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2 महीने के बचà¥à¤šà¥‡ की गतिविधियां, विकास और देखà¤à¤¾à¤²
शिशॠके जनà¥à¤® के बाद उसके लालन-पालन की जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ माता-पिता पर होती है। गà¥à¤œà¤°à¤¤à¥‡ हà¥à¤ समय के साथ जैसे-जैसे शिशॠके कदम विकास की ओर बढ़ते हैं, उस पर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना जरूरी हो जाता है। हर महीने शिशॠका विकास तेजी से होता है। 2 महीने के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में कई अहम बदलाव आने लगते हैं, जो उसके संपूरà¥à¤£ विकास के लिठजरूरी à¤à¥€ है। मॉमजंकà¥à¤¶à¤¨ के इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में हम 2 महीने के शिशॠकी गतिविधियों, विकास और उनकी देखà¤à¤¾à¤² के बारे में बात करेंगे। साथ ही कà¥à¤› à¤à¤¸à¥€ बातें à¤à¥€ बताà¤à¤‚गे, जिन पर माता-पिता को जरूर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना चाहिà¤à¥¤
सबसे पहले हम जानते हैं कि दूसरे महीने के बचà¥à¤šà¥‡ का वजन और उसकी हाइट कितनी होनी चाहिà¤à¥¤
2 महीने के बचà¥à¤šà¥‡ का वजन और हाइट कितनी होनी चाहिà¤?
दूसरे महीने में बेबी गरà¥à¤² का सामानà¥à¤¯ वजन 4.1 किलो से 5.6 किलो और लंबाई 57.15 सेंटीमीटर तक हो सकती है। वहीं, बेबी बॉय का सामानà¥à¤¯ वजन 4.5 किलो से 6.1 किलो तक और लंबाई 58 सेंटीमीटर हो सकती है (1)।
नोट : शिशॠका वजन और उसकी लंबाई शिशॠके गरà¥à¤à¤•ालीन आयॠ(जब शिशॠमां के गरà¥à¤ में होता है) और जनà¥à¤® के वजन पर निरà¥à¤à¤° करता है। à¤à¤¸à¥‡ में शिशॠके वजन और लंबाई से जà¥à¥œà¥€ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जानकारी के लिठशिशॠविशेषजà¥à¤ž से राय लेनी जरूरी है।
आगे हम शिशॠके मानसिक, शारीरिक और à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• विकास के बारे में बात करेंगे।
2 महीने के बचà¥à¤šà¥‡ के विकास के माइलà¥à¤¸à¤Ÿà¥‹à¤¨ कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
2 महीने का शिशॠशारीरिक, मानसिक और à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• रूप से काफी विकसित हो जाता है। इन तीनों के बारे में हम यहां विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से बता रहे हैं।
मानसिक विकास
चेहरों पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना: 2 महीने के शिशॠअपने आसपास रहने वाले लोगों के चेहरों को पहचानने की कोशिश करने लगते हैं (2)।
आवाजों को सà¥à¤¨à¤¨à¤¾: जब 2 महीने के शिशॠको कोई आवाज सà¥à¤¨à¤¾à¤ˆ देती है, तो उसका धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ उस ओर ही जाता है। जहां से आवाज आ रही होती है, वह उस ओर देखने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करता है (3)।
अलग-अलग सà¥à¤µà¤° में रोना: à¤à¥‚ख लगने या कà¥à¤› परेशानी होने पर 2 महीने का शिशॠसिरà¥à¤« रोकर अपनी बात कह सकता है। वह अपनी à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं को वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करने के लिठअलग-अलग सà¥à¤µà¤° में रो सकता है (3)।
शारीरिक विकास
मांसपेशियां मजबूत: दो महीने के शिशॠके गरà¥à¤¦à¤¨ की मांसपेशियां कà¥à¤› हद तक मजबूत हो जाती हैं, लेकिन इतनी नहीं कि वह बैठते समय अपना सिर सीधा रख सके (4)।
सिर उठाना: जब 2 महीने के शिशॠको पेट के बल लेटाया जाता है, तो वह अपने सिर को ऊपर उठाने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करता है। वह करीब 45 डिगà¥à¤°à¥€ तक अपना सिर ऊपर उठा सकता है (5)।
शरीर को ऊपर उठना: 2 महीने में शिशॠके कंधे की मांसपेशियां थोड़ी मजबूत हो जाती हैं। जब उसे पेट के बल लेटाया जाता है, तो वह हाथों की मदद से अपने शरीर को ऊपर उठाने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करता है।
गतिशील चीजों व लोगों को देखना: अगर शिशॠके आसपास से कोई गà¥à¤œà¤°à¥‡ या कोई वसà¥à¤¤à¥ हिलती हà¥à¤ˆ नजर आà¤, तो वह उसे देख सकता है। उदाहरण के लिठअगर कोई वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ शिशॠके सामने à¤à¤• जगह से दूसरी जगह जाता है, तो वह गरà¥à¤¦à¤¨ घà¥à¤®à¤¾à¤•र जहां तक नजर जाती है, वहां तक देख सकता है (6)।
अंगों पर नियंतà¥à¤°à¤£: 2 महीने के शिशॠका अपने हाथों व पैरों पर नियंतà¥à¤°à¤£ होने लगता है। इसका पता इसी से चलता है कि वो हवा में तेजी से हाथ-पांव चलाता है (5)।
बेहतर दृषà¥à¤Ÿà¤¿: 2 महीने के शिशॠकी दृषà¥à¤Ÿà¤¿ बेहतर होने लगती है। वह अपनी आंखों को वसà¥à¤¤à¥à¤“ं पर बेहतर रूप से केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ कर पता है। वासà¥à¤¤à¤µ में दो महीने का बचà¥à¤šà¤¾ à¤à¤• चलती हà¥à¤ˆ वसà¥à¤¤à¥ को टà¥à¤°à¥ˆà¤• कर सकता है (3)।
सामाजिक और à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• विकास
मà¥à¤¸à¥à¤•ान: अपने ननà¥à¤¹à¥‡ की मà¥à¤¸à¥à¤•ान को हर माता-पिता देखना चाहते हैं और à¤à¤¸à¤¾ दूसरे महीने में संà¤à¤µ हो सकता है। 2 महीने की शिशॠको आप कई बार मà¥à¤¸à¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤¤à¥‡ हà¥à¤ देख सकते हैं (3)।
आवाज पर पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾: जब आप दो महीने के बचà¥à¤šà¥‡ से बात करते हैं, तो वह कà¥à¤› असà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ आवाज के साथ जवाब देने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करेगा (5)।
कà¥à¤› समय के लिठशांत: दूसरे महीने में बेबी रोते समय अपने मà¥à¤‚ह में हाथ डालकर कà¥à¤› देर के लिठशांत हो सकता है। यह बचà¥à¤šà¤¾à¥‡à¤‚ के लिठà¤à¤• सà¥à¤–दायक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¥€ होती है (3)।
असहज होने पर रोना: 2 महीने का शिशॠकिसी गतिविधि या खिलौने के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ रà¥à¤šà¤¿ ले सकता है। वह खिलौना न मिलने पर रोना शà¥à¤°à¥‚ कर सकता है। दो महीने की उमà¥à¤° में बचà¥à¤šà¥‡ का यह वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° बहà¥à¤¤ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ होता है (3)।
आइà¤, अब शिशॠको लगने वाले टीकों के बारे में बात कर लेते हैं।
2 महीने के बचà¥à¤šà¥‡ को कौन-कौन से टीके लगते हैं?
2 महीने का बेबी बहà¥à¤¤ नाजà¥à¤• होता है, उसे गंà¤à¥€à¤° बीमारियां हो सकती हैं, इसलिठउसके बेहतर सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिठटीकाकरण (शॉटà¥à¤¸) जरूरी हैं। सही समय पर सही टीकाकरण के लिठअपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करें। छठे से नौवें हफà¥à¤¤à¥‡ के बीच ये टीके लगाठजाते हैं (7):
डी-टैप (डिपà¥à¤¥à¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾, टेटनस, à¤à¤¸à¥‡à¤²à¥à¤¯à¥‚लर परà¥à¤Ÿà¥à¤¸à¤¿à¤¸) वैकà¥à¤¸à¥€à¤¨à¥¤
à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤¬à¥€ (हीमोफिलस इनà¥à¤«à¥à¤²à¥à¤à¤‚जा टाइप बी) टीका।
आईपीवी 1 (पोलियो वैकà¥à¤¸à¥€à¤¨)
पीसीवी 1 (नà¥à¤¯à¥‚मोकोकल) टीके
आरवी (रोटावायरस वैकà¥à¤¸à¥€à¤¨ मौखिक टीका)
à¤à¤šà¤¬à¥€à¤µà¥€
आइà¤, अब जानते हैं कि दो महीने के शिशॠपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ कितना दूध पी सकते हैं।
2 महीने के बचà¥à¤šà¥‡ के लिठकितना दूध आवशà¥à¤¯à¤• है?
शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ महीनों में बचà¥à¤šà¥‡ का पाचन तंतà¥à¤° मजबूत नहीं होता है, इसलिठउसे सिरà¥à¤« मां का दूध ही देना चाहिà¤à¥¤ वहीं, कà¥à¤› परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में शिशॠको फॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध देना जरूरी हो जाता है। यहां हम दोनों पà¥à¤°à¤•ार के दूध के बारे में बता रहे हैं।
मां का दूध: 1 से 2 महीने की उमà¥à¤° तक शिशॠदिन में 7-9 बार माठका दूध पी सकता है। वह दिनà¤à¤° में लगà¤à¤— 750-800 gm दूध पी सकता है (8)।
फॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध: à¤à¤• दिन में शिशॠकरीब 739ml से लेकर 887ml तक फाॅरà¥à¤®à¥‚ला दूध पी सकता है (9)।
अब जानते हैं कि à¤à¤• सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ शिशॠको à¤à¤• दिन में कितनी नींद की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है।
2 महीने के बचà¥à¤šà¥‡ के लिठकितनी नींद आवशà¥à¤¯à¤• है?
2 महीने की उमà¥à¤° के शिशॠà¤à¤• बार में 4 से 5 घंटे तक सो सकते हैं। इस पà¥à¤°à¤•ार सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ शिशॠपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ 15 से 20 घंटे की परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ नींद ले सकते हैं। वो à¤à¤• बार में 1 से 3 घंटे तक जाग सकते हैं (10)।
इस लेख में आगे जानेंगे कि 2 महीने के बचà¥à¤šà¥‡ की गतिविधियां कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ होनी चाहिà¤à¤‚।
2 महीने के बचà¥à¤šà¥‡ के लिठखेल और गतिविधियां
बचà¥à¤šà¥‡ के साथ बात करना: सातवें या आठवें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तक शिशॠकई पà¥à¤°à¤•ार की आवाजें निकालना शà¥à¤°à¥‚ कर देते हैं। आप जितना जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बचà¥à¤šà¥‡ के साथ बात करेंगे और खेलेंगे, वो उतना ही आपके करीब आà¤à¤‚गे और जलà¥à¤¦à¥€ बोलना सीखेंगे।
कडल टाइम: शिशà¥à¤“ं को गोद में लेकर गले से लगाà¤à¤‚, इस कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को कडलिंग कहते हैं। कडलिंग करने से शिशॠके मन में माता-पिता के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ पà¥à¤¯à¤¾à¤° व विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ विकसित होता है।
पेट के बल लेटना: शिशॠको पेट के बल लेटाà¤à¤‚ और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ खेलने दें। यह आपके बचà¥à¤šà¥‡ के सामानà¥à¤¯ विकास का à¤à¤• महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ हिसà¥à¤¸à¤¾ है। इससे गरà¥à¤¦à¤¨ और कंधे की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जिससे शिशॠके विकास में मदद मिल सकती है (11)।
कहानी सà¥à¤¨à¤¾à¤¨à¤¾: आप उसे कहानी सà¥à¤¨à¤¾ सकते हैं या फिर उसके सामने रंग-बिरंगी चितà¥à¤°à¥‹à¤‚ वाली किताब पढ़ सकते हैं। इससे उसके मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• विकास में मदद मिल सकती है। बेशक, उसे कà¥à¤› समठनहीं आà¤à¤—ा, लेकिन कहानी सà¥à¤¨à¤¤à¥‡-सà¥à¤¨à¤¤à¥‡ वह शांत होकर सो सकता है या फिर खà¥à¤¶ à¤à¥€ हो सकता है।
पूरे परिवार से मिलना: जब शिशॠजाग रहा हो, तो पूरा परिवार उसके पास रहकर उससे बातें कर सकता है या फिर खेल सकता है। इससे वह अपनों के करीब आà¤à¤—ा।
मालिश: बचà¥à¤šà¥‡ की देखà¤à¤¾à¤² में मालिश à¤à¥€ जरूरी है। इस मालिश के कई लाठहैं, जिसमें वजन बढ़ना, पाचन में सà¥à¤§à¤¾à¤°, रकà¥à¤¤ संचार में सà¥à¤§à¤¾à¤° और शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ दरà¥à¤¦ को कम करना आदि शामिल हैं। आप मालिश के लिठतेल या मॉइसà¥à¤šà¤°à¤¾à¤‡à¤œà¤° का उपयोग कर सकते हैं। जब आप मालिश कर रहे हों, तब आप अपने बचà¥à¤šà¥‡ से धीरे-धीरे बात कर सकते हैं या फिर उसे गाना à¤à¥€ सà¥à¤¨à¤¾ सकते हैं।
आइà¤, अब दो माह के शिशॠको होने वाली कà¥à¤› सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के बारे में बात करते हैं।
2 महीने के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के माता-पिता की आम सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ चिंताà¤à¤‚
जब शिशॠबीमार हो ताे उसे संà¤à¤¾à¤²à¤¨à¤¾ मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो जाता है। à¤à¤¸à¥‡ में माता-पिता के लिठयह जानना जरूरी है कि वो अपने बीमार बचà¥à¤šà¥‡ की देखà¤à¤¾à¤² कैसे करें। यहां हम शिशà¥à¤“ं को होने वाली कà¥à¤› खास समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं और उनके इलाज के बारे में बात करते हैं।
1. तà¥à¤µà¤šà¤¾ की समसà¥à¤¯à¤¾
शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ बहà¥à¤¤ नाजà¥à¤• होती है। इस समय उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ विशेष देखà¤à¤¾à¤² की जरूरत होती है, वरना उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ तà¥à¤µà¤šà¤¾ को कई समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हो सकतीं हैं। यहां पर हम शिशॠको होने वाली तà¥à¤µà¤šà¤¾ की समसà¥à¤¯à¤¾ और उनका समाधान दे रहे हैं (12)। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि बिना बाल रोग विशेषजà¥à¤ž की सलाह लिठशिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर किसी à¤à¥€ तरह कà¥à¤°à¥€à¤®, पाउडर या तेल न लगाà¤à¤‚।
डायपर रैशज: जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ देर तक गीला या गंदा डायपर पहने रहने के कारण शिशॠको ये रैशेज हो सकते हैं। ये रैशेज लाल रंग के होते हैं।
इलाज: समय-समय पर बचà¥à¤šà¥‡ के डायपर बदलते रहें। जब à¤à¥€ डायपर बदलें, तो तà¥à¤µà¤šà¤¾ को अचà¥à¤›à¥€ तरह साफ जरूर करें और बेबी मॉइसà¥à¤šà¤° कà¥à¤°à¥€à¤® à¤à¥€ लगाà¤à¤‚। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ की सफाई करते समय तà¥à¤µà¤šà¤¾ को जोर से न रगड़ें और नितंबों की सफाई करते समय à¤à¤• कोमल सूती कपड़े का उपयोग करें। कà¤à¥€-कà¤à¥€ शिशॠको बिना डायपर के à¤à¥€ रहने दें, ताकि तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक नमी बनी रहे।
हीट रैश: हीट रैश यानी घमोरियां तब होती हैं, जब रोम छिदà¥à¤°à¥‹à¤‚ के बंद होने पर पसीना तà¥à¤µà¤šà¤¾ के नीचे फंस जाता है। à¤à¤¸à¤¾ आमतौर पर गरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में होता है। शिशॠमें ये छोटे, लाल, दà¥à¤°à¤µ से à¤à¤°à¥‡ फफोले के रूप में नजर आ सकते हैं।
इलाज: गरà¥à¤® मौसम में शिशॠके ऊपर से अतिरिकà¥à¤¤ कपड़ों को हटा दें। उसे ढीले-ढाले, हलà¥à¤•े व सूती कपड़े पहनाकर आराम से ठंडे सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर सà¥à¤²à¤¾à¤à¤‚। साथ ही घमोरियों से बचने के लिठपाउडर का उपयोग à¤à¥€ कर सकते हैं।
à¤à¤•à¥à¤œà¤¿à¤®à¤¾: यह à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार का तà¥à¤µà¤šà¤¾ संकà¥à¤°à¤®à¤£ है, जो सूखी, घनी, पपड़ीदार तà¥à¤µà¤šà¤¾ या छोटे लाल धकà¥à¤•ों के रूप में दिखाई देती है। शिशà¥à¤“ं में à¤à¤•à¥à¤œà¤¿à¤®à¤¾ माथे, गाल या सà¥à¤•ैलà¥à¤ª पर नजर आते हैं। यह हाथ, पैर, छाती या शरीर के अनà¥à¤¯ हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में à¤à¥€ फैल सकता है।
इलाज: आप डॉकà¥à¤Ÿà¤° से पूछकर शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर मॉइसà¥à¤šà¤°à¤¾à¤‡à¤œà¤° लगा सकते हैं। अपने बचà¥à¤šà¥‡ को ढीले व सूती कपड़े पहनाà¤à¤‚। अगर फिर à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‡ को आराम नहीं मिले, तो जलà¥à¤¦à¥€ ही डॉकà¥à¤Ÿà¤° से चेकअप कराà¤à¤‚।
2. खांसी की समसà¥à¤¯à¤¾: वैसे खांसी गले और छाती के वायà¥à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— को साफ करने à¤à¤• महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है। फिर à¤à¥€ अगर शिशॠको जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खांसी होती है और जलà¥à¤¦à¥€ ही ठीक नहीं होती, तो उसे तà¥à¤°à¤‚त ही डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास ले जाà¤à¤‚।
आगे जानते हैं दो महीने के शिशॠकी विकसित हाेने वाली कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾à¤“ं के बारे में।
बचà¥à¤šà¥‡ की सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾, दृषà¥à¤Ÿà¤¿ और अनà¥à¤¯ इंदà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚
कà¥à¤¯à¤¾ मेरा बचà¥à¤šà¤¾ देख सकता है?
दो महीने के बचà¥à¤šà¥‡ पास की वसà¥à¤¤à¥à¤“ं और लोगों को सà¥à¤¥à¤¿à¤° होकर देख सकते हैं (13)।
कà¥à¤¯à¤¾ मेरा बचà¥à¤šà¤¾ सà¥à¤¨ सकता है?
जब बचà¥à¤šà¤¾ गरà¥à¤ में होता है, तो वह बाहर से आने वाली आवाजें सà¥à¤¨ सकता है। साथ ही कà¤à¥€-कà¤à¥€ उन पर पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¥€ दे सकता है। वहीं, जनà¥à¤® लेने के बाद à¤à¥€ आवाजों को सà¥à¤¨ सकता है। जहां से à¤à¥€ आवाज आती है, उस ओर देखने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करता है (13)।
कà¥à¤¯à¤¾ मेरा बचà¥à¤šà¤¾ सà¥à¤µà¤¾à¤¦ और गंध को पहचान सकता है?
आपका 2 महीने का बेबी सà¥à¤µà¤¾à¤¦ और गंध को महसूस करने में सकà¥à¤·à¤® हो सकता है। वह कड़वे और मीठे सà¥à¤µà¤¾à¤¦ की पहचान सकता है। वह मà¥à¤‚ह में कà¥à¤› कड़वी चीज आने पर रोने लगता है। इसी तरह खà¥à¤¶à¤¬à¥‚ आने पर शिशॠखà¥à¤¶ हो सकता है, जबकि खराब गंध पर चिड़चिड़ा हो सकता है।
अब बात करेंगे दो महीने के शिशॠकी सà¥à¤µà¤šà¥à¤›à¤¤à¤¾ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ बरती जाने वाले बिंदà¥à¤“ं के बारे में।
बचà¥à¤šà¥‡ की सफाई और सà¥à¤µà¤šà¥à¤›à¤¤à¤¾ का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें
हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बचà¥à¤šà¤¾ सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ और तंदà¥à¤°à¥à¤¸à¥à¤¤ हो। शिशॠकी अचà¥à¤›à¥€ सेहत के लिठउनकी साफ-सफाई पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना जरूरी है।
बचà¥à¤šà¥‡ के चेहरे और सिर की सफाई: आप शिशॠको à¤à¤• दिन छोड़कर नहला सकते हैं। उसे नहलाने की जगह सिर, चेहरे व शरीर की सफाई के लिठगरà¥à¤® पानी में à¤à¤¿à¤—ोठगठकोमल कपड़े का उपयोग कर सकते हैं। इस दौरान साबà¥à¤¨ की जरूरत नहीं होती है (12)।
नाखून: पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• समयांतराल पर शिशॠके नाखून साफ करते रहें और काटते रहें। अगर नाखूनों में गंदगी होगी, तो वह उंगलियों को मà¥à¤‚ह में डालेगा, जिससे गंदगी उसके मà¥à¤‚ह में जा सकती है। साथ ही अगर नाखून लंबे हाेंगे, तो वह खà¥à¤¦ को चोट पहà¥à¤‚चा सकता है। नाखूनों को बेबी नेल कटर से ही काटें (14)।
गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² : गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² की सफाई के लिठगरà¥à¤® पानी में à¤à¤• कॉटन को डà¥à¤¬à¤¾à¤•र अतिरिकà¥à¤¤ पानी को निचोड़ कर निकाल लें। फिर धीरे से नाल और फिर आसपास की तà¥à¤µà¤šà¤¾ को साफ करें। इसके बाद साफ कपड़े से पोंछे लें। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² तब तक साफ और सूखी रहे, जब तक कि वह पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक रूप से सà¥à¤µà¤¯à¤‚ न निकल जाठ(15)।
देखà¤à¤¾à¤² : अपने बचà¥à¤šà¥‡ की नैपी को नियमित रूप से बदलें और साफ रखें, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि गंदे नैपी से बचà¥à¤šà¥‡ की तà¥à¤µà¤šà¤¾ में जलन होने की आशंका रहती है। यह डायपर रैशेज का कारण बन सकता है। इसलिà¤, डायपर को समय-समय पर बदलते रहें (12)।
शिशॠके विकास के संबंध में अनà¥à¤¯ जानकारी के लिठपढ़ते रहें यह आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल।
माता-पिता बचà¥à¤šà¥‡ के विकास में कैसे मदद कर सकते हैं?
यहां हम आपको कà¥à¤› टिपà¥à¤¸ दे रहे हैं, जो शिशॠके विकास में मदद कर सकते हैं:
पेट के बल लिटाà¤à¤‚: शिशॠकी गरà¥à¤¦à¤¨ और बांह की मांसपेशियों को फायदा पहà¥à¤‚चाने के लिठबचà¥à¤šà¥‡ को टमी टाइम यानी पेट के बल जरूर लिटाà¤à¤‚। ये गतिविधि बचà¥à¤šà¥‡ की मांसपेशियों को मजबूत करती है। बाल रोग विशेषजà¥à¤ž शिशॠके शारीरिक विकास के लिठइस कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को करने की सलाह देते हैं। इसे दिन में कम से कम तीन बार लगà¤à¤— पांच मिनट तक करने की सलाह दी जाती है (16) (17)।
शिशॠके साथ खेलें : बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के साथ वे खेल खेलें जिसमें वो आवाज कहां से आ रही है, उसका पता लगाने और दूरी पर दिख रहीं चीजों को समà¤à¤¨à¥‡ के लिठपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ दे सकें। इस तरह के खेलों से उनके विकास में मदद मिलती है (16)।
बचà¥à¤šà¥‡ के साथ समय बिताà¤à¤‚: कà¥à¤› समय निकालकर बचà¥à¤šà¥‡ के साथ बातें करें। वह आपकी बातों को सà¥à¤¨à¤•र अपनी तरफ से पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ देंगे। इससे उनकी शारीरिक गतिविधि बढ़ेगी और मानसिक विकास à¤à¥€ होगा (16)।
आइठजानते हैं कि माता-पिता को बचà¥à¤šà¥‡ के विकास के लिठकब चिंतित होना चाहिà¤à¥¤
2 महीने के बचà¥à¤šà¥‡ के विकास के बारे में माता-पिता को कब चिंतित होना चाहिà¤?
यूà¤à¤¸ सेंटर फॉर डिसीज कंटà¥à¤°à¥‹à¤² à¤à¤‚ड पà¥à¤°à¤¿à¤µà¥‡à¤‚शन (सीडीसी) के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, अगर शिशॠमें निमà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के लकà¥à¤·à¤£ नजर आà¤à¤‚, तो तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करना चाहिठ(18):
अगर पेट के बल लेटने पर सिर को ऊपर उठाने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ नहीं करता है।
हाथों को मà¥à¤‚ह तक ले जाने में परेशानी होती हो।
चलती हà¥à¤ˆ वसà¥à¤¤à¥à¤“ं के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ कोई पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ न देता हो।
चेहरे पर मà¥à¤¸à¥à¤•ान न हो और आवाज न करता हो।
आवाज आने पर à¤à¥€ सिर घà¥à¤®à¤¾à¤•र कोई पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ न करता हो।
आगे हम कà¥à¤› और काम की बातें बता रहे हैं।
इस महीने के लिठचेकलिसà¥à¤Ÿ
दो महीने पूरे होने पर सबसे पहले बचà¥à¤šà¥‡ को चेकअप के लिठले जाà¤à¤‚।
अगर माठका दूध पी रहे हैं, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° से विटामिन-डी की खà¥à¤°à¤¾à¤• लेने के लिठपूछें।
इस महीने लगने वाले टीकों की लिसà¥à¤Ÿ बना लें और जो टीके पिछले महीने नहीं लगे हैं, उनकी à¤à¥€ लिसà¥à¤Ÿ बना लें।
गरà¥à¤¦à¤¨ और बांह की मांसपेशियों को मजबूत बनाने और सà¥à¤šà¤¾à¤°à¥‚ रूप से काम करने के लिठबचà¥à¤šà¥‡ को नियमित रूप से पेट के बल लेटाà¤à¤‚।
सबसे जरूरी बचà¥à¤šà¥‡ की 2 महीने के शिशॠकी तसà¥à¤µà¥€à¤° जरूर लें।
अकà¥à¤¸à¤° पूछे जाने वाले सवाल
कà¥à¤¯à¤¾ मà¥à¤à¥‡ अपने शिशॠको कपड़े में लपेटना चाहिठ?
हां, शिशॠको साफ कपड़े में लपेटना चाहिठ। इससे शिशॠको अचà¥à¤›à¥€ तरह से सोने में मदद मिलती है। वहीं, अगर शिशॠदो महीने का हो गया है, तो आप उसे कपड़े में कसकर न लपेटें (19)। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि शिशॠको हर वकà¥à¤¤ कपड़े से न लपेटें, सिरà¥à¤« सोते वकà¥à¤¤ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कपड़े से लपेटें।
कà¥à¤¯à¤¾ मेरे 2 महीने के बचà¥à¤šà¥‡ के लिठरात à¤à¤° सोना ठीक है?
नेशनल सà¥à¤²à¥€à¤ª फाउंडेशन का कहना है कि 3 महीने तक के शिशॠ24 घंटे में 14-15 घंटे सोते हैं। इस दौरान, सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ शिशॠरात को 7-9 घंटे तक लगातार सो सकते हैं और दिन में à¤à¥€ थोड़ी-थोड़ी देर के लिठसोते हैं (20)। वहीं, रात में 4 से 5 घंटे में à¤à¤• बार उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जरूर दूध पिलाà¤à¤‚।
कà¥à¤¯à¤¾ 2 महीने का बचà¥à¤šà¤¾ रंग देख सकता है?
हां, दो महीने का बचà¥à¤šà¤¾ रंग देख सकता है। खासकर, वो चमकीले या गहरे रंग की तरफ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ होते हैं (21)।
दो महीने का शिशॠफूल की तरह नाजà¥à¤• होता है। उसे अतिरिकà¥à¤¤ देखà¤à¤¾à¤² की जरूरत होती है। इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में हमने दो महीने के शिशॠके विकास के साथ ही उसकी देखà¤à¤¾à¤² के लिठकà¥à¤› जरूरी बातें आपके साथ शेयर की हैं।
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