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महिलाओं के शरीर में अहम बदलाव किशोरावसà¥à¤¥à¤¾ से लेकर हर अवसà¥à¤¥à¤¾ में होते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ परिवरà¥à¤¤à¤¨ जो उनके शरीर में देखे जाते हैं वह अवसà¥à¤¥à¤¾ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ कहलाती है। इसी से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ à¤à¤• समसà¥à¤¯à¤¾ है पोसà¥à¤Ÿà¤ªà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤® à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾à¥¤ यह खासतौर पर डिलीवरी के बाद सामने आती है।
यह है समसà¥à¤¯à¤¾
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान जो कà¥à¤› महिला खाती पीती है, उसका आधा अंश बचà¥à¤šà¥‡ के शरीर तक पहà¥à¤‚चता है। खासतौर पर जरूरी पोषक ततà¥à¤¤à¥à¤µ जैसे कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, आयरन, फॉलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ आदि। पोसà¥à¤Ÿà¤ªà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤® à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में पà¥à¤°à¤¸à¤µ के à¤à¤• से डेढ़ माह के बाद यदि महिला के शरीर में हीमोगà¥à¤²à¥‹à¤¬à¤¿à¤¨ की मातà¥à¤°à¤¾ १२ गà¥à¤°à¤¾à¤® पà¥à¤°à¤¤à¤¿ डेसीलीटर से कम पाई जाती है। आमतौर पर पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद à¤à¥€ महिला के शरीर में खून की मातà¥à¤°à¤¾ सामानà¥à¤¯ रहती है और सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने के दौरान पीरियडà¥à¤¸ à¤à¥€ नहीं होते हैं। इसलिठइस दौरान शरीर में खून की मातà¥à¤°à¤¾ संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ रहती है। जानते हैं खास कारणों को जिस वजह से शरीर में खून की कमी हो सकती है।
ये हो सकते हैं लकà¥à¤·à¤£
आमतौर पर शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में इस रोग के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ की पहचान नहीं हो पाती। लेकिन धीरे-धीरे जिस तरह गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दिन बढ़ते जाते हैं महिला को कई पà¥à¤°à¤•ार के लकà¥à¤·à¤£ महसूस होने लगते हैं। इस बीमारी में कमजोरी आना, सिर à¤à¤¾à¤°à¥€ होना, चकà¥à¤•र आना, थोड़ी देर चलने या खड़े रहने पर à¤à¥€ काफी जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ थकान महसूस करना और सांस फूलना, धडक़न बढ़ जाना आदि पà¥à¤°à¤®à¥à¤– हैं। इसके अलावा महिला को सà¥à¤µà¤à¤¾à¤µ में चिड़चिड़ापन à¤à¥€ महसूस होता है। किसी à¤à¥€ काम में मन नहीं लगता। कई बार दूध न उतरने की à¤à¥€ शिकायत करती दिखती हैं।
à¤à¤¸à¥‡ होता इलाज
सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¤¸à¥‚ति रोग विशेषजà¥à¤ž महिला को आयरन से यà¥à¤•à¥à¤¤ चीजें खाने की सलाह देती है। इसके लिठà¤à¥‹à¤œà¤¨ में हरी पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, साबà¥à¤¤ अनाज आदि खाने के लिठकहती हैं ताकि पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक रूप से आयरन की कमी को पूरा किया जा सके। इससे शरीर में दà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ का खतरा à¤à¥€ काफी हद तक कम हो जाता है। पà¥à¤°à¤¸à¤µ बाद बचà¥à¤šà¥‡ को सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ नियमित रूप से करवाà¤à¤‚। आयरन की गोलियां या अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤•ार के सपà¥à¤²à¥€à¤®à¥‡à¤‚टà¥à¤¸ लेने से साइड इफैकà¥à¤Ÿà¥à¤¸ होने का डर है तो विशेषजà¥à¤ž आयरन के इंजेकà¥à¤¶à¤¨ à¤à¥€ निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ समय अंतराल के बीच में लगाते हैं। हालांकि इससे कई महिलाओं को पेट में कीड़े होने की शिकायत à¤à¥€ हो सकती है जिसके लिठविशेष पà¥à¤°à¤•ार की दवा दी जाती है।ये हैं पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारण
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान चलने वाली आयरन और फॉलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ की दवाओं को नियमित न लेने से दिकà¥à¤•त हो सकती है।
गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ से पहले ही यदि महिला को à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ यानी शरीर में खून की कमी है तो यह रोग हो सकता है।
पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद यदि अधिक बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग हो तो à¤à¥€ रकà¥à¤¤ की मातà¥à¤°à¤¾ शरीर में कम हो जाती है। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के बीच अंतर न रखने पर à¤à¥€ यह समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है।
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान आयरन से यà¥à¤•à¥à¤¤ फल और सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को न खाने से à¤à¥€ इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है।
गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला का वजन यदि अधिक हो तो à¤à¥€ खून की कमी हो सकती है।होने वाली समसà¥à¤¯à¤¾
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान या पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद यदि महिला को पोसà¥à¤Ÿà¤ªà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤® à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ यानी शरीर में कमी हो तो इससे कई सेहत संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हो सकती हैं। इसमें पà¥à¤°à¤®à¥à¤– रूप से शामिल हैं-
इस वजह से पोसà¥à¤Ÿà¤¨à¥ˆà¤Ÿà¤² डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ काफी हद तक बढ़ जाती है।
इससे यूरिनरी टà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿ इंफैकà¥à¤¶à¤¨ होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ ३० पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ तक जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो जाती है।
महिला लकà¥à¤·à¤£ के रूप में अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• थकान और आलस महसूस करती है।
जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° महिलाओं में आयरन की कमी से होने वाली खून की कमी सबसे अहम परेशानी बनकर सामने आती है।
पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद पूरà¥à¤£ रूप से बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤®à¤¿à¤²à¥à¤• का न बनना। कà¥à¤› महिलाà¤à¤‚ बचà¥à¤šà¥‡ को दूध तो पिला देती हैं लेकिन दूध की कà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ इस समसà¥à¤¯à¤¾ से तà¥à¤²à¥à¤®à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• रूप से कम होती है।गरà¥à¤à¤¸à¥à¤¥ शिशॠà¤à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤
पोसà¥à¤Ÿà¤ªà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤® à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ केवल महिला के लिठही नहीं बलà¥à¤•ि शिशॠके लिठà¤à¥€ नà¥à¤•सानदेह साबित होता है। इनमें ये पà¥à¤°à¤®à¥à¤– रूप से शामिल है-
यदि मां में खून की कमी होगी तो शिशॠपà¥à¤°à¤¸à¤µ पूरà¥à¤µ होने के अलावा जनà¥à¤® के समय कम वजन का पैदा हो सकता है।
मां में होने वाली खून की कमी की समसà¥à¤¯à¤¾ बचà¥à¤šà¥‡ में à¤à¥€ जनà¥à¤®à¤œà¤¾à¤¤ या आनà¥à¤µà¤¾à¤‚शिक रूप से सामने आ सकती है।
शिशॠमें खासतौर पर मानसिक समठपर बà¥à¤°à¤¾ असर पड़ सकता है। उसमें नà¥à¤¯à¥‚रोकॉगà¥à¤¨à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤µ डिसऑरà¥à¤¡à¤°à¥à¤¸ की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ सामानà¥à¤¯ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो सकती है। साथ ही शिशॠमनोरोगों सहित पैदा हो सकता है। इसके अलावा उसके मनोविकास में बाधा आ सकती है।
मां यदि पोसà¥à¤Ÿà¤ªà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤® à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ की शिकार है तो जनà¥à¤® के बाद शिशॠका मानसिक विकास धीमा हो सकता है। हो सकता है उसके सोचने व समà¤à¤¨à¥‡ की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ और यादà¥à¤¦à¤¾à¤¶à¥à¤¤ काफी कमजोर या धीमी हो।
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