट और सà¥à¤²à¤¿à¤® बना रहता है. कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि देसी गाय का दूध गैरजरूरी फैट शरीर पर नहीं चढ़ने देता और ना ही इस दूध में बहà¥à¤¤ अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में फैट होता है. इसलिठइस दूध का नियमित सेवन करने वाले फिट à¤à¥€ रहते हैं और सà¥à¤‚दर à¤à¥€.
दूध पीने से रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ का विकास होता है. इमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤Ÿà¥€ इतनी मजबूत हो जाती है कि जलà¥à¤¦à¥€ से शरीर पर कोई इंफेकà¥à¤¶à¤¨ या वायरस अटैक नहीं कर पाता है.
किस उमà¥à¤° तक दूध पीना जरूरी होता है?
जनà¥à¤® से लेकर जीवन परà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ हर वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को दूध पीना चाहिà¤. जैसा कि हम पहले ही कह चà¥à¤•े हैं कि यहां हम दूध से संबंधित जो à¤à¥€ बात कर रहे हैं, वो देसी गाय के दूध से संबंधित है. तो देसी गाय का दूध बचपन में शरीर के विकास और मानसिक विकास में सहायता करता है. साथ ही बà¥à¤¢à¤¼à¤¾à¤ªà¥‡ में याददाशà¥à¤¤ संबंधी रोगों से बचाता है. यही कारण है कि पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ समय में लोग सौ वरà¥à¤· से अधिक की उमà¥à¤° जीते थे लेकिन फिर à¤à¥€ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अलà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤®à¤° जैसे मेमोरी संबंधी रोग नहीं होते थे.
दूध पीने पर किन लोगों को समसà¥à¤¯à¤¾ होती है?
अगर किसी को पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ पेचिस है या पेचिस का असर है तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दूध पीने पर गैस बनती है. जिनके पाचन तंतà¥à¤° में रेनिन à¤à¤‚जाइम परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में बनता रहता है, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दूध पीने से कà¤à¥€ कोई समसà¥à¤¯à¤¾ नहीं होती है.
रेनिन à¤à¤‚जाइम शरीर के अंदर दूध को फाड़ने का काम करता है और लैकà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ à¤à¤‚जाइम पचाने का काम करता है. जब इन दोनों à¤à¤‚जाइम का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ शरीर में ठीक पà¥à¤°à¤•ार से होता रहता है तो कोई समसà¥à¤¯à¤¾ नहीं होती और अगर à¤à¤• à¤à¥€ à¤à¤‚जाइम की कमी हà¥à¤ˆ तब दूध पीने से पेट संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ होती हैं.
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जो बचà¥à¤šà¥‡ दूध नहीं पीते उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कà¥à¤¯à¤¾ खिलाना चाहिà¤?
हालांकि दूध का कोई विकलà¥à¤ª नहीं है. लेकिन कà¥à¤› छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को इसका सà¥à¤µà¤¾à¤¦ पसंद नहीं होता है या अनà¥à¤¯ किसी कारण से दूध पीने में समसà¥à¤¯à¤¾ है और बहà¥à¤¤ छोटे बचà¥à¤šà¥‡ को आप कà¥à¤› समà¤à¤¾ à¤à¥€ नहीं सकते हैं कि उसे दूध पीने के फायदे बताà¤à¤‚ तो इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में आप उसे शहद चटा सकते हैं. कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में सिरà¥à¤« दो ही खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को संपूरà¥à¤£ आहार का सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ है और ये हैं पहला दूध और दूसरा शहद.
दूध पीने की सही विधि कà¥à¤¯à¤¾ है?
दूध सदैव खाना खाने के दो घंटे बाद पीना चाहिठऔर दूध पीने के बाद यदि à¤à¥‹à¤œà¤¨ करना है तो लगà¤à¤— à¤à¤• घंटे का गैप रखें. इससे दूध का पाचन और à¤à¥‹à¤œà¤¨ का पाचन अचà¥à¤›à¥‡ से होगा और आपको दोनों के गà¥à¤£à¥‹à¤‚ का पूरा लाठà¤à¥€ मिलेगा.
किन बीमारियों में दूध नहीं पीना चाहि�
जब लिवर संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾ चल रही हो तो दूध ना पिà¤à¤‚.
जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बॉडी पर सà¥à¤µà¥‡à¤²à¤¿à¤‚ग की समसà¥à¤¯à¤¾ हो रही हो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दूध नहीं पीना चाहिà¤.Â
रजोवृतà¥à¤¤à¤¿ (Periods) में दूध नहीं पीना चाहिà¤.
डिलिवरी के तà¥à¤°à¤‚त बाद दूध नहीं पीना चाहिà¤
पेचिस या लूज मोशन की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में दूध ना पिà¤à¤‚
किन लोगों को दूध जरूर पीना चाहि�
यदि आपको कोई à¤à¤¸à¤¾ रोग नहीं है, जिसमें दूध हानि पहà¥à¤‚चाता है, जिनके बारे में ऊपर बताया गया है तो दूध सà¤à¥€ को पीना चाहिठऔर हर उमà¥à¤° में पीना चाहिà¤.
शारीरिक और मानसिक शà¥à¤°à¤® करने वाले सà¤à¥€ लोगों के लिठदूध जरूरी होता है. कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह शरीर को हेलà¥à¤¦à¥€ रखता ही है साथ ही बà¥à¤°à¥‡à¤¨ को शांत रहने और खà¥à¤¶ रहने में मदद करता है.
शारीरिक और मानसिक कमजोरी दूर करने में दूध महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¤¾ है. इसलिठदूध का सेवन सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ जीवन के लिठअतà¥à¤¯à¤‚त आवशà¥à¤¯à¤• है.
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