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कब पड़ती है मरीज को à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोपी टेसà¥à¤Ÿ की जरूरत? जानें इस जांच के बारे में सबकà¥à¤›
बहà¥à¤¤ बार à¤à¤¸à¤¾ होता है जब मरीज किसी समसà¥à¤¯à¤¾ से जूठरहा होता है और लंबे इलाज और दवा के सेवन के बाद à¤à¥€ उसे आराम नहीं मिलता है। à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में डॉकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोपी टेसà¥à¤Ÿ का सहारा लेते हैं। लेकिन à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोपी टेसà¥à¤Ÿ होता कà¥à¤¯à¤¾ है? à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोपी को आप यूं समठसकते हैं कि यह à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ मशीन होती है जो पतली नली जैसी दिखती है और इसके आगे à¤à¤• छोटा सा कैमरा लगा होता है। डॉकà¥à¤Ÿà¤° इसे मरीज के मà¥à¤‚ह के माधà¥à¤¯à¤® ये गले में डालते हैं और शरीर में कà¥à¤¯à¤¾ समसà¥à¤¯à¤¾ है ये देख पाते हैं।
यानि कि à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोपी à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ मेडिकल पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥‡à¤¸ है जिसमें डॉकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¤• मशीन की मदद से किसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के शरीर में कà¥à¤¯à¤¾ चल रहा है ये देखने में समरà¥à¤¥ होते हैं। यह à¤à¤• बहà¥à¤¤ ही जटिल और गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ होती है। हालांकि इसे करने में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ समय नहीं लगता है। à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोपी टेसà¥à¤Ÿ- à¤à¤¸à¥‹à¤«à¥‡à¤—स, गले, हारà¥à¤Ÿ, पेट, कोलन, कान, जà¥à¤µà¥‰à¤‡à¤‚टà¥à¤¸, नाक, दिल, यूरिनरी टà¥à¤°à¥‡à¤•à¥à¤Ÿ और à¤à¤¬à¥à¤¡à¥‹à¤®à¤¨ में किया जा सकता है। अब आपके दिमाग में यकीनन यह सवाल गोते खा रहा होगा कि आखिर यह टेसà¥à¤Ÿ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ जरूरी और किस वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ और बीमारी में कराने की जरूरत पड़ती है? यह जानने के लिठआपको ये लेख पढ़ने की जरूरत है। तो आइठविसà¥à¤¤à¤¾à¤° से जानते हैं à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोपी के बारे में-
किन लोगों को पड़ती है इसकी जरूरत?
à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोपी टेसà¥à¤Ÿ मेडिकल कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में बहà¥à¤¤ ही à¤à¤¡à¤µà¤¾à¤‚स तकनीक मानी जाती है। यह इतनी à¤à¤¡à¤µà¤¾à¤‚स है कि मà¥à¤‚ह से पेट के रासà¥à¤¤à¥‡ जाने के दौरान ही यह रोग के बारे में बताने लगती है। यानि कि जब डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ इसे पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करते हैं तो इसके रिजलà¥à¤Ÿ के लिठकिसी रिपोरà¥à¤Ÿ के आने का इंतजार नहीं करना पड़ता, बलà¥à¤•ि मरीज के शरीर में कà¥à¤¯à¤¾ चल रहा है वह साथ-साथ मॉनिटर पर दिखता है। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह बहà¥à¤¤ ही à¤à¤¡à¤µà¤¾à¤‚स और महंगी तकनीक है इसलिठइसे कà¥à¤› विशेष सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं में ही इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है। नीचे हम आपको वो सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ बता रहे हैं जब इसकी जरूरत पड़ती है।
1. जब उलà¥à¤Ÿà¥€ के साथ मà¥à¤‚ह से खून आà¤
2. साइनस की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में
3. गà¥à¤°à¤¾à¤¸ नली की समसà¥à¤¯à¤¾ होने पर
4. à¤à¤¸à¥‹à¤«à¥‡à¤—स में दरà¥à¤¦ या जलन होने पर
5. पेट में तेज दरà¥à¤¦ और जलन होने पर
6. गले और छाती में छाले होने पर
7. आंतों में तेज दरà¥à¤¦ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में
8. à¤à¤¯à¤‚कर कबà¥à¤œ में
9. मल के साथ खून आने पर
11. गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¥à¤¯ की जांच में
12. गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में à¤à¥‚रà¥à¤£ जांच
13. गमà¥à¤à¥€à¤° सरà¥à¤œà¤°à¥€ से पहले
14. कान के परà¥à¤¦à¥‡ के रोगों में
कैसे होती है à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोपी की पà¥à¤°à¤•िया?
यह बहà¥à¤¤ ही सेंसटिव टेसà¥à¤Ÿ होता है इसलिठइसे किसी à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ, विशिषà¥à¤Ÿ और सà¥à¤ªà¥‡à¤¶à¤²à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ डॉकà¥à¤Ÿà¤° से ही कराना चाहिà¤à¥¤ डॉकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोपी नली को मà¥à¤‚ह में इस तरह से डालते हैं ताकि अनà¥à¤¯ अंगों को नà¥à¤•सान न पहà¥à¤‚चे और रगड़ न लगे। आमतौर पर à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोपी करने में 45 मिनट से à¤à¤• घंटे का समय लग सकता है लेकिन अगर ऑपरेशन की नौबत आती है तो समय बढ़कर 2 घंटे à¤à¥€ लग सकते हैं। इस दौरान मरीज में मà¥à¤‚ह का लाल होना, हाथ पैर फड़फड़ना, आंखें लाल होना या आंसू आना, जी घबराना और उलà¥à¤Ÿà¥€ आने जैसे लकà¥à¤·à¤£ दिख सकते हैं। हालांकि टेसà¥à¤Ÿ के दौरान डॉकà¥à¤Ÿà¤° तो हाथों हाथ देख लेते हैं कि मरीज के शरीर में कà¥à¤¯à¤¾ दिकà¥à¤•त है जबकि टेसà¥à¤Ÿ के तà¥à¤°à¤‚त बाद रिपोरà¥à¤Ÿ के माधà¥à¤¯à¤® से मरीज को à¤à¥€ डॉकà¥à¤Ÿà¤° दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ समà¤à¤¾à¤¯à¤¾ जाता है।
कà¥à¤¯à¤¾ à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोपी नà¥à¤•सानदायक à¤à¥€ है?
अगर आप किसी सà¥à¤ªà¥‡à¤¶à¤²à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ की निगरानी में à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोपी टेसà¥à¤Ÿ करा रहे हैं तो आपको घबराने की बिलà¥à¤•à¥à¤² à¤à¥€ जरूरत नहीं है, यह पूरी तरह सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ होता है। हालांकि जांच के दौरान मरीज को सामानà¥à¤¯ उलà¥à¤Ÿà¥€, गले और मà¥à¤‚ह में दरà¥à¤¦ और चकà¥à¤•र आना जैसी दिकà¥à¤•तें हो सकती हैं, इसके लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° दवा या लिकà¥à¤µà¤¿à¤¡ देते हैं, जिससे कà¥à¤› देर में ही आराम मिल जाता है। à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोपी की जांच के बाद 1-2 दिन तक आराम करने की सलाह दी जाती है। इस लिहाज से हम समठसकते हैं कि à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोपी टेसà¥à¤Ÿ 99% सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ होता है।
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