एंटीबायोटिक और एंटीबैक्टीरियल में क्या अंतर है?HealthPlanet

Posted on Mon 5th Dec 2022 : 10:15

एंटीबैक्टीरियल जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि यह बैक्टेरिया के विरुद्ध काम करता है। एंटीबायोटिक का दायरा बड़ा है और यह बैक्टेरिया के अलावा अन्य सूक्ष्मजीवों पर भी प्रभावी है जैसे कि फंगस, वायरस इत्यादि। हर एंटीबायोटिक एंटीबैक्टीरियल होता है जबकि जरूरी नहीं कि हर एंटीबैक्टीरियल एंटीबायोटिक हो। हर एंटीबायोटिक बैक्टेरिया के अलावा अन्य सूक्ष्मजीवों पर प्रभावी हो यह भी आवश्यक नहीं। ऐसे भी एंटीबायोटिक हैं जो सिर्फ बैक्टेरिया पर ही प्रभावी हैं। प्रश्न उठता है कि तब तो क्या ऐसे एंटीबायोटिक भी एंटीबैक्टीरियल ही हुए?

फार्माकोलॉजी के अनुसार दोनों में अंतर इनके उत्पादन के तरीके से है। एंटीबायोटिक किसी न किसी सूक्ष्मजीव से ही उत्पादित होते हैं और किसी अन्य सूक्ष्मजीव पर प्रभावी होते हैं। दुनिया का पहला एंटीबायोटिक पेनिसिलिन एक फंगस से प्राप्त किया जाता है। कुछ अन्य एंटीबायोटिक बैक्टेरिया अथवा अन्य सूक्ष्मजीव से प्राप्त किये जाते हैं। ऐसा भी होता है कि सूक्ष्मजीवों से प्राप्त एंटीबायोटिक को रासायनिक विधि से बना दिया जाए ऐसे में उन्हें सिंथेटिक एंटीबायोटिक कहा जाता है। एंटीबैक्टीरियल रासायनिक विधि से ही बनाये जाते हैं और इनका मूल कंपाउंड किसी सूक्ष्मजीव से प्राप्त नहीं होता। बैक्ट्रीम, ओरिप्रिम जैसे सल्फा कंपाउंड एंटीबैक्टीरियल हैं जो कि रासायनिक विधि से बनाये जाते हैं जबकि पेनिसिलिन, टेट्रासाइक्लिन इत्यादि एंटीबायोटिक हैं जो कि किसी न किसी सूक्ष्मजीव से प्राप्त किये जाते हैं।

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