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डिलीवरी के बाद पहली बार कैसे आते हैं पीरियडà¥à¤¸
डिलीवरी के बाद पहले पीरियड को लेकर महिलाà¤à¤‚ बहà¥à¤¤ असमंजस में रहती हैं। वहीं, उनके मन में यह सवाल à¤à¥€ आता है कि डिलीवरी के कितने दिनों बाद पीरियडà¥à¤¸ आते हैं।
periods after delievry.
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के नौ महीनों तक माहवारी नहीं आती है और यही वजह है कि अकà¥â€à¤¸à¤° महिलाओं को डिलीवरी के बाद पीरियडà¥à¤¸ आने को लेकर मन में कà¥à¤› सवाल रहते हैं।
डिलीवरी के बाद पीरियडà¥à¤¸ आना अकà¥â€à¤¸à¤° इस बात पर निरà¥à¤à¤° करता है कि आप सà¥â€à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवा रही हैं या नहीं। तो आइठजानते हैं कि पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद महिलाओं का मासिक चकà¥à¤° कब शà¥à¤°à¥‚ होता है और इसमें कà¥â€à¤¯à¤¾ बदलाव आते हैं।
कब आते हैं पीरियडà¥à¤¸
डिलीवरी के लगà¤à¤— छह से आठसपà¥â€à¤¤à¤¾à¤¹ के बाद पीरियडà¥à¤¸ आते हैं, वो à¤à¥€ अगर आप सà¥â€à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ नहीं करवा रही हों तो। सà¥â€à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में पीरियड आने का समय हर महिला में अलग हो सकता है। वहीं, कà¥à¤› महिलाओं को तो तब तक पीरियडà¥à¤¸ नहीं आते, जब तक कि वो शिशॠको दूध पिलाती हैं।
पीरियडà¥à¤¸ पà¥à¤°à¥‰à¤¬à¥à¤²à¤® और मिसकैरेज की वजह हो सकती है रसौली, ये है आसान इलाज
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रसौली या फाइबà¥à¤°à¥‰à¤¡à¥à¤¸ à¤à¤• तरह की गांठहोती है, जो यूटà¥à¤°à¤¸ या बचà¥à¤šà¥‡à¤¦à¤¾à¤¨à¥€ में फाइबà¥à¤°à¤¸ टिशà¥à¤¯à¥‚ज से बनती है। महिलाओं का यूटà¥à¤°à¤¸ तीन à¤à¤¾à¤—ों में बंटा होता है और यह यूटà¥à¤°à¤¸ के किसी à¤à¥€ हिसà¥à¤¸à¥‡ में हो सकती है। इसका साइज à¤à¥€ अलग-अलग हो सकता है। रसौली सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨à¥à¤¸ से अलग होती है और यह केवल महिलाओं की सेहत से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾ है।
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रसौली के कारण महिलाओं को पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी में समसà¥à¤¯à¤¾ आती है और पीरियडà¥à¤¸ के दौरान हेवी बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग या बहà¥à¤¤ अधिक दरà¥à¤¦ सहन करना पड़ सकता है। कई बार महिलाओं को बार-बार मिसकैरेज à¤à¥€ à¤à¥‡à¤²à¤¨à¤¾ पड़ता है। इसलिठजरूरी है कि महिलाà¤à¤‚ अपनी सेहत से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ इन समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ जागरूक रहें। खासतौर पर पीरियडà¥à¤¸ के दौरान होनेवाली बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग और अनियमितता को हलà¥à¤•े में ना लें।
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आमतौर पर हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤² डिसबैलंस के कारण यूटà¥à¤°à¤¸ में रसौली बनती है लेकिन सेहत संबंधी अनà¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ à¤à¥€ इसकी वजह हो सकती हैं। हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨à¥à¤¸ बिगड़ने की वजह हर किसी के साथ अलग-अलग हो सकती है। कà¤à¥€ लाइफसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² और खान-पान के कारण तो कà¤à¥€ किसी दवाई के साइडइफेकà¥à¤Ÿ के कारण। लेकिन रसौली की समसà¥à¤¯à¤¾ हेरिडिटी की वजह से अधिक देखने को मिलती है।
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-रसौली के कारण पीरियडà¥à¤¸ के समय कà¥à¤²à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤‚ग बहà¥à¤¤ अधिक बढ़ सकती है। यानी बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग के साथ रकà¥à¤¤ के थकà¥à¤•े आना।
- पेट के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ में बहà¥à¤¤ अधिक दरà¥à¤¦ होना और बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग अधिक होना।
-पेट के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ में à¤à¤¾à¤°à¥€à¤ªà¤¨ लगना और इंटरकोरà¥à¤¸ के वकà¥à¤¤ दरà¥à¤¦ होना।
- बार-बार यूरिन पास होना और वजाइना से बदबूदार डिसà¥à¤šà¤¾à¤°à¥à¤œ होना।
-हर समय वीकनेस रहना, पैरों में दरà¥à¤¦ होना और कबà¥à¤œ की शिकायत रहना।
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लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपिक सरà¥à¤œà¤¨ डॉकà¥à¤Ÿà¤° सोनिया चावला का कहना है कि रसौली की समसà¥à¤¯à¤¾ हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨à¥à¤¸ से संबंधित होती है। रसौली की समसà¥à¤¯à¤¾ 16 से 50 साल की उमà¥à¤° में देखने को मिलती है। इस कारण महिलाओं को मिसकैरेज या पà¥à¤°à¤¿à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी ना होने जैसी समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ होती हैं। अगर किसी पेशेंट की उमà¥à¤° मेनॉपॉज के पास होती है तो हम उसे सरà¥à¤œà¤°à¥€ सजेसà¥à¤Ÿ नहीं करते। बलà¥à¤•ि दवाइयों से ही उनकी बीमारी को कंटà¥à¤°à¥‹à¤² करते हैं। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि मेनॉपॉज के बाद फाइबà¥à¤°à¥‰à¤‡à¤¡à¥à¤¸ के टिशà¥à¤¯à¥‚ज की गà¥à¤°à¥‹à¤¥ खà¥à¤¦-ब-खà¥à¤¦ बंद हो जाती है।
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कà¥à¤› साल पहले तक रसौली का à¤à¤•मातà¥à¤° इलाज यूटà¥à¤°à¤¸ निकालने को माना जाता था। लेकिन अब à¤à¤¸à¤¾ बिलà¥à¤•à¥à¤² à¤à¥€ नहीं है। पेशंट की कंडीशन और रसौली के साइज के आधार पर à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿà¥à¤¸ टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट देते हैं। कई बार सिरà¥à¤« दवाइयों से à¤à¥€ इस समसà¥à¤¯à¤¾ को खतà¥à¤® किया जा सकता है। वहीं ऑपरेट करने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में à¤à¥€ यूटà¥à¤°à¤¸ निकालने की जरूरत नहीं है। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपी के जरिठबहà¥à¤¤ छोटे-छोटे कटà¥à¤¸ लगाकर à¤à¥€ रसौली को निकाला जा सकता है।
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आज à¤à¥€ हमारे देश में लोगों के बीच ना केवल मेडिकल फैसिलिटीज को लेकर जागरà¥à¤•ता की कमी है बलà¥à¤•ि हेलà¥à¤¥ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ बहà¥à¤¤ सारी बातें उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पता ही नहीं होती। इस कारण सबसे अधिक शारीरिक और मानसिक दरà¥à¤¦ महिलाओं को सहन करना पड़ता है। खासतौर पर गांव और कसà¥à¤¬à¥‹à¤‚ में। लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपी से लाखों महिलाओं की पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी से संबंधित समसà¥à¤¯à¤¾ दूर हो सकती है और वे मां बनने की खà¥à¤¶à¥€ पा सकती हैं। लेकिन इसके लिठजरूरत है जागरूकता की।
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लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपी और ओपन सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बारे में बात करते हà¥à¤ डॉकà¥à¤Ÿà¤° सोनिया कहती हैं कि ओपन सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद जहां पेशंटà¥à¤¸ को 3 से 4 दिन हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² में रहना पड़ता था वहीं लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपी के बाद मातà¥à¤° à¤à¤• दिन में आपको डिसचारà¥à¤œ कर दिया जाता है। साथ ही पेशंट को चलने, वॉशरूम जाने के लिठलंबे समय तक किसी के सहारे की जरूरत नहीं होती है। वे अपने सà¤à¥€ काम आराम से कर सकते हैं, यहां तक कि सीढ़ियां चढ़ना à¤à¥€à¥¤
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à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿà¥à¤¸ का कहना है कि लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपी और ओपन सरà¥à¤œà¤°à¥€ की अगर तà¥à¤²à¤¨à¤¾ की जाठतो यह बिलà¥à¤•à¥à¤² à¤à¥€ महंगी नहीं पड़ती है। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि जितना खरà¥à¤š पेशंट को ओपन सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद पेशंट के हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿ सà¥à¤Ÿà¥‡ और अटेंडेंट के खरà¥à¤š पर आता है, लगà¤à¤— उतने में ही लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपी के बाद पेशंट पूरी तरह ठीक होकर दिन बाद ही घर जा सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में उस पर होनेवाले बाकी खरà¥à¤š बच जाते हैं।
à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ: यह आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल डॉकà¥à¤Ÿà¤° सोनिया चावला से बातचीत पर आधारित है। ये गाइनोकॉलजिक लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपिक सरà¥à¤œà¤¨ हैं और पिछले 8 साल से इस फीलà¥à¤¡ में अपनी सेवाà¤à¤‚ दे रही हैं। ये रेजॉइस गाइनी लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपिक सेंटर, दिलà¥à¤²à¥€ में कारà¥à¤¯à¤°à¤¤ हैं और आप इनसे मिलने के लिठ011-26261352 नंबर पर संपरà¥à¤• कर सकते हैं।
अगर नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी के बाद पीरियड जलà¥â€à¤¦à¥€ वापस आ गठतो डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° आपको पोसà¥â€à¤Ÿ डिलीवरी के पहले पीरियड में टेंपन का इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करने से मना कर सकते हैं।
à¤à¤¸à¤¾ इसलिठकहा जाता है कि कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि शरीर अà¤à¥€ à¤à¥€ डिलीवरी के घावों से उà¤à¤° रहा होता है और टेंपन की वजह से योनि में चोट लग सकती है।
सà¥â€à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के दौरान कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚ नहीं आते हैं पीरियडà¥à¤¸
आमतौर पर सà¥â€à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाने वाली महिलाओं को हारà¥à¤®à¥‹à¤‚स की वजह से डिलीवरी के बाद जलà¥â€à¤¦à¥€ पीरियडà¥à¤¸ नहीं आते हैं। बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ मिलà¥â€à¤• बनाने के लिठपà¥à¤°à¥‹à¤²à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤¨ नामक हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ बनता है जो कि पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ हारà¥à¤®à¥‹à¤‚स को दबा सकता है। इसके कारण ओवà¥à¤²à¥‡à¤¶à¤¨ नहीं होता है या फरà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤œà¥‡à¤¶à¤¨ के लिठà¤à¤— रिलीज नहीं होते हैं। इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के बिना पीरियडà¥à¤¸ नहीं आते हैं।
पीरियडà¥à¤¸ का बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ मिलà¥â€à¤• पर असर
पीरियड आने पर आपको बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ मिलà¥â€à¤• में या दूध पीते समय बचà¥â€à¤šà¥‡ की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में कà¥à¤› बदलाव नजर आ सकते हैं। पीरियड लाने वाले हारà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤² बदलाव का असर बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ मिलà¥â€à¤• पर à¤à¥€ पड़ सकता है। जैसे कि अगर दूध की सपà¥â€à¤²à¤¾à¤ˆ कम लग रही है या बचà¥â€à¤šà¤¾ कम दूध पी रहा है तो समठलें कि पीरियड का असर आपके बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ मिलà¥â€à¤• पर à¤à¥€ पड़ाहै।
पीरियडà¥à¤¸ पà¥à¤°à¥‰à¤¬à¥à¤²à¤® और मिसकैरेज की वजह हो सकती है रसौली, ये है आसान इलाज
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रसौली या फाइबà¥à¤°à¥‰à¤¡à¥à¤¸ à¤à¤• तरह की गांठहोती है, जो यूटà¥à¤°à¤¸ या बचà¥à¤šà¥‡à¤¦à¤¾à¤¨à¥€ में फाइबà¥à¤°à¤¸ टिशà¥à¤¯à¥‚ज से बनती है। महिलाओं का यूटà¥à¤°à¤¸ तीन à¤à¤¾à¤—ों में बंटा होता है और यह यूटà¥à¤°à¤¸ के किसी à¤à¥€ हिसà¥à¤¸à¥‡ में हो सकती है। इसका साइज à¤à¥€ अलग-अलग हो सकता है। रसौली सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨à¥à¤¸ से अलग होती है और यह केवल महिलाओं की सेहत से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾ है।
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रसौली के कारण महिलाओं को पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी में समसà¥à¤¯à¤¾ आती है और पीरियडà¥à¤¸ के दौरान हेवी बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग या बहà¥à¤¤ अधिक दरà¥à¤¦ सहन करना पड़ सकता है। कई बार महिलाओं को बार-बार मिसकैरेज à¤à¥€ à¤à¥‡à¤²à¤¨à¤¾ पड़ता है। इसलिठजरूरी है कि महिलाà¤à¤‚ अपनी सेहत से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ इन समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ जागरूक रहें। खासतौर पर पीरियडà¥à¤¸ के दौरान होनेवाली बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग और अनियमितता को हलà¥à¤•े में ना लें।
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आमतौर पर हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤² डिसबैलंस के कारण यूटà¥à¤°à¤¸ में रसौली बनती है लेकिन सेहत संबंधी अनà¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ à¤à¥€ इसकी वजह हो सकती हैं। हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨à¥à¤¸ बिगड़ने की वजह हर किसी के साथ अलग-अलग हो सकती है। कà¤à¥€ लाइफसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² और खान-पान के कारण तो कà¤à¥€ किसी दवाई के साइडइफेकà¥à¤Ÿ के कारण। लेकिन रसौली की समसà¥à¤¯à¤¾ हेरिडिटी की वजह से अधिक देखने को मिलती है।
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-रसौली के कारण पीरियडà¥à¤¸ के समय कà¥à¤²à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤‚ग बहà¥à¤¤ अधिक बढ़ सकती है। यानी बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग के साथ रकà¥à¤¤ के थकà¥à¤•े आना।
- पेट के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ में बहà¥à¤¤ अधिक दरà¥à¤¦ होना और बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग अधिक होना।
-पेट के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ में à¤à¤¾à¤°à¥€à¤ªà¤¨ लगना और इंटरकोरà¥à¤¸ के वकà¥à¤¤ दरà¥à¤¦ होना।
- बार-बार यूरिन पास होना और वजाइना से बदबूदार डिसà¥à¤šà¤¾à¤°à¥à¤œ होना।
-हर समय वीकनेस रहना, पैरों में दरà¥à¤¦ होना और कबà¥à¤œ की शिकायत रहना।
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लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपिक सरà¥à¤œà¤¨ डॉकà¥à¤Ÿà¤° सोनिया चावला का कहना है कि रसौली की समसà¥à¤¯à¤¾ हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨à¥à¤¸ से संबंधित होती है। रसौली की समसà¥à¤¯à¤¾ 16 से 50 साल की उमà¥à¤° में देखने को मिलती है। इस कारण महिलाओं को मिसकैरेज या पà¥à¤°à¤¿à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी ना होने जैसी समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ होती हैं। अगर किसी पेशेंट की उमà¥à¤° मेनॉपॉज के पास होती है तो हम उसे सरà¥à¤œà¤°à¥€ सजेसà¥à¤Ÿ नहीं करते। बलà¥à¤•ि दवाइयों से ही उनकी बीमारी को कंटà¥à¤°à¥‹à¤² करते हैं। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि मेनॉपॉज के बाद फाइबà¥à¤°à¥‰à¤‡à¤¡à¥à¤¸ के टिशà¥à¤¯à¥‚ज की गà¥à¤°à¥‹à¤¥ खà¥à¤¦-ब-खà¥à¤¦ बंद हो जाती है।
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कà¥à¤› साल पहले तक रसौली का à¤à¤•मातà¥à¤° इलाज यूटà¥à¤°à¤¸ निकालने को माना जाता था। लेकिन अब à¤à¤¸à¤¾ बिलà¥à¤•à¥à¤² à¤à¥€ नहीं है। पेशंट की कंडीशन और रसौली के साइज के आधार पर à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿà¥à¤¸ टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट देते हैं। कई बार सिरà¥à¤« दवाइयों से à¤à¥€ इस समसà¥à¤¯à¤¾ को खतà¥à¤® किया जा सकता है। वहीं ऑपरेट करने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में à¤à¥€ यूटà¥à¤°à¤¸ निकालने की जरूरत नहीं है। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपी के जरिठबहà¥à¤¤ छोटे-छोटे कटà¥à¤¸ लगाकर à¤à¥€ रसौली को निकाला जा सकता है।
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आज à¤à¥€ हमारे देश में लोगों के बीच ना केवल मेडिकल फैसिलिटीज को लेकर जागरà¥à¤•ता की कमी है बलà¥à¤•ि हेलà¥à¤¥ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ बहà¥à¤¤ सारी बातें उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पता ही नहीं होती। इस कारण सबसे अधिक शारीरिक और मानसिक दरà¥à¤¦ महिलाओं को सहन करना पड़ता है। खासतौर पर गांव और कसà¥à¤¬à¥‹à¤‚ में। लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपी से लाखों महिलाओं की पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी से संबंधित समसà¥à¤¯à¤¾ दूर हो सकती है और वे मां बनने की खà¥à¤¶à¥€ पा सकती हैं। लेकिन इसके लिठजरूरत है जागरूकता की।
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लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपी और ओपन सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बारे में बात करते हà¥à¤ डॉकà¥à¤Ÿà¤° सोनिया कहती हैं कि ओपन सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद जहां पेशंटà¥à¤¸ को 3 से 4 दिन हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² में रहना पड़ता था वहीं लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपी के बाद मातà¥à¤° à¤à¤• दिन में आपको डिसचारà¥à¤œ कर दिया जाता है। साथ ही पेशंट को चलने, वॉशरूम जाने के लिठलंबे समय तक किसी के सहारे की जरूरत नहीं होती है। वे अपने सà¤à¥€ काम आराम से कर सकते हैं, यहां तक कि सीढ़ियां चढ़ना à¤à¥€à¥¤
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à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿà¥à¤¸ का कहना है कि लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपी और ओपन सरà¥à¤œà¤°à¥€ की अगर तà¥à¤²à¤¨à¤¾ की जाठतो यह बिलà¥à¤•à¥à¤² à¤à¥€ महंगी नहीं पड़ती है। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि जितना खरà¥à¤š पेशंट को ओपन सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद पेशंट के हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿ सà¥à¤Ÿà¥‡ और अटेंडेंट के खरà¥à¤š पर आता है, लगà¤à¤— उतने में ही लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपी के बाद पेशंट पूरी तरह ठीक होकर दिन बाद ही घर जा सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में उस पर होनेवाले बाकी खरà¥à¤š बच जाते हैं।
à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ: यह आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल डॉकà¥à¤Ÿà¤° सोनिया चावला से बातचीत पर आधारित है। ये गाइनोकॉलजिक लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपिक सरà¥à¤œà¤¨ हैं और पिछले 8 साल से इस फीलà¥à¤¡ में अपनी सेवाà¤à¤‚ दे रही हैं। ये रेजॉइस गाइनी लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपिक सेंटर, दिलà¥à¤²à¥€ में कारà¥à¤¯à¤°à¤¤ हैं और आप इनसे मिलने के लिठ011-26261352 नंबर पर संपरà¥à¤• कर सकते हैं।
कैसे अलग होते हैं पोसà¥â€à¤Ÿà¤ªà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤® पीरियड
डिलीवरी के बाद जब पहली बार पीरियड शà¥à¤°à¥‚ होते हैं तो ये पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी से पहले आने वाले मासिक चकà¥à¤° की तरह नहीं होते हैं। डिलीवरी के बाद शरीर मासिक धरà¥à¤® के लिठदोबारा à¤à¤¡à¤œà¤¸à¥â€à¤Ÿ हो रहा होता है और पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद पहले पीरियड में आपको कà¥à¤› बदलाव नजर आ सकते हैं, जैसे कि तेज या कम à¤à¤‚ठन महसूस होना, छोटे खून के थकà¥â€à¤•े आना, अधिक बà¥â€à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग होना, तेज दरà¥à¤¦ और अनियमित मासिक धरà¥à¤®à¥¤
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के बाद पहले पीरियड में आपको जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बà¥â€à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग हो सकता है।
इसमें आपको यूटà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¨ लाइनिंग के गिरने की वजह से तेज à¤à¤‚ठन महसूस हो सकती है। हर महीने के साथ इन लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में कमी आने लगती है। कà¥à¤› दà¥à¤°à¥à¤²à¤ मामलों में थायराइड जैसी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के कारण à¤à¥€ डिलीवरी के बाद पहले पीरियड में जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बà¥â€à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग होती है।
जिन महिलाओं को पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी से पहले à¤à¤‚डोमेटà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ रहा हो, उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ डिलीवरी के बाद पहले पीरियड में हलà¥â€à¤•ी बà¥â€à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग हो सकती है। इस तरह पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी और डिलीवरी के बाद महिलाओं के पीरियडà¥à¤¸ में बदलाव आता है।
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