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कैसे है बचाव संà¤à¤µ
हमारे देश में लोगों को à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के बारे में जानकारी कम है। अकà¥à¤¸à¤° लोगों को पता ही नहीं चलता कि वे बार-बार बीमार पड़ रहे हैं तो उसकी वजह खाना या मौसम à¤à¥€ हो सकता है। दरअसल, अगर किसी चीज को लेकर शरीर में रिà¤à¤•à¥à¤¶à¤¨ दिखे तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° को दिखाना चाहिठऔर दोबारा इस चीज के इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² से बचना चाहिà¤à¥¤
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® को मजबूत करने के लिठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जरूरी चीजें à¤à¥€ दी जानी चाहिà¤à¥¤ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को चारदीवारी में बंद करके नहीं रखा जाना चाहिà¤à¥¤
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को धूल-मिटà¥à¤Ÿà¥€ और धूप में खेलने दें। ये बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बारिश या दूसरे पानी से à¤à¥€ खेलने दें। हां, धूल-मिटà¥à¤Ÿà¥€ में खेलने के बाद उनके हाथ-पैर अचà¥à¤›à¥‡ से धà¥à¤²à¤µà¤¾à¤¨à¤¾ न à¤à¥‚लें।
अगर किसी को धूल और धà¥à¤à¤‚ से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है तो घर से बाहर निकलने से पहले नाक पर रà¥à¤®à¤¾à¤² रखना चाहिà¤à¥¤ बचाव ही à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का इलाज है।
जिन लोगों को ठंड से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है, वे ठंडी और खटà¥à¤Ÿà¥€ चीजों जैसे कि अचार, इमली, आइसकà¥à¤°à¥€à¤® आदि के इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² से बचें।
गंदगी से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ वाले लोगों को समय-समय पर चादर, तकिठके कवर और परà¥à¤¦à¥‡ à¤à¥€ बदलते रहना चाहिà¤à¥¤ कारपेट यूज न करें या फिर उसे कम-से-कम 6 महीने में डà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤•à¥à¤²à¥€à¤¨ करवाते रहें।
जिस दवा से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है, उसे खाने से बचें। डॉकà¥à¤Ÿà¤° को दिखाà¤à¤‚ तो इस à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के बारे में जरूर बताà¤à¤‚।
घर में केरोसिन वाले सà¥à¤Ÿà¥‹à¤µ की जगह à¤à¤²à¤ªà¥€à¤œà¥€ या इलेकà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤• सà¥à¤Ÿà¥‹à¤µ यूज करें। किचन में à¤à¤—à¥à¤œà¥‰à¤¸à¥à¤Ÿ फैन जरूर लगवाà¤à¤‚ और खाना पकाते समय उसे चलाà¤à¤‚।
घर को हमेशा बंद न रखें। घर को खà¥à¤²à¤¾ और हवादार बनाठरखें ताकि साफ हवा आती रहे।
खिड़कियों में महीन जाली लगवाà¤à¤‚ और जाली वाली खिड़कियों को हमेशा बंद रखें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि खà¥à¤²à¥€ खिड़की से कीड़े और मचà¥à¤›à¤° आपके घर में घà¥à¤¸ सकते हैं।
दीवारों पर फफूंद और जाले हो गठहों, तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ साफ करते रहें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि फफूंद के कारण à¤à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो सकती है।
बारिश के मौसम में फूल वाले पà¥à¤²à¤¾à¤‚टà¥à¤¸ को घर के अंदर न रखें।
असà¥à¤¥à¤®à¤¾ और à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ में फरà¥à¤•
असà¥à¤¥à¤®à¤¾ और à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ में कई चीजें कॉमन हैं, लेकिन फिर à¤à¥€ दोनों अलग-अलग हैं। लगातार कई दिनों तक जà¥à¤•ाम, खांसी या सांस लेने में दिकà¥à¤•त हो तो इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ इसकी वजह हो सकता है, जबकि असà¥à¤¥à¤®à¤¾ में सांस लेने में परेशानी के अलावा रात में सोते वकà¥à¤¤ खांसी आना, छाती में जकड़न महसूस होना, à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ करते हà¥à¤ या सीढ़ियां चढ़ते वकà¥à¤¤ सांस फूलना या खांसी आना, जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ ठंड या गरà¥à¤®à¥€ होने पर सांस लेने में दिकà¥à¤•त होना जैसे लकà¥à¤·à¤£ होते हैं। हालांकि à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿà¥à¤¸ का कहना है कि असà¥à¤¥à¤®à¤¾ à¤à¥€ à¤à¤• तरह की à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ ही है। जैसे ही शरीर à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ वाली चीजों के संपरà¥à¤• में आता है, असà¥à¤¥à¤®à¤¾ का अटैक होता है। इसे à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¿à¤• असà¥à¤¥à¤®à¤¾ कहते हैं। हां, असà¥à¤¥à¤®à¤¾ और à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ में à¤à¤• और कनेकà¥à¤¶à¤¨ है। अगर किसी को à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¿à¤• असà¥à¤¥à¤®à¤¾ नहीं है, सिरà¥à¤« à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है तो असà¥à¤¥à¤®à¤¾ होने का खतरा 40 फीसदी तक बढ़ जाता है
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